राजस्थान: मंत्रिमंडल विस्तार सुगबुगाहट के बीच गहलोत से मिले पायलट कैम्प के विश्वेन्द्र सिंह, जानें क्यों?

- पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह फिर चर्चा में, मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाक़ात के बाद लगाई जा रही कई तरह की अटकलें, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट के बीच मिले हैं दोनों नेता, बगावत के चलते गंवाना पडा था कैबिनेट मंत्री पद, भरतपुर के डीग-कुम्हेर से विधायक हैं विश्वेन्द्र

 

By: nakul

Published: 21 Nov 2020, 12:26 PM IST

जयपुर।

पूर्व मंत्री व डीग-कुम्हेर विधायक विश्वेन्द्र सिंह ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री अशोक से मुलाक़ात की। मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार की सुगबुगाहट के बीच दोनों नेताओं की मुलाक़ात को हालांकि जाट आरक्षण से जुड़े मसले पर बातचीत बताया जा रहा है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं।

गौरतलब है कि विश्वेन्द्र मौजूदा गहलोत सरकार में ही कैबिनेट मंत्री के दर्जे पर काबिज़ रहे हैं। लेकिन बीच कार्यकाल में ही बगावत करने के चलते उन्हें मंत्री पद से हाथ धोना पड़ गया था। अब चर्चाएँ इस बात को लेकर भी हैं कि क्या बगावत कर चुके पायलट खेमे के नेताओं को संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में तरजीह मिलती है या नहीं।

9 मंत्री बनाए जाने की है संभावना

सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार को लेकर कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी अजय माकन और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की चर्चा भी हो चुकी है, लेकिन इसके नए साल में ही होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्ज़ा प्राप्त चार नेताओं की जगह खाली है। सचिन पायलट, रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह के मंत्रिमंडल से बाहर होने के बाद बीते दिनों कैबिनेट मंत्री भंवर लाल मेघवाल के निधन से भी मंत्रियों पद भरने की वजह महसूस की जा रही है। ऐसे में 9 मंत्री बनाया जाना संभावित है।

ये बन रही संभावनाएं

कैबिनेट में अधिकतम 30 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं उनमें अब 9 मंत्रियों के पद रिक्त हैं, ऐसे में गहलोत कैबिनेट महज 21 सदस्यों के जरिए ही चल रही हैं इनमें भी ज्यादा संख्या अब राज्य मंत्रियों की रह गई है। हालांकि कांग्रेस हलकों में भले ही मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं शुरू हो गई हो, लेकिन सरकार चाहकर भी जनवरी या फरवरी माह से पहले मंत्रिमंडल विस्तार नहीं कर पाएगी।

दऱअसल इसकी एक वजह एआईसीसी की ओर से गठित तीन सदस्यीय कमेटी हैं जिसके एक प्रमुख सदस्य अहमद पटेल भी लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और गुड़गांव के एक अस्पताल में भर्ती हैं, ऐसे में जब तक वे पूरी तरह ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक मंत्रिमंडल विस्तार के लिए इंतजार करना होगा।

सरकार बचाने के साथ ही शुरू हुई थी मंत्रिमंडल की कवायद
दरअसल सचिन पायलट गुट के सरकार से बगावत करने के बाद आए सियासी संकट के बीच विधानसभा में बहुमत परीक्षण के दौरान बहुमत साबित के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की कवायद शुरू हो गई थी। मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर सीएम गहलोत की केंद्रीय नेताओं के साथ चर्चा भी हो चुकी थी। सरकार बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले निर्दलीय, बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों को मंत्रिमंडल के साथ-साथ संसदीय सचिव और राजनीतिक नियुक्तियों में एडजस्ट करने की बात कही जा रही थी।

... इधर 'आरक्षण' मामले में हुई मुलाक़ात

पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह अब भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण मुद्दे के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। समाज की आरक्षण सम्बन्धी मांग के सिलसिले में उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से कल व्यक्तिगत मुलाक़ात भी की। बताया गया है कि गहलोत की ओर से जल्द इस मामले पर उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया है।

पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने आरक्षण मांग का समर्थन करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 के दौरान जब जाट समाज को ओबीसी में शामिल किया था तब भरतपुर-धौलपुर के जाट समाज को उसमें वंचित रखा गया था।

उन्होंने कहा कि समाज को आरक्षण का हक़ दिलवाने के लिए समाज ने लंबा संघर्ष किया है। समाज को लगभग तीन साल पहले सफलता भी मिली जब सर्वे होने के बाद समाज को राज्य में आरक्षण का लाभ मिला। लेकिन केंद्र में आरक्षण की अभी भी दरकार है।

यही वजह है कि मंत्री ने सरकार से केंद्र सरकार को भरतपुर-धौलपुर जाट समाज को केंद्रीय सेवाओं में ओबीसी कैटेगरी में शामिल करवाने के लिए सिफारिश करने का आग्रह किया है।

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