कोरोना लॉकडाउन पड़ा वंचित वर्ग की कई महिलाओं पर भारी, झेलना पड़ा गर्भपात का दंश

राजस्थान पत्रिका संवाददाता ने गांवों और ढाणियों में निचले तबके महिलाओं से बात की तो फूटा उनका दर्द

परिवार नियोजन के साधनों की पहुंच ठप होने का बड़ा असर, महिलाओं ने झेली शारीरिक व आर्थिक परेशानियां

By: Vikas Jain

Published: 20 Sep 2020, 11:29 AM IST

विकास जैन

जयपुर। प्रदेश में कोरोना काल वंचित वर्ग व सुदूर जिलों सहित गांव ढाणियों की महिलाओं के लिए परिवार नियोजन साधनों की उपलब्धता के लिहाज से संकट वाला रहा। गांव ढाणियों में वंचित व गरीब वर्ग को समय पर परिवार नियोजन के साधन उपलब्ध ही नहीं हो पाए, जिसके कारण उन्हें गर्भपात की स्थिति से भी गुजरना पड़ा।

राजस्थान पत्रिका संवाददाता ने परिवार नियोजन साधनों की पहुंच लॉकडाउन के दौरान सहज नहीं होने या कम होने की जमीनी पड़ताल की तो यह स्थिति सामने आई। बातचीत में महिलाओं ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान सब कुछ बंद था और वे लोग बाहर भी नहीं निकल पाए। जिसके कारण ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ा। हालांकि राज्य सरकार ने जिलों के प्रशासन के जरिये व स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी इनकी पहुंच के प्रयास लॉकडाउन के दौरान किए, लेकिन वे भी पर्याप्त साबित नहीं हो पाए।

इस तरह बयां किया महिलाओं ने अपना दर्द...पत्रिका से लिखित में भी दर्द साझा किया

लॉकडाउन के कारण मैं अपना टेस्ट नहीं कर पाई और मैंरे प्रेगनेंसी हो गई। जबकि मेरी छोटी लड़की अभी 11 महीने की ही है। मुझे बाद में गर्भपात करवाना पड़ा। शारीरिक तौर पर कमजोर हुई, आर्थिक नुकसान भी हुआ। अनलॉक होने पर पति के साथ टोंक गई तो पता चला कि वह गर्भवती है, उसके बाद उसने गर्भपात करवा लिया। इस दौरान समय पर वह अपना दर्द भी किसी से बयां नहीं कर सकी। मैं टोंक जाकर गर्भपात करवाकर आई, लेकिन किसी भी सरकारी संस्था या स्वयंसेवी संस्था ने मुझसे आकर पूछताछ नहीं की आखिर मुझे यह कदम क्यों उठाना पड़ा।

निर्मला, निवासी, जिला टोंक

अनलॉक में भी नहीं मिल रहे आंगनबाड़ी केन्द्रों से

कोरोना के कारण उन्हें कई सारी परेशानियां का सामना करना पड़ा। परिवार नियोजन के साधन उपलब्ध नहीं पहो पाए। इस समय भी ये नहीं मिल पा रहे हैं और पैसे देकर ही मेडिकल स्टोर से लाने पड़ रहे हैं हमारी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि यह सब लगातार खर्च कर सकें। कोरोना काल से पहले हमें यह साधन आंगनबाड़ी केन्द्रों से मिल रहे थे, लेकिन अनलॉक के बाद भी यह साधन नहीं मिल रहे। हमें मेडिकल से ही लाना पड़ रहा है।

पूजा, निवासी, जिला टोंक

लॉकडाउन के दौरान हमें गोलियां एएनएम से मिलती थी, लेकिन एएनएम दूसरे कामों में ज्यादा व्यस्त रहती थी। ऐसे में कभी कभी देरी से मिलती थी।

निर्मला, सुरपुर, डूंगरपुर

कोरोना काल के शुरूआती दौर में हमें परिवार नियोजन के साधन नहीं मिले। उस समय निजी मेडिकल विक्रेताओं को ज्यादा पैसे देकर साधन मंगवाए।

रेणुका, डूंगरपुर

हमें लॉकडाउन के दौरान परिवार नियोजन के साधन हासिल करने में काफी परेशानी आई। जिसके कारण बड़ी परेशानियां हमें हुई।

अनीता, निवासी बूंदी जिला

गांवों की महिलाओं के लिए सुरक्षित गर्भपात भी बड़ी चुनौती

अनचाहे गर्भ के समय महिलाओं को गांवों में सुरक्षित गर्भपात की सुविधा भी नहीं मिल पाती। राजस्थान में जिला स्तर पर ही यह सुविधा बमुश्किल मिल पाती है। ऐसी महिलाओं को बड़े सेंटर पर जाना पड़ता है। गांव ढाणियों की महिलाओं के लिए यह कापफी मुश्किल भरा होता है। संयुक्त परिवार में रहने वाली महिलाओं के लिए तो दूसरे शहर में जाने की अनुमति भी पहले परिवार में लेनी होती है। अधिकांश मामलों में महिलाएं यह कदम उठा ही नहीं पाती। इस समय प्रदेश में बड़े शहरों के अस्प्तालों के अलावा निजी अस्पतालों में भी सुरक्षित गर्भपात नियमानुसार हो सकता है, लेकिन यहां इसके लिए हजारों रूपए लिए जाते हैं। गर्भपात के समय महिलाओं को सरकारी नियमों का भी खयाल रखना चाहिए। 20 सप्ताह के बाद गर्भपात नहीं करवाया जा सकता।

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राजस्थान में 1.60 लाख जोड़ों पर असर पड़ने का अनुमान

एक अध्ययन में अनुमान लगाया जा चुका है कि राजस्थान में 1.60 लाख जोड़े गर्भ निरोधन प्राप्त करने में असफ़ल होंगे। जिससे 1 लाख 66 हजार 217 अनचाहे गर्भधारण, 47 हजार 539 जीवित बच्चों का जन्म, 1 लाख 1 हजार 62 गर्भपात, 58 हजार 319 असुरक्षित गर्भपात और 122 मातृ मृत्यु होंगी। वर्ष 2020 में, 57,757 ट्यूबल लीगेशन, 92,040 आईयूसीडी, 56,382 इंजेक्शन से गर्भनिरोधक, 1.21 लाख ओसीपी, 54,007 ईसीपी सेवाएं रद्द होंगी और 25.49 लाख कंडोम का प्रयोग नहीं होगा।

लॉकडाउन ने बिगाड़ा परिवार नियोजन कार्यक्रम

दरअसल, देश में 25 मार्च से लॉकडाउन के बाद लाखों महिलाएं चाहते हुए भी अपने पसंदीदा गर्भनिरोधक हासिल करने में असफल रहीं हैं। आने जाने पर रोक लगने के कारण बिना डॉक्टर के पर्ची पर मिलने वाली गर्भ निरोधक दवाई, कंडोम, ओसीपी और ईसीपी हासिल करने में लोगों को काफ़ी मुश्किलों का सामना इस दौरान करना पड़ा।


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परिवार नियोजन कार्यक्रमों का संचालन करने वाले जयपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.नरोत्तम शर्मा का कहना है कि प्रशासन के सहयोग से लॉकडाउन के दौरान भी परिवार नियोजन केत साधन पहुंचाए गए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को इसमें आई परेशानियों की जानकारी करवाकर उचित कदम उठाएंगे।

Vikas Jain Reporting
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