वस्त्रनगरी से उद्यमियों का मोहभंग

वस्त्रनगरी से उद्यमियों का मोहभंग

Tej Narayan Sharma | Updated: 09 Aug 2015, 06:02:00 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

अब तक 15 सौ करोड़ का निवेश चित्तौडग़ढ़   व बांसवाड़ा में, भीलवाड़ा में पानी, जमीन व प्रशासन की बेरुखी से हताशा

वस्त्रनगरी में जमीन व पानी के संकट और प्रशासन की बेरुखी के चलते भीलवाड़ा के उद्यमी अन्य जिलों में निवेश कर लग रहे है। गत वर्षों में बड़े उद्योग समूहों ने चित्तौडग़ढ़ व बांसवाड़ा में करीब 15 सौ करोड़ रुपए का निवेश कर चुके हैं, जिससे करीब डेढ़ हजार से अधिक लोगों को भी रोजगार से वंचित रहना पड़ा है। हाल ही में जयपुर, मुम्बई तथा दिल्ली में रिसर्जेन्ट राजस्थान के तहत एमओयू के बाद अब उद्यमियों के सामने जमीन की तलाश सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।


प्रशासन ने हालात में बदलाव नहीं किया तो ये उद्योग भी अन्य जिलों जा सकते हैं। मेवाड़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अनुसार आरएसडब्ल्यूएम ने पिछले कुछ सालों में बांसवाड़ा में तीन बड़ी यूनिट में करीब आठ सौ करोड़ का निवेश किया है, जिससे वहां सात हजार से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया हुआ है। ये तीनों यूनिट भीलवाड़ा में लगने वाली थी।



 इसी प्रकार छह अगस्त को दिल्ली में रिसर्जेन्ट राजस्थान के तहत एमओयू के अनुसार भीलवाड़ा की कम्पनियां संगम ग्रुप व नितिन स्पिनर्स करीब 800 करोड़ का निवेश कर चित्तौड़ में उद्योग  लगाने जा  रही हैं। ये उद्योग भी जमीन व पानी के अभाव में भीलवाड़ा से बाहर जा रहे हैं।


इनको जमीन की तलाश
श्री अनन्त सिन्टेक्स के प्रबन्धक अनिल सोनी का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के सामने एमओयू पर हस्ताक्षर किया है और अब जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।इसी प्रकार मोहित भीमसरिया जमीन की तलाश कर रहे हैं। अन्य उद्यमी भी जमीन की तलाश कर रहे हैं। जमीन नहीं मिलने पर अन्य जिलों में उद्योग लगाए जाएंगे।


नहीं है जमीन

 जिला उद्योग केन्द्र व रीको के पास भीलवाड़ा के आस-पास जमीन नहीं है। जो जमीन मिली है, उनके आदेश तो हो गए लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इसी प्रकार चित्तौडग़ढ़ में सोनियाणा स्थित रीको की जमीन को अब तक पर्यावरण स्वीकृति तक नहीं मिल पाई है। पानी की समस्या के चलते नए स्पिनिंग उद्योग बाहर जा रहे हैं। भीलवाड़ा को डार्क जोन घोषित करने से अन्य उद्योग भी निवेश करने से कतरा रहे हैं।


औद्योगिक विकास में जमीन एवं पानी मुख्य बाधा है। वर्ष 2006 से चेम्बर इस ओर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहा है। पिछले दस वर्षों में रीको एक भी नया क्षेत्र विकसित नहीं कर पाया है। डार्क जोन के कारण केन्द्रीय भूजल विभाग नए उद्योगों के लिए स्वीकृति नहीं दे रहा है। चेम्बर के प्रयासों से घोसुण्डा बांध की ऊंचाई बढ़ाने के बाद एकत्र होने वाला अतिरिक्त पानी चित्तौडग़ढ़ एवं भीलवाड़ा के उद्योगों को देने की स्वीकृति वर्ष 2008-09 में हुई थी, लेकिन यह योजना ठण्डे बस्ते में चली गई है।
एस.पी. नाथानी, महासचिव, मेवाड़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स भीलवाड़ा

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned