राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में हो रही जनता के पैसे की बर्बादी!

राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में हो रही जनता के पैसे की बर्बादी!

santosh trivedi | Publish: May, 18 2018 09:37:37 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

सवाई मानसिंह अस्पताल में इन दिनों निशक्त मरीजों की सुविधा के नाम पर किए जा रहे कार्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

जयपुर। सवाई मानसिंह अस्पताल में इन दिनों निशक्त मरीजों की सुविधा के नाम पर किए जा रहे कार्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां करीब दस करोड़ की लागत से पुरानी टाइलों को हटाकर नया ग्रीन स्टोन लगाया जा रहा है। तर्क यह है कि पहले लगी टाइलें डिसेबल फ्रेंडली नहीं थी।

 

पूरे मामले में सामने आया कि केन्द्र सरकार के हैल्पेज इंडिया प्रोजेक्ट के तहत यह टाइलें लगाई जा रही है। इसके लिए केन्द्र की टीम ने यहां का दौरा किया था। इस प्रोजेक्ट के तहत वार्डों में नए टॉयलेट, आउटडोर और रैलिंग का काम किया जाएगा।

 

बार बार बदल रहे, अब नया तर्क
अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार यहां पहले कोटा स्टोन लगा हुआ था। इसके बाद यहां टाइलें लगा दी गई। अब यहां ग्रीन स्टोन लगाया जा रहा है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि पहले से लगी टाइलों पर डिसेबल मरीजों के गिरने का डर रहता है।

 

बड़ा सवाल यह है कि जब पहले से लगी टाइलों पर डिसेबल मरीजों के गिरने का डर रहता है तो वे पहले लगाई ही क्यों गई, उन्हें पास किसने किया, उन पर क्या कार्यवाही हुई और उस टाइल पर कितने डिसेबल के साथ दुर्घटना हुई। इनका जवाब प्रशासन के पास नहीं है। प्रशासन का एक तर्क यह भी है कि केन्द्र से जो पैसा जिस मद में मिला है, उसे उसी मद में खर्च किया जा सकता है, दूसरी मद में नहीं।

 

मरीजों के लिए हर जगह कतार
हैरत की बात यह है कि इस पूरे काम पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। जबकि एसएमएस अस्पताल में इस तरह का इतना बजट मरीजों से जुड़ी अन्य सुविधाओं में काम लिया जाता तो उसका बेहतर उपयोग हो सकता था। इस समय एसएमएस में इस हर तरह के उपचार व जांचों में लंबी प्रतीक्षा सूची है।

 

हर काम का अलग बजट होता है। मरीजों की सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। डिसेबल मरीजों की सुविधा के लिए यह काम किया जा रहा है। केन्द्र से पैसा इसी मद में आया है। इससे डिसेबल मरीजों को काफी सहूलियत होगी।
-डॉ.डी.एस.मीणा, अधीक्षक, सवाई मानसिंह अस्पताल

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