200 वर्गमीटर के मकानों पर वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर अनिवार्य करने की तैयारी

गिरते भूजन को लेकर सरकार की चिंता बढ़ा दी है। भूजल संरक्षण (ground water conservation) को लेकर जलदाय व भू-जल मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला (Minister Dr. B.D. Kalla) ने गुरुवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें प्रदेश में जल संरक्षण के उपायों व भावी कार्ययोजना पर मंथन किया गया। बैठक में 200 वर्गमीटर के भूखंडों पर बनने वाले मकानों पर वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर जरूरत जताई गई।

By: Girraj Sharma

Published: 17 Jun 2021, 08:32 PM IST

200 वर्गमीटर के मकानों पर वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर अनिवार्य करने की तैयारी
— जल संरक्षण के लिए सरकार को याद आए बावड़ी, कुएं और तालाब
— जलदाय व भू-जल मंत्री की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक

जयपुर। गिरते भूजन को लेकर सरकार की चिंता बढ़ा दी है। भूजल संरक्षण (ground water conservation) को लेकर जलदाय व भू-जल मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला (Minister Dr. B.D. Kalla) ने गुरुवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें प्रदेश में जल संरक्षण के उपायों व भावी कार्ययोजना पर मंथन किया गया। बैठक में 200 वर्गमीटर के भूखंडों पर बनने वाले मकानों पर वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर जरूरत जताई गई। इसके लिए नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीना ने जल संरक्षण की दृष्टि से प्रदेश में बिल्डिंग बॉयलाज में बदलाव के लिए विभाग के स्तर पर कार्रवाई करने की बात कही।

बैठक में प्रदेश में जल संरक्षण के लिए विभिन्न विभागों की ओर से किए जा रहे उपायों और समय की आवश्यकता के अनुरूप आने वाले दिनों में तरीकों और प्रावधानों में आवश्यक बदलाव के मुद्दे पर चर्चा की गई। बैठक में डॉ. कल्ला ने कहा कि प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बावड़ी, कुएं और तालाब जैसे परम्परागत जल स्रोतों के संरक्षण के लिए नगरीय विकास तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के स्तर पर व्यापक कार्ययोजना बनाकर सतत रूप से काम करने की जरूरत है। उन्होंने तालाबों की आगोर को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चलाने, पानी की रिसाईक्लिंग, क्रॉपिंग पैटर्न में बदलाव और बूंद-बूंद सिंचाई को बढ़ावा देने के साथ ही लोगों को घरों में पानी की बचत और एक-एक बूंद का सदुपयोग करने के लिए जिम्मेदार बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

बिल्डिंग बायलॉज में बदलाव पर चर्चा
जलदाय एवं भू-जल मंत्री ने प्रदेश में बिल्डिंग बायलॉज के तहत 300 मीटर या अधिक के भूखण्डों पर बनने वाले मकानों में आवश्यक रूप से वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाने के मौजूदा प्रावधानों की समीक्षा कर इस सीमा को घटाने के बारे में अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्रों में भी वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाने के लिए भूखण्ड के साइज के प्रावधानों में संशोधन तथा पानी को रिसाइकिल करने के लिए अधिक ट्रीटमेंट प्लान स्थापित करने के निर्देश दिए। डॉ. कल्ला ने कहा कि शहरों एवं गांवों में 200 वर्गमीटर पर बनने वाले मकानों की छतों का पानी घर में संरक्षित किया जाए।

साझा प्रयासों की आवश्यकता
जलदाय एवं भू-जल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधांश पंत ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण के लिए सभी क्षेत्रों में कई स्तरों पर साझा प्रयासों की आवश्यकता है। इसके लिए सभी विभागों को अपने-अपने स्तर पर और सामूहिक रूप से भी जनजागृति के लिए कार्य करना होगा। उन्होंने बैठक में प्रदेश में सभी सरकारी भवनों में बने रूफ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर को बरसात से पहले दुरूस्त करने के निर्देश दिए।

Girraj Sharma Desk
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