ये क्या, खाकी के रौब में अब रैन बसेरा में भी जमा लिया डेरा

कस्बे में गरीब, असहाय व मुसाफिरों के लिए राज्य सरकार की ओर से खोले गए रैन बसेरे में जरूरतमंदों की बजाय पुलिस के जवान आराम फरमा रहे हैं।

कस्बे में गरीब, असहाय व मुसाफिरों के लिए राज्य सरकार की ओर से खोले गए रैन बसेरे में जरूरतमंदों की बजाय पुलिस के जवान आराम फरमा रहे हैं।

कस्बे में पिछले दिनों गरीब असहाय, मुसाफिरों के लिए राज्य सरकार की ओर से नगर पालिका किशनगढ़बास की ओर से पुराने ग्राम पंचायत भवन में रैन बसैरा खोला गया था। रैन बसेरे का न्यायायिक अधिकारी की ओर से  औचक निरीक्षण भी किया गया था।

निरीक्षण के दौरान अपर जिला एवं सैशन न्यायाधीश मीनाक्षी शर्मा ने रैन बसैरे के प्रचार -प्रसार के लिए नगरपालिका को उचित प्रचार -प्रसार के लिए आदेशित किया था।

न्यायायिक अधिकारी की ओर से आदेशित करने के बाद भी नगरपालिका ने कोई विशेष प्रचार-प्रसार नहीं कराया गया। जिसके चलते आज तक कोई भी जरूरतमन्द रैन बसैरे मे रात गुजारने के लिए नहीं आया।

किशनगढ़बास रैन बसैरे का आलम यह है कि पुलिसकर्मियों ने रैन बसेरे को अपना स्थाई आवास बना लिया है।

इतना ही नहीं पुलिसकर्मियों ने अपने वाहन भी रैन बसेरे में ही खड़े कर दिए हैं। पुलिसकर्मियों ने  रैन बसेरे मे अपनी स्थाई चारपाई, दीवारों पर कपड़े, गश्त के दौरान उपयोग मे लिए जाने वाले डण्डे, लाठी आदि रखे हुए हैं।

ऐसे में रैन बसरे में  गरीब असहाय, मुसाफिर जाने की हिमाकत नहीं कर पाता। इधर, किशनगढ़बास नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी अरूण शर्मा का कहना है कि नगरपालिका की ओर से पुलिसकर्मिर्यों को दो-तीन बार रैन बसेरे से निकाल दिया गया था, लेकिन पुलिसकर्मी चौकीदारों को डरा-धमकाकर रैन बसेरे पर जबरदस्ती कब्जा कर रह रहे हैं।

पुलिस विभाग की ओर से  इसकी कोई अनुमति नहीं ली गई है। मैं स्वंय कई बार रात्रि के समय रैन बसैरे पर निरीक्षण करने गया था, जिस पर चौकीदारों ने बताया कि पुलिसकर्मी उन्हें डरा धमकाकर रैन बसैरे में स्थाईरूप से घुस गए हैं। 
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