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जयपुर

ऐसी बैठक का क्या फायदा…अधिकारी बिना तैयारी पहुंचे, सभी विधायक भी नहीं आए

राजधानी में लैंड फॉर लैंड का प्रकरण की जांच पेंडिंग हैं। जेडीए में जमीन आवंटन में मनमानी हुई है। अब अ​धिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। मंत्री खुद रिपोर्ट मांग चुके हैं, लेकिन अब तक पूरी रिपोर्ट उनको नहीं मिल पाई है।

जयपुरJul 10, 2024 / 12:33 pm

Ashwani Kumar

जयपुर. नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा मंगलवार को जेडीए पहुंचे। दोपहर 2.30 बजे बैठक शुरू हुई और करीब शाम चार बजे तक चली। उम्मीद की जा रही थी कि पिछली सरकार में लैंड फॉर लैंड में हुए भ्रष्टाचार को लेकर बैठक में सख्त फैसले लिए जाएंगे। लेकिन, अधिकारी बिना तैयारी के साथ पहुंचे। उसी का परिणाम रहा कि एजेंडे में शामिल प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो पाई। मंत्री ने 27 जुलाई तक का समय देकर बैठक खत्म कर दी। जबकि, तीन जुलाई को मंत्री कार्यालय से जेडीए को सूचना प्रस्ताव के साथ भेजी गई थी। पांच के बाद आठ जुलाई बैठक की तारीख तय हुई, लेकिन मंत्री के व्यस्त होने की वजह से बैठक मंगलवार को हुई। इसके बाद भी जेडीए अधिकारी प्रस्तावों के अनुरूप तैयारी नहीं कर पाए।
जयपुर शहर से सांसद मंजू शर्मा के अलावा उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, विधायक कालीचरण सराफ और गोपाल शर्मा ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं और समाधान बताए।
बैठक की तीन इनसाइड स्टोरी
-जोन एक की उपायुक्त रेणु सैनी से मंत्री ने पूछा कि यूडीएच के शासन सचिव से 11 जून को पत्र आया था, उसका क्या हुआ। अब तक निस्तारण नहीं किया गया क्यों? कोई टाइम लाइन है। इस पर उपायुक्त ने कहा कि एक सप्ताह में इसका निस्तारण कर देंगे।

-मंत्री ने जोन दो के उपायुक्त से कामकाज की समीक्षा करने के बाद कहा कि आप तो जमीन आवंटन की फाइल गुमा देते हो। विद्याधर नगर से लैंड फॉर लैंड का एक प्रकरण मेरे पास आया है। डीसी ने कहा कि अर्चना शर्मा और आशीष शर्मा की फाइल गुम हो गई है। तलाश पत्र जारी किया है, लेकिन नहीं मिली। प्राथमिकी भी दर्ज करवाई है। मंत्री बोले, ऐसी फाइलें क्यों गायब होती हैं, जिसमें आरक्षित कम और बाजार मूल्य ज्यादा हो।
-विधि शाखा में कोर्ट केस प्रकरण में लचर रवैया देख मंत्री नाराज हुए। उन्होंने कहा कि 10 हजार से अधिक प्रकरण लम्बित हैं। तीन हजार से अधिक केस सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में ही लम्बित हैं। मामा-भांजा आमने-सामने केस लड़ते हैं। प्रभावी पैरवी करवाएं ताकि फैसला जेडीए के पक्ष में जाए।
हम नासूर का इलाज करेंगे। लैंड फॉर लैंड की रिपोर्ट व्यक्तिगत स्तर पर मुझे मिल गई है। जो फाइलें गायब हुई हैं, उनका तलाश पत्र जारी किया जाएगा। नहीं मिलने पर प्राथमिकी दर्ज करवाई जाएगी। कितनी पत्रावली गायब हुई हैं। इसकी रिपोर्ट भी मांगी है। कितनी भूमि आवंटित हुई है, इसका आंकड़ा भी मांगा है। जोन को लैंड बैंक बनाने के निर्देश दिए हैं। अतिक्रमण हटाने के बाद कॉलोनियां सृजित कर जेडीए राजस्व कमाएगा। जो पैसा आएगा वो जयपुर के विकास में खर्च होगा।
-झाबर सिंह खर्रा, नगरीय विकास मंत्री
खेल मैदान और अस्पताल के लिए मांगी जमीन
उद्योग मंत्री ने कहा कि भूखंडों के पट्टे जारी नहीं हो रहे। कॉलोनियों का नियमन भी रुका है। सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम और सीवर व्यवस्थित तरीके से होनी चाहिए। जेडीए, निगम और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) मिलकर काम करेंगे तो समस्याओं का हल निकलेगा। उन्होंने हाथोज में 26 बीघा भूमि पर खेल स्टेडियम बनाने और झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में सैटेलाइट अस्पताल के लिए 10 एकड़ भूमि चिन्हित कराने की मांग की।
प्रवर्तन शाखा की कार्रवाई पर उठाए सवाल
-बैठक में मंत्री राठौड़ ने कहा कि घर बनाने के जो कानून हैं, वो सभी पर लागू हों। अधिकारी ध्यान दें, किसी कमजोर को परेशान न करें। मजबूत छूटे नहीं।
-विधायक गोपाल शर्मा ने बैठक में कहा कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करवाए जा रहे हैं। सर्वे में जेडीए का नाम नहीं आए तो बताना।
-विधायक कालीचरण सराफ ने ई-रिक्शा के रूट तय नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की।

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