जब एक हाथी को सरेआम फांसी पर लटकाया गया!

आज से तकरीबन सौ बरस पहले एक हाथी को सजा के तौर पर भीड़ तंत्र ने सरेआम फांसी पर लटका दिया था।

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Published: 16 Jan 2015, 11:56 AM IST

जयपुर। आप यह पढ़ेंगे तो चौंक ही उठेंगे कि क्या ऎसा भी कहीं हो सकता है क्या?

इस के पीछे की कहानी सुनेंगे तो आपका भी दिल दहल उठेगा। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक आज से तकरीबन सौ साल पहले एक हाथी को ही फांसी पर चढ़ा दिया गया था। उसका जुर्म और इतिहास की इस क्रूर घटना की हकीकत जानने के लिए पढिए :-

1916 में घटी इस घटना के मुताबिक एक हथिनी मैरी ने गुस्से में आकर अपने ही महावत को कुचल डाला था। कारण उसने उसे बार बार भालेनुमा छड़ चुभाई थी। असल में हथिनी को सड़क पर पड़ा एक तरबूज दिख गया और वह उसे खाने के लिए कुछ देर के लिए रूक गई थी। लेकिन जल्दी में होने के कारण महावत ने उस को बार बार अपने अंकुश से आगे बढ़ने को मजबूर किया।

मैरी नाम की एक हथिनी एक सर्कस का हिस्सा थी। सितंबर 1916 में, यह सर्कस किंग्सपोर्ट नाम के एक छोटे शहर पहुंचा। प्रचार के लिए शहर की मुख्य सड़क से सर्कस की परेड निकली थी।

हाथी अपने गुस्से के लिए जाने जाते हैं। महावत एल्ड्रिज की हरकत मैरी को पसंद नहीं आई । उसने उसे सूंड से उठाकर नीचे पटक दिया और उसका सिर कुचल दिया। एल्ड्रिज की मौत हो गई।

उस समय लोकतंत्र नहीं भीड़ ही सारे फैसले लिया करती थी। गुस्साई भीड़ ने मैरी को मार डालने की मांग की। सर्कस के मुखिया चार्ली स्पार्क ने बिना विरोध किए यह मांग मान ली। लेकिन उन्होंने तय किया कि वह मैरी के अंत को लोगों के लिए दर्शनीय बनाएंगे।

मैरी को फांसी देना तय किया गया। दूसरे शहर एरविन से 100 टन की क्रेन मंगवाई गई। इसका इस्तेमाल आम दिनों में रेलवे कैरेज उठाने के लिए होता था। स्पार्क ने मैरी की फांसी का इंतजाम खुले में करवाया ताकि लोग देखने आ सकें।

मैरी को एक रेल से बांधा गया। उसकी मोटी गर्दन के इर्द-गिर्द चेन बांधी गई। जैसे ही क्रेन ने उसे उठाया, आसमान एक तीखी और क्रूर आवाज से भर गया। वह दर्द में थी। उसने एक भयानक चिंहाड़ मारी। उसे पांच फीट ही उठाया जा सका था कि चेन टूट गई थी। ऊंचाई से गिरने से उसके कूल्हे की हडि्डयां चटक गई। मैरी के पांव अब भी उस जंजीर से बंधे थे, जो रेल से जुड़ी थी।

लेकिन यह दर्दनाक तमाशा अभी खत्म नहीं हुआ था। एक मजबूत चेन मंगवाई गई और मैरी की गर्दन पर बेरहमी से बांध दी गई। उसे फिर उठाया गया और आधे घंटे तक लटकाकर रखा गया. तब तक, जब तक उसकी मौत में कोई शक-सुबहा न रह जाए। मैरी नहीं रही। मैरी, जिसे वहां के लोग `मर्डरस मैरी` यानी हत्यारिन मैरी नाम से जानते थे।

बताया जाता है कि आज भी एरविन शहर मैरी की फांसी की वजह से जाना जाता है। मैरी की तलाश में एक बार एक बड़ी कब्र भी खोदी गई थी, पर उसका कोई सुराग न मिला।

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