नाखूनों पर बार-बार धब्बे बनना किसी बीमारी का संकेत

आमतौर पर महिलाओं में नाखूनों संबंधी समस्या ज्यादा होती है। ज्यादा देर तक पानी या साबून में काम करने से नाखूनों पर धब्बे या दाद बनने लगते हैं।

By: Archana Kumawat

Published: 19 Apr 2021, 10:08 PM IST

कुछ लोगों के नाखूनों पर अचानक से सफेद धब्बे या लकीर बनने लगती है, जो नाखून बढऩे के साथ धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। लेकिन बार-बार नाखूनों पर धब्बे या लकीर बन रही है तो इसे नजरअंदाज न करें। यह शरीर में किसी पोषक तत्त्व की कमी या फिर बीमारी की वजह से हो सकती है। कुछ बीमारियों की वजह से नाखूनों में गड्ढे या दाद की समस्या भी होने लगती है।
कैल्शियम की कमी का भी एक संकेत
नाखूनों पर धब्बे बनना शरीर में विटामिन्स, आयरन, कैल्शियम आदि की कमी का संकेत हो सकता है। डायबिटीज, थायरॉइड, फंगल इंफेक्शन, सोरायसिस जैसी बीमारियों में भी नाखूनों पर धब्बे दिखने लगते हैं। इसके अलावा लिवर रोग, किडनी रोग या हृदय समस्या के कारण भी नाखूनों का रंग बदल सकता है। बच्चों में भी विटामिंस या किसी अन्य पोषक तत्त्व की कमी की वजह से यह समस्या देखी जा सकती है। आमतौर पर महिलाओं में नाखूनों संबंधी समस्या ज्यादा होती है। ज्यादा देर तक पानी या साबून में काम करने से नाखूनों पर धब्बे या दाद बनने लगते हैं। यदि लगातार नाखूनों पर धब्बे बन रहे हैं तो डॉक्टर का परामर्श लेकर इलाज लें, समस्या दूर हो जाएगी।

त्वचा रोग है नाखूनों पर गड्ढे होना
नाखूनों का हरा होना - ज्यादा देर तक पानी या साबुन में काम करने से नाखूनों के किनारों पर हरे रंग के धब्बे बनने लगते हैं। यह एक तरह का फंगल इंफेक्शन है।
नाखूनों में दाद होना - नाखूनों का रंग बदलना भी किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे में नाखून कमजोर होकर टूटने लगते हैं और उनके नीचे गंदगी जमा होने लगती है। यदि शरीर में कहीं दाद है तो इससे नाखूनों पर भी दाद की समस्या होने लगती है।
नाखूनों पर छोटे गड्ढे होना : त्वचा संबंधी बीमारी से नाखूनों में छेद या गड्ढे बनने लगते हैं, जिसे ‘२० नेल डाइस्ट्रोफी’ कहा जाता है। इसमें सभी नाखून टूटने लगते हैं। यदि समय पर इलाज नहीं लिया जाए तो समस्या गंभीर हो सकती है।

नाखूनों की नहीं, त्वचा मसाज से मिलेगा लाभ
यदि नाखून की त्वचा खराब हो रही है तो ज्यादा देर तक साबुन और पानी में काम न करें। जब भी पानी से संबंधित कोई काम करें तो हाथों में दस्ताने पहन लें। नाखूनों पर नेल पेंट या अन्य किसी तरह के कैमिकल्स का प्रयोग कम से कम करें। बार-बार मेनिक्योर और पेडिक्योर करवाने से भी बचें। इस दौरान नाखूनों के आसपास की त्वचा को नुकसान होता है। इससे कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस की आशंका बढ़ जाती है। नाखूनों की मसाज करने की बजाय आसपास की त्वचा की मसाज से लाभ मिलेगा। मॉइश्चराइजर का प्रयोग करें। साथ ही आहार में पौष्टिक चीजें जैसे मौसमी फल, सब्जियां और डेयरी उत्पाद अधिक लें।

डॉ.पुनीत अग्रवाल
सहायक आचार्य (त्वचा रोग विभाग), एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर

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