शराब की दुकान खोलना किसकी जरुरत ?, देखिए कार्टूनिस्ट लोकेन्द्र के कार्टून के जरिए

शराब की दुकान खोलना किसकी जरुरत ?, देखिए कार्टूनिस्ट लोकेन्द्र के कार्टून के जरिए

By: lokendra singh

Published: 05 May 2020, 11:18 PM IST

राज्यों की इॅकोनामी क्या वाकई में शराब पर निर्भर करती है इसका जवाब सोमवार को देश में खुली शराब की दुकानों पर हुई धुंआधार को देखते हुए खुद ब खुद ही मिल गया। कई राज्यों की सरकार केंद्र सरकार से लॉक डाउन के दौरान शराब की दुकानें खोलने की मांग कर रही थी तो आखिर सरकार ने चार मई से इन्हें खोल दिया और पहले ही दिन शराब बिक्री के नए रिकॉर्ड बन गए। हालात ये रहे कि अतिरिक्त जाब्ता भी कम पड गया नतीजा कई राज्यों में तो समय से पहले ही दुकानों को भी बंद कर दिया गया। लॉकडाउन 3 में शराब कारोबार को खोल दिया गया है. इसको लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा है कि राज्यों की अर्थव्यवस्था शराब के भरोसे चल रही है। देखते हैं इसमें कितनी सच्चाई है, राज्यों की सरकारें शराब से कितना कमा रहीं हैं। असल में राज्यों की कमाई के मुख्य स्रोत हैं- राज्य जीएसटी, भू-राजस्व, पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट या सेल्स टैक्स, शराब पर लगने वाला एक्साइज और गाड़ियों आदि पर लगने वाले कई अन्य टैक्स. शराब पर लगने वाला एक्साइज टैक्स यानी आबकारी शुल्क राज्यों के राजस्व में एक बड़ा योगदान करता है। शराब और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी से बाहर रखा गया है। इसलिए राज्य इन पर भारी टैक्स लगाकर अपना राजस्व बढ़ाते हैं। हाल में राजस्थान सरकार ने शराब पर एक्साइज टैक्स 10 फीसदी बढ़ा दिया. राज्य में अब देश में निर्मित विदेशी शराब (IMFL) पर टैक्स 35 से 45 फीसदी तक हो गया है.

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