जयपुर मेट्रो स्टेशन की छत पर 'चौपड़' बनाने से क्यों डर गए इंजीनियर, लिख डाली चिट्ठी

— जेएमआरसी को पत्र लिखकर बताया भूमिगत मेट्रो स्टेशन की छत को खतरा

जयपुर। वक्त का पहिया घूमता है और हालात बदल जाते हैं...इसका उदाहरण देखने को मिला है जयपुर में। मामला जयपुर मेट्रो के छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशनों से जुड़ा है। वर्ष 2014—2015 में जब चारदीवारी इलाके में जयपुर मेट्रो फेज—1 बी के लिए सुरंग खोदने का काम शुरू हुआ तो इसे गुलाबी नगर के हेरिटेज के लिए खतरा माना गया। लेकिन अब रियासतकालीन छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ का पुनर्निर्माण जयपुर मेट्रो के लिए ही खतरा बन गया है।

चौपड़ के स्ट्रक्चर के भार से छत का खतरा
जयपुर मेट्रो के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक जयपुर मेट्रो के छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ भूमिगत मेट्रो स्टेशनों पर यहां से हटाई गई हेरिटेज चौपड़ का पुनर्निर्माण करवाया जाना है। इसके लिए जयपुर मेट्रो की कंसल्टेंट फर्म आभा नारायण लाम्बाह ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशनों पर प्राचीन चौपड़ का पुनर्निर्माण होना है। जयपुर मेट्रो ने इसका जिम्मा आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एडमा) को सौंपा है। मेट्रो सूत्रों ने बताया कि जब एडमा के इंजीनियर्स ने यहां पर काम शुरू करने के लिए लोकेशन को देखा तो उन्होंने चौपड़ के स्ट्रक्चर को ज्यादा भारी बताते हुए इससे मेट्रो स्टेशन की छत को खतरा बताया। इंजीनियर्स ने जयपुर मेट्रो रेल प्रबंधन को शुरू में मौखिक तौर पर खतरे की जानकारी दी। लेकिन जेएमआरसी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया तो पत्र लिखकर चौपड़ के प्रस्तावित स्ट्रक्चर से मेट्रो स्टेशन की छत को खतरे के बारे में जानकारी दी है।

रोजगारेश्वर मंदिर से ज्यादा भारी होगी चौपड़
प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर्स का कहना है कि छोटी चौपड़ अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन की छत पर बन रहे रोजगारेश्वर मंदिर को यदि उसी स्वरूप में बनाया जाता तो इसका वजन 150 टन से ज्यादा होता। इतना वजन मेट्रो की छत के लिए खतरा था, इसे देखते हुए मंदिर का वजन 100 टन से कम करने के लिए स्ट्रक्चर में बदलाव किया गया, ताकि मेट्रो स्टेशन की छत मंदिर का वजन झेल पाए। यही नहीं रोजगारेश्वर मंदिर का वजन उठाने के लिए छत के नीचे पिलर बनाया गया है। यह पिलर छोटी चौपड़ मेट्रो स्टेशन के शुरूआती डिजाइन में शामिल नहीं था। लेकिन बाद इसके लिए डिजाइन में बदलाव किया गया। अभियंताओं का कहना है कि प्राचीन चौपड़ के पुनर्निर्माण का प्रस्तावित स्ट्रक्चर है, उसका वजन रोजगारेश्वर मंदिर के 100 टन से कहीं ज्यादा है। चौपड़ बनाने में भारी भरकम पत्थरों का इस्तेमाल तो होगा ही, यहां फव्वारा चलाने के लिए पानी भी भरा जाएगा। इससे चौपड़ का फव्वारे वाली जगह का वजन छत की भार सहन करने की क्षमता से ज्यादा हो जाएगा। इससे छत को नुकसान होने और पानी रिसाव का खतरा बताया जा रहा है।

छोटी चौपड़ मेट्रो स्टेशन को ज्यादा खतरा
जानकारी के मुताबिक छोटी चौपड़ अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन की छत पर चौपड़ बनाने से खतरा ज्यादा है, क्योंकि छोटी चौपड़ स्टेशन की छत पर एक तो रोजगारेश्वर महादेव मंदिर बना हुआ है। इसके पीछे की साइड में चौपड़ बननी है। ऐसी स्थिति में दोनों स्ट्रक्चर का भार जयपुर मेट्रो की छत का ही सहन करना है। चौपड़ के पुनर्निर्माण में लगे इंजीनियर्स का कहना है कि चौपड़ बनाने के खतरे के बारे में जेएमआरसी को बता दिया गया है।

छोटी—बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशन का आकार

स्टेशन की लम्बाई — 250 मीटर
चौड़ाई — 24 मीटर
उंचाई — 18 मीटर करीबन 70 फीट
छत की मोटाई — एक मीटर

Pawan kumar Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned