आखिर क्यों बढ़ रहे है डीजल के दाम

अंतरराष्ट्रीय बाजार ( international market ) में कच्चे तेल के दाम ( crude oil ) में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट के बावजूद आखिर क्यों बढ़ रहे है डीजल ( diesal ) के दाम। बता दें कि तेल विपणन कंपनियों ( oil marketing companies ) ने बीते महीने जून में 22 बार डीजल के दाम में वृद्धि की और पेट्रोल की कीमत में 21 बार बढ़ोतरी की गई।

By: Narendra Kumar Solanki

Published: 07 Jul 2020, 01:59 PM IST

जयपुर। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट के बावजूद आखिर क्यों बढ़ रहे है डीजल के दाम। बता दें कि तेल विपणन कंपनियों ने बीते महीने जून में 22 बार डीजल के दाम में वृद्धि की और पेट्रोल की कीमत में 21 बार बढ़ोतरी की गई। कोरोना महामारी के गहराते प्रकोप के चलते कच्चे तेल में मंगलवार को फिर दो दिनों की तेजी पर ब्रेक लग गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है, लेकिन देश में डीजल की महंगाई से राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। तेल कंपनियों ने सात दिनों के विराम के बाद मंगलवार को फिर डीजल के दाम में बढ़ोतरी कर दी।
अब तक अब तक डीजल 11.22 रुपए लीटर महंगा हो गया है। इससे पहले जून में डीजल के दाम में 10.99 रुपए प्रति लीटर, जबकि पेट्रोल की कीमत में 9.81 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

ब्रेंट क्रूड में नरमी
अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के सितंबर वायदा अनुबंध में मंगलवार को पिछले सत्र से 1.14 फीसदी की कमजोरी के साथ 42.61 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था, जबकि इससे पहले ब्रेंट का भाव 42.50 डॉलर प्रति बैरल तक टूटा। दो सप्ताह पहले 23 जून को ब्रेंट का भाव 42.63 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।

लगातार बढ़े डीजल के दाम
ट्रक और छोटे माल ढुलाई वाहनों के मालिकों का कहना है कि डीजल की कीमतों में रोज हो रही बढ़ोतरी के कारण उन्हें परिचालन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 1८ दिनों में ईंधन की कीमतों में हुई भारी वृद्धि से माल ढुलाई की लागत भी निकालना मुश्किल हो गया है। दरअसल, ट्रक परिचालन की लागत प्रति किलोमीटर 65 से 70 फीसदी बढ़ गई है। दूसरी तरफ, मांग में कमी के कारण बड़ी संख्या में ट्रक बिना किसी काम के खड़े हैं।

किसानों की मुश्किलें
अभी धान रोपाई का मौसम है बारिश नहीं होने पर किसान डीजल से पंपिंग सेट चलाते है और बुआई करते हैं। डीजल महंगा होने से किसानों की भी मुश्किलें बढ़ी हैं। मालवाड़ा महंगा होने से सब चीज महंगी हो जाएगा। इससे महंगाई को काबू में रख पाना मुश्किल होगा। माल ढुलाई बढऩे से सामान महंगा होगा।

महंगी हो सकती है कई वस्तुएं
माल ढुलाई बढऩे से फल और सब्जी जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों की कीमत में उछाल आना तय है। वहीं, दैनिक उपयोग के सामान की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण माल ढुलाई में इजाफे का असर एकसाथ पूरे देश पर दिखाई देगा। इससे एफएमसीजी कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा और वे कीमतों में बढ़ोतरी को मजबूर होंगी। फल और सब्जियों की कीमतों में ढुलाई का हिस्सा दूसरी वस्तुओं के मुकाबले ज्यादा होता है। दरअसल, अलग-अलग किसानों के पास कम मात्रा में फल-सब्जी होती हैं। उन्हें अपने उत्पाद मंडी तक पहुंचाने में बड़ी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ता है।

पेट्रोल कारों की बढ़ेगी मांग
पेट्रोल और डीजल के बीच का अंतर घटकर मात्र सात रुपए प्रति लीटर रह जाने से ऑटोमोबाइल कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती है। बीएस-६ फेरे में चल रही इन ऑटो कंपनियों को अब यह तैयारी करनी होगी कि वह डीजल वाहनों की बिक्री के लिए नई रणनीति तैयार करें, क्योंकि डीजल वाहन पेट्रोल वाहनों के मुकाबले करीब डेढ़ से दो लाख रुपए तक महंगे आते है। पिछले कुछ सालों में डीजल और पेट्रोल के दामों में काफी अंतर था, जिससे वाहन कंपनियों को दोनों सेगमेंट में वाहन बेचने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी, लेकिन अब अंतर घटकर मात्र सात रुपए रह गया है। देश में जिस तरह से पेट्रोल और डीजल के बीच का अंतर कम हो रहा है, जिससे लगता है कि एक दिन डीजल देश में पेट्रोल से भी महंगा मिलेगा।

Narendra Kumar Solanki Desk
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