जयपुर मेट्रो क्यों नहीं चलेगी बिना पायलट, ​कमिश्नर रेलवे सेफ्टी ने क्यों नहीं दी आॅटोमैटिक ट्रेन आॅपरेशन को क्लीयरेंस, जानिए

जयपुर मेट्रो क्यों नहीं चलेगी बिना पायलट, ​कमिश्नर रेलवे सेफ्टी ने क्यों नहीं दी आॅटोमैटिक ट्रेन आॅपरेशन को क्लीयरेंस, जानिए

Pawan kumar | Publish: Sep, 16 2018 09:01:40 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

— कमिश्नर रेलवे सेफ्टी ने देखी जयपुर मेट्रो की तकनीक, मौजूदा तकनीक में मिली कई खामियां

 

जयपुर। जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की मेट्रो ट्रेन को आॅटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन से आॅटोमैटिक ट्रेन आॅपरेशन में अपग्रेड करने की कोशिशों को झटका लगा है। जयपुर मेट्रो की तकनीक को जांचने जयपुर आए कमिश्नर रेलवे सेफ्टी सुशील चन्द्रा के निरीक्षण के दौरान जयपुर मेट्रो में कई तकनीकी खामियां सामने आई। मौजूदा तकनीकी कमियों के चलते जयपुर मेट्रो को आॅटोमैटिक ट्रेन आॅपरेशन मोड में अपग्रेड करना संभव नहीं है।
कमिश्नर रेलवे सेफ्टी ने 14 सितम्बर की रात को मानसरोवर से चांदपोल के बीच जयपुर मेट्रो के मौजूदा पायलट मोड में ट्रेन के संचालन की तकनीक देखी। इसके बाद 15 सितम्बर को आॅटोमैटिक ट्रेन आॅपरेशन के लिए जयपुर मेट्रो की तकनीक को जांचा। इसमें ये पाया गया कि जयपुर मेट्रो का मौजूदा तकनीक और तकनीकी ढांचा आॅटोमैटिक ट्रेन आॅपरेशन के लायक नहीं है, इसमें बहुत सुधार की जरूरत है। कमिश्नर रेलवे सेफ्टी ने फिलहाल जयपुर मेट्रो को आॅटोमैटिक मोड पर चलाने की अनुमति नहीं दी है। आॅटोमैटिक मोड पर ट्रेन चलाने की मंजूरी नहीं मिलने से मेट्रो अधिकारियों और इंजीनियर्स में मायूसी छा गई, क्योंकि जयपुर मेट्रो ने अपनी तरफ से बहुत तैयारियां की थी। जयपुर मेट्रो के अधिकारियों और इंजीनियर्स को तकनीक में जरूरी अपग्रेडेशन के प्वाइंट्स बताए। तकनीकी बदलाव के बाद कमिश्नर रेलवे सेफ्टी फिर से जयपुर मेट्रो का निरीक्षण करने आएंगे, उनका अगला दौरा कब होगा इस बारे में अभी कुछ तय नहीं है।

ये है पायलट मोड और आॅटोमैटिक मोड में फर्क
अब आपको बताते हैं कि आखिर पायलट मोड और आॅटोमैटिक मोड में फर्क क्या है। मौजूदा समय में मेट्रो का संचालन पायलट करते हैं, जब इसे आॅटोमैटिक मोड पर लेकर आएंगे, तब इसमें दो की बजाय सिर्फ एक ही पायलट होगा। वो भी ट्रेन का संचालन नहीं करेगा। बल्कि मेट्रो के गेट बंद करने का काम करेगा। आॅटोमैटिक सिस्टम में ट्रेन की स्पीड और कहां पर उसे रूकना है समेत तमाम गतिविधियां आॅटोमैटिक होगी, इसमें पायलट की कोई दखलअंदाजी नहीं होगी। मौजूदा पायलट सिस्टम में खामी ये है कि इसमें जब भी ड्राइवर तय स्पीड से ज्यादा ट्रेन को दौड़ाने की कोशिश करता है, तो उसमें आॅटोमैटिक ब्रेक लग जाते हैं। इससे ट्रेन में बैठे यात्रियों को झटके लगते हैं। साथ ही ट्रेन को दोबारा चलाने में भी देर लगती है। आॅटोमैटिक ट्रेन संचालन में ये दिक्कतें नहीं आएंगी। लेकिन इसके लिए जयपुर मेट्रो को अभी बहुत से तकनीकी सुधार करने होंगे।

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