शिक्षा विभाग की जांच में आखिर क्यों फेल हुआ शहर का यह बड़ा स्कूल

एसएमएस स्कूल में छात्राओं को मानसिक प्रताडऩा का मामला

By: Priyanka Yadav

Published: 16 May 2018, 02:15 PM IST

जयपुर . प्रबंधन के रोजमर्रा के काम में दखल के आरोपों के बीच जयपुर का सवाई मानसिंह स्कूल मंगलवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग व शिक्षा विभाग की टीम की जांच में कई बिन्दुओं पर फेल हो गया। स्कूल से एक छात्रा की कॉपी गायब मिली, तो एक छात्रा पहले १० वीं कक्षा में भेज दी और फिर ९ वीं कक्षा में ही फेल बता दिया। आयोग को अब तक विद्यार्थियों और शिक्षकों सहित विभिन्न प्रकार की करीब १० शिकायतें मिली हैं, इनमें ४ की शिकायतें गंभीर है। आयोग ने जबरन फेल की शिकायत वाले विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाएं सहित कुछ दस्तावेज भी जब्त किए हैं, उत्तरपुस्तिकाओं की केन्द्रीय व जवाहर नवोदय विद्यालय के प्रिंसिपल, सीबीएसई के विशेषज्ञों से जांच कराई जाएगी।

विद्यार्थियों को मानसिक प्रताडऩा की शिकायत की जांच के लिए मंगलवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग व शिक्षा विभाग की टीम दोपहर करीब 12 बजे स्कूल पहुंची और करीब 7 घंटे तक निरीक्षण किया। प्रबंधन समिति के सचिव विक्रमादित्य और अतिरिक्त सचिव विजित सिंह, स्कूल प्राचार्या कृष्णा भाटी, आरोपित शिक्षकों से विस्तृत पूछताछ की। आयोग ने शिकायतकर्ता विद्यार्थियों को पक्ष भी जाना, इस दौरान आयोग को कुछ और शिकायत भी सामने आई। जिन विद्यार्थियों को गलत तरीके से स्कूल ने फेल कर दिया है, आयोग उनको अगली कक्षा में हर हाल में क्रमोन्नत कराएगा।

यूं चली 7 घंटे जांच

- दोपहर 12 बजे आयोग अध्यक्ष, सदस्य, सदस्य सचिव सहित अन्य टीम स्कूल पहुंची।
- करीब 1.5 घंटे पीडि़त छात्र-छात्राओं से बातचीत की।
- स्कूल शिक्षक व प्रिंसीपल से वार्ता की गई।
- स्कूल प्रबंधन कमेटी के सचिव विक्रमादित्य, अतिरिक्त सचिव विजित सिंह समेत अन्य लोगों से घंटेभर तक बैठक की।
- टीम के 3 अधिकारियों ने स्कूल के दस्तावेज खंगाले। यह कार्यवाही 3 घंटे तक चली।

तीन माह तक आयोग की निगरानी में रहेगा स्कूल

आयोग अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ने बताया कि लगातार मिली शिकायतों के बाद आयोग ने स्कूल में निगरानी का फैसला किया है। आयोग को कुछ शिकायतें व्हाट्सएप पर भी मिली हैं। शिक्षा विभाग ने जो जांच की है, उसकी रिपोर्ट भी मांगी जाएगी। आयोग के सदस्य सचिव वी. सरवन ने बताया कि 3 माह तक स्कूल की निगरानी के लिए कमेटी बनाई गई है। सूत्रों के अनुसार कमेटी में आयोग के आरटीई प्रभारी एसपी सिंह, सदस्य सीमा जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी व बाल कल्याण समिति के सदस्य इसमें शामिल करने पर विचार चल रहा है। ओम्बुड्समेन के रूप में कमेटी शुरुआत में 3 माह तक निगरानी करेगी। इसके बावजूद सुधार नहीं हुआ तो कमेटी का समय और बढ़ाया जा सकता है। कमेटी का एक सदस्य स्कूल के कार्यों पर निर्णय करने वाली कमेटी में भी शामिल कराया जाएगा।

जांच में सामने आई ये कमियां

- स्कूल में आरटीई के तहत गरीब छात्रों को नहीं दिए जा रहे पर्याप्त संख्या में प्रवेश
- स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) की बैठकें नहीं हो रहीं।
- एसएमसी के गठन में नियमों की पालना नहीं की गई है।
- स्कूल के 30 शिक्षकों को प्रिंसीपल को बताए बिना व नोटिस दिए बिना निकाल दिया गया।
- शिक्षक-अभिभावक बैठकों (पीटीएम) में अभिभावकों को बोलने का मौका नहीं दिया जाता। पिछले दिनों हुई पीटीएम में अभिभावकों ने इसे लेकर कई शिकायतें भी की।
- बच्चों को मानसिक प्रताडना दिए जाने की बात भी सामने आई।
- तीन में से 2 काउंसलर को पक्षपातपूर्ण तरीके से निकाल दिया गया।

आयोग की फिर बैठक

आयोग की टीम मंगलवार शाम सात बजे तक निरीक्षण में लगी रही। बुधवार को आयोग उसके सामने आए सभी बिन्दुओं पर कार्रवाई के लिए बैठक करेगा। आयोग ने स्कूल से दो छात्राओं की पुन: परीक्षा की उत्तरपुस्तिका, प्रश्नपत्र व मार्र्किंग की जानकारी बुधवार सुबह ११ बजे तक तलब की है।

प्राइवेट ट्यूशन की शिकायतें उठाए सवाल

आयोग को स्कूल के परीक्षा इंचार्ज सहित कुछ शिक्षकों के ट्यूशन और कोचिंग सेंटर चलाने की शिकायत भी मिली हैं। इन शिक्षकों के बच्चों पर दवाब बनाने के बारे में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी से बात भी की गई, लेकिन कमेटी ने इसे मानने से इनकार कर दिया। इस पर आयोग की टीम ने कहा कि जो शिक्षक बड़ी कोचिंग चला रहे हैं, उन्हें ही स्कूल ने परीक्षा इंचार्ज बना रखा है। ऐसे में पेपर की गोपनीयता भी सवालों के घेरे में है। आयोग ने प्रिंसीपल के पास पिछले 3 वर्षों में आई विद्यार्थियों की शिकायतें मांगी हैं।

 

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