scriptWind will give electricity, now emphasis on wind power | वायु देगी बिजली, अब पवन ऊर्जा पर जोर | Patrika News

वायु देगी बिजली, अब पवन ऊर्जा पर जोर

धरती के लगातार बढ़ते तापमान और दुनिया पर मंडराते जलवायु संकट को देखते हुए केंद्र सरकार कुछ सख्त फैसले कर सकती है। इसके तहत बिजली कानून और राष्ट्रीय कर नीति में बदलाव करने पर विचार किया जा रहा है। बिजली वितरण कंपनियों को निर्धारित मात्रा में नवीकृत ऊर्जा स्रोतों से बिजली खरीदने के लिए बाध्य किया जा सकता है।

जयपुर

Published: May 10, 2022 02:15:02 pm

धरती के लगातार बढ़ते तापमान और दुनिया पर मंडराते जलवायु संकट को देखते हुए केंद्र सरकार कुछ सख्त फैसले कर सकती है। इसके तहत बिजली कानून और राष्ट्रीय कर नीति में बदलाव करने पर विचार किया जा रहा है। बिजली वितरण कंपनियों को निर्धारित मात्रा में नवीकृत ऊर्जा स्रोतों से बिजली खरीदने के लिए बाध्य किया जा सकता है। खासकर यह देखने के बाद कि देश में ऊर्जा की बढ़ती मांग के बावजूद नवीकरणीय ऊर्जा को जितनी तेजी से बढ़ाया जाना चाहिए था, नहीं बढ़ाया जा सका है। वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 2010 में बिजली कानून में नवीकरणीय ऊर्जा खरीद बाध्यता (आरपीओ) का प्रावधान किया था।
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हालांकि इसे कंपनियों के लिए ऑब्लिगेटरी छोड़ दिया गया था। देश के अलग-अलग हिस्सों में वितरण कंपनियों ने इसे 9 से 17 फीसदी तक ही पूरा किया। अब सरकार इसे बाध्यकारी बना कर लक्ष्य हासिल करने पर विचार कर रही है। सरकार का मानना है कि आरपीओ को बाध्यकारी बनाकर सौर, पवन और पनबिजली परियोजनाओं में निवेश को बढ़ाया जा सकेगा। यह कदम उठाने पर ऐसे समय विचार कर रही है जब बड़ी कंपनियां नवीकृत ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तारीकरण योजना बना रही हैं। इसके लिए उसे देशी-विदेशी बैंकों, पूंजी बाजार या विदेशी संस्थानों से वित्तीय मदद की जरूरत है।
वैश्विक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की वजह से अपनी उम्र पूरी कर चुके ताप बिजली घरों पर धन खर्च करने की बजाय सरकार नवीकरण ऊर्जा स्रोतों को तेजी से विकसित करना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों हुए जलवायु सम्मेलन में अपनी ऊर्जा जरूरतों की आधी ऊर्जा नवीकृत स्रोतों से हासिल करने वचनबद्धता दोहराई थी। समझा जा रहा है कि उसे पूरा करने की दिशा में कई कानूनी बदलाव किए जा सकते हैं।
दुनिया में सिर्फ 29 फीसदी नवीकृत ऊर्जा
बिजली सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करने वाला क्षेत्र है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आइईए) के अनुसार, पेरिस समझौते के तहत धरती के बढ़ते तापमान को 1.5 डिग्री तक सीमित रखने के लिए 2040 तक इस क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन शून्य करना आवश्यक है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बिजली खपत में 2030 तक प्रतिवर्ष 20 फीसदी हिस्सेदारी नवीकृत ऊर्जा की बढ़ानी होगी। नवीकृत ऊर्जा में रेकॉर्ड बढ़ोतरी के बावजूद सौर-पवन ऊर्जा का अपेक्षित उत्पादन नहीं किया जा पा रहा है। रेकॉर्ड मांग के बावजूद सिर्फ 29 फीसदी ऊर्जा ही सौर-पवन से हासिल की जा रही है।
एक चौथाई देशों में खपत का 10वां हिस्सा ग्रीन एनर्जी

- 10.3त्न हुई थी दुनिया में पहली बार सौर-पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी 2021 में। 2020 में यह 9.3त्न थी।
- 2015 के पेरिस जलवायु समझौते के बाद यह हिस्सेदारी से तुलनात्मक रूप से दोगुनी हो गई है।
- 50 देश (26त्न) अपनी ऊर्जा जरूरतों का दसवां हिस्सा सौर-पवन ऊर्जा से हासिल कर रहे हैं।
- 02 फीसदी पीछे है भारत उन 26 फीसदी देशों के मुकाबले ग्रीन एनर्जी में

कर्ज देने में भारतीय बैंक पीछे
मार्च 2020 तक वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 8% कर्ज ही दिए।
सबसे ज्यादा कर्ज पंजाब में 17% तो सबसे कम ओडिशा में 0.1% दिए गए।
सरकारी बैंकों (5.2%) की अपेक्षा निजी बैंकों ने ज्यादा (14.8%) कर्ज बांटे।
2030 तक कुल खपत का 50% नवीकृत ऊर्जा से हासिल करना। कार्बन उत्सर्जन एक अरब टन तक नीचे लाना
राजस्थान
वित्तीय वर्ष 2021-22 में राजस्थान का आरपीओ टारगेट 18% है। इसमें 8.50% सोलर और 8.90 % विंड एनर्जी और बाकी बायोमॉस है। लक्ष्य के अनुपात में 14.06 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा ही ले पाए। 2020-21 में 15.85% लक्ष्य दिया, लेकिन 12.31% नवीकरणीय ऊर्जा ले पाए।
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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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