पशुपालन को चुना व्यवसाय, कमा रही लाखों रुपए सालाना, पुरस्कार भी मिला

-सर्वश्रेष्ठ महिला डेयरी किसान पुरस्कार 2019

By: Ankit

Updated: 21 Feb 2020, 05:49 PM IST

जयपुर. देश के डेयरी उद्योग में महिलाओं के महत्व को कम नहीं आंका जा सकता। देश के अधिकांश क्षेत्रों में महिलाएं मजबूत भूमिका निभा रही हैं। जहां पहले ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएं घरेलू उपयोग के लिए गाय भैंस पालती थी, आज वहीं उन्होंने इसे व्यवसाय के रूप में चुनकर खुद को आर्थिक रूप से सशक्त किया है। अपनी मेहनत के बूते वो इतनी ऊंचाई पर पहुंचा चुकी हैं कि हर लाखों रुपए कमा रही हैं, इस कामयाबी के लिए उन्हे सम्मान भी मिल चुके हैं।

राष्ट्रीय स्तर के 48 वीं डेयरी इंडस्ट्री सम्मेलन में सम्मानित रांची जिले की बबीता देवी और तमिलनाडू की एस सुधासर्वश्रेष्ठ महिला डेयरी किसान पुरस्कार 2019 मिला। ये महिलाएं अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं। इनके साथ ही गुजरात की लक्ष्मी बेन और पंजाब की कमल प्रीत कौर भी सम्मानित हुई।

लोन लेकर दो गाय खरीदी, आज कमाती हैं पचास हजार रुपए प्रतिमाह
अगर महिलाओं में सशक्त बनने की चाह हो तो उनकी हर राह आसान हो जाती है, वो हर मुश्किलों को पार कर अपने लक्ष्य को पा ही लेती हैं। यह कहना है झारखंड के रांची जिले के गड्गांव निवासी बबीता देवी का। 27 वर्षीय बबीता को पूर्व जोन की सर्वश्रेष्ठ महिला डेयरी किसान पुरस्कार 2019 से सम्मानित किया।

बतीता ने बताया कि उन्होंने महज दो गायों से काम शुरु किया। शुरु में उनके पास गाय खरीदने के भी पैसे नहीं थे, उन्होेंने सरकार से लोन लिया और दो गाय खरीदी। आज उनके पास तेरह गाय हैं। वो करीब पचास हजार रुपए महीना कमाती हैं। बबीता का कहना है कि उनके बच्चों को उनकी तरह संघर्ष नहीं करना पड़े इसलिए वो अपने तीनों बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाती हैं।

शिक्षिका बनने की बजाय चुना पशुपालन व्यवसाय, कमा रही दो लाख रुपए प्रतिमाह

महिलाओं के लिए सिर्फ शिक्षिका की नौकरी सर्वश्रेष्ठ नहीं होती, वह एक अच्छी व्यापारी भी हो सकती है। वह कठिन से कठिन कार्य में भी सफलता पा सकती है। यह कहना है तमिलनाडू के करूर स्थित वाथागोंडनपुथुर गांव की निवासी एस सुधा का। 34 वर्षीय सुधा को दक्षिण जोन की सर्वश्रेष्ठ महिला डेयरी किसान पुरस्कार 2019 मिला है। सुधा ने एमएससी और बीएड किया, इसके बावजूद उन्होंने पशुपालन को अपनी आजीविका चुना। आज सुधा दो लाख रुपए प्रति महीने कमाती हैं।

सुधा का कहना है कि उनके घर में शुरु से ही पशुपालन का कार्य किया जाता है। उन्हें गांव से बहुत लगाव है, शादी के बाद ससुराल में उन्होंने शिक्षिका की नौकरी की बजाय, पशुपालन व्यवसाय के लिए कहा तो सभी ने उनकी बात मान ली। सुधा के पास अभी 70 गाय और बकरी हैं। उन्होंने गांव की कई महिलाओं रोजगार दिया है।

Ankit Desk
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