सहकारी कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार किसानों पर भारी

फसली ऋण वितरण को लेकर संकट
कमेटी से वार्ता के बाद भी नहीं बनी सहमति
जारी रहेगा सहकारी समितियों के कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार

By: Rakhi Hajela

Updated: 21 Nov 2020, 08:55 PM IST

सहकारी कर्मचारियों की हड़ताल किसानों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे कार्य बहिष्कार के चलते किसानों को रबी सीजन के लिए समय पर फसली ऋण नहीं मिल पा रहा है। हाल ही में कमेटी से हुई वार्ता विफल रहने के बाद राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ के बैनर तले सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने अपना आंदोलन आगे बढ़ाए जाने का निर्णय लिया है, जिसका असर फसली ऋण वितरण पर पडऩे की संभावना है। गौरतलब है कि अपनी मांगों को लेकर सहकारी कर्मचारी पिछली 16 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार कर रहे हैं।

यह हैं सहकारी कर्मचारियों की मांगें
सहकारी समितियों के कर्मचारी नियोक्ता निर्धारण की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही 18 फरवरी 2019 के अनुसार कॉमन कैडर लागू करने और 10 जुलाई 2017 तक सहकारी समितियों में कार्मिक व्यवस्थापक, सहायक व्यवस्थापक का स्क्रींनिग के माध्यम से नियमितिकरण किए जाने की मांग को लेकर सहकारी समितियों कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर रहे हैं।

कमेटी के साथ वार्ता विफल
कर्मचारियों की मांगों पर विचार और चर्चा कर सुझाव देने के लिए 11 नवम्बर को वरिष्ठ अधिकारियों की एक 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी के साथ एक दिन पूर्व राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के साथ वार्ता हुई जो विफल हो गई। संघ के प्रदेश महामंत्री नन्दाराम चौधरी का कहना है कि उनकी मांगों से सम्बन्धित प्रस्ताव पर वित्त विभाग द्वारा चार बार अडंग़ा लगाया जा चुका है, जबकि मांगों को माने जाने से सरकार पर वित्तीय भार नहीं पड़ रहा है। कल कमेटी के साथ हुई वार्ता में भी सुलह का कोई रास्ता नहीं निकला ऐसे में उन्होंने अब मजबूरन कार्य बहिष्कार जारी रखने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के कारण आने वाले दिनों में किसानों की परेशानी बढ़ सकती है।

केवल 7 जिलों में 10 फीसदी से ज्यादा वितरण
गौरतलब है कि प्रदेश में एक अक्टूबर से रबी सीजन के लिए फसली ऋण वितरण की शुरुआत हुई थी। सीजन के दौरान 8 हजार 265 करोड़ का ऋण वितरित किए जाने का लक्ष्य है, लेकिन कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के चलते अब तक महज करीब 714 करोड़ का ऋण ही वितरित हो पाया है जो लक्ष्य का महज करीब 8 फीसदी ही है। केन्द्रीय सहकारी बैंकों की ओर से किसानों को यह अल्पकालीन फसली ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध करवाया जाता है।
अभी स्थिति ये है कि 33 जिलों में से केवल सवाईमाधोपुर, बीकानेर, कोटा, जयपुर, बाड़मेर, झालावाड़ और झुंझुनूं जिले ही ऐसे हैं जिनमें लक्ष्य के मुकाबले 10 फीसदी से ज्यादा ऋण वितरण हो पाया है। सहकारी कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के चलते किसानों को ऋण वितरण का काम पहले से ही ठप्प पड़ा था और अब जबकि उनकी मांगें पूरी नहीं हुई हैं तो एक बार फिर उन्होंने मांगों के संबंध में आदेश जारी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय ले लिया है अगर ऐसा होता है तो ऋण वितरण का काम पूरी तरह से ठप्प हो जाएगा और सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं हो सकेगा।

Rakhi Hajela Desk
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