तीस प्रतिशत स्टाफ से चल रहा उद्योग भवन, कोरोना से बचना है तो भविष्य में भी यह रखनी होगी व्यवस्था

- संक्रमण की रोकथाम के लिए बेहतरीन विकल्प बना है वर्क फ्रॉम होम मॉडल
- सीमित कर्मचारियों की हाजिरी से कामकाज का किफायती ढ़ांचा भी हुआ विकसित

By: Pankaj Chaturvedi

Published: 16 May 2020, 08:40 PM IST

जयपुर. बीते कुछ माह से कोरोना संक्रमण जहां हर आदमी के लिए संकट बना हुआ है, वहीं इस संक्रमण काल ने सरकारी कार्यालयों में कामकाज की एक नई व्यवस्था को सफलता से स्थापित कर दिया हैं। सीमित कार्मिकों की हाजिरी और वर्क फ्रॉम होम की इस व्यवस्था के जरिए ये कार्यालय कठिन समय में भी बेहतर परिणाम देने में सफल हुए हैं। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा सोशल डिस्टेंसिंग की पालना में हुआ हैँ, जहां सीमित कर्मचारियों की हाजिरी के चलते रोजाना सैंकड़ो लोगों की आवाजाही वाले इन कार्यालयों में संक्रमण की रोकथाम में मदद मिली। इस संकट में एक बड़ा खतरा प्रदेश के उद्योग-धंधों के सामने उपजा था, लेकिन पूरे प्रदेश के उद्योग-धंधों को नियमित करने वाला उद्येाग विभाग अब भी एक तिहाई स्टाफ के साथ उद्योग-धंधों को फिर से पटरी पर लाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। दूसरे कार्यालय भी फिलहाल 17 मई तक के लिए ऐसा ही कर रहे हैं। लेकिन उसके बाद यदि इन कार्यालयों में फिर से भीड़भाड़ बढ़ी तो एक ओर जहां संक्रमण का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाएंगा, वहीं दो महीने की मेहनत से तैयार हुआ कामकाज का एक किफायती ढ़ांचा भी ध्वस्त होते समय नहीं लगेगा। ऐसे में इस बात की बेहद जरूरत है कि बीमारी के फैलाव को रोकने और कामकाज के एक बेहतरीन मॉडल को और विकसित करने के के लिए सीमित स्टाफ से कार्य की व्यवस्था को कोरोना काल के बाद भी सुचारू रखा जाए।

अधिकारी सारे, कर्मचारी आ रहे तीस प्रतिशत

उद्योग विभाग के मुख्यालय में संक्रमण की रोकथाम के लिए बनी व्यवस्था में अब उपनिदेशक स्तर तक के सभी अधिकारी आ रहे हैं। लेकिन इससे निचले पायदान के सभी कार्मिकों के लिए तीस प्रतिशत उपस्थिति का मॉडल जारी है। जानकारी के अनुसार विभाग में करीब 175 कार्मिक कार्यरत हैं। जिनमें 35 से 40 अधिकारी और शेष इससे निचले स्तर के कर्मचारी हैं। नई व्यवस्था में अधिकारी तो सारे ऑफिस आ रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों को एक तिहाई संख्या में ही रोटेशन से बुलाया जा रहा है। शेष कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम के जरिए अपना पूरा काम कर रहे हैं। तकरीबन 40 अधिकारी और इतने ही कर्मचारियों को जोड़े तो पौने दो सौ कर्मचारियों वाला उद्योग विभाग अब 75 से 80 कर्मचारियों में भी बेहतर तरीके से कामकाज कर रहा हैँ

फील्ड में भी कामकाज बरकरार

कम कर्मचारियेां की मौजूदगी के बीच भी विभाग का फील्ड का कामकाज यथावत बरकरार है। उद्योग भवन स्थित विभाग के मुख्यालय में ही दो जिला उद्योग केन्द्रों और अन्य विभागीय कर्मचारियों समेत करीब 30 से अधिक कार्मिक फील्ड में रहते हैं, जो अपना कामकाज फील्ड से ही करते हैं किन्तु कार्यालय नहीं आते। इनमें इकाइयों में कोविड प्रोटोकॉल की पालाना सुनिश्चित कराने, गाइडलाइन के अनुसार उद्योगों का संचालन कराने और नियमित निरीक्षण जैसे कामकाज शामिल हैं।

घरों से तैयार हो रहे आदेशों के प्रारूप

अधिकारियों ने बताया कि जो स्टाफ कार्यालय आता है, उसके अलावा शेष स्टाफ भी लगातार घरों से ही अपना कामकाज सुचारू बनाए हुए हैं। इसके लिए अधिकतर कार्मिक अपने घरों से लैपटॉप और कम्प्यूटर के जरिए कामकाज कर अपने अधिकारियों को रिपोर्ट कर रहे हैं। कई प्रकार के जरूरी आर्डर और दस्तावेज लिपिकीय कर्मचारी और टाइपिस्ट के जरिए घरों से ही तैयार कर भेज दिए जाते हैं।

सोशल प्लेटफॉर्म से जारी हो रहे निर्देश

उद्योग विभाग के विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रभारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ग्रुप्स बना कर अपने कर्मचारियों को जोड़ रखा है। कर्मचारियों के लिए अधिकतर निर्देश इन्हीं गु्रप्स पर दिए जाते हैं। अधिकारियेां ने बताया कि विभाग के उच्चतम स्तर पर भी अधिकारियों की ओर से गु्रप्स में ही निर्देश देकर पालना की निगरानी की जा रही हैं।

बिजली-पानी में 30 से 50 प्रतिशत कमी

वर्क फ्रॉम होम मॉडल के चलते 40 कमरों वाले उद्योग विभाग के कार्यालय में इन दिनों आधे से कम्प्यूटर ही चल रहे हैं। इसके अलावा कई कमरों में तो कोई कर्मचारी ही नहीं होते। ऐसे में बिजली की खपत में करीब 30 प्रतिशत तक कमी बताई जा रही है। ऐसे ही पानी का उपभोग भी करीब आधा ही रह गया है।

इनका कहना है

‘यह बीमारी अभी कई वर्षों तक रहने वाली है और हमें इसके साथ ही कामकाज करने की कला विकसित करनी होगी। ऐसे में संक्रमण की रोकथाम के लिए सीमित स्टाफ से काम कराना ही सबसे बेहतरीन विकल्प है, जो भविष्य में भी जारी रहना चाहिए। जहां तक उद्योग विभाग की बात है तो अब अधिकतर कामकाज ऑनलाइन होने लगा है। सारे आवेदन, मंजूरियां ऑनलाइन ही होती हैं। ऐसे में फिजिकली कर्मचारियों की हाजिरी की कोई आवश्यकता नहीं। फील्ड स्टाफ भी अब बेहतर प्रशिक्षित है, जिन्हें गाइड करने की कोई आवश्यकता है तो उन्हें ऑनलाइन माध्यम से ही दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं।’

डी.सी.गुप्ता, सेवानिवृत अतिरिक्त निदेशक, उद्योग विभाग


वर्क फ्राम होम: 10 फायदे

1— आफिस आने— जाने का समय बचता है, इसका सदुपयोग हो सकता है
2— कर्मचारी को पेट्रोल— डीजल आदि का खर्चा नहीं देना पड़ता
3— अध्ययन बताते हैं कि घर से काम करने पर 13 फीसदी उत्पादकता बढ़ती है
4— परिवार का साथ रहने के कर्मचारी और उसके परिजन ज्यादा खुश रहते हैं
5— कर्मचारी की आॅन लाइन उपलब्धता बढ़ जाती है, इससे काम घंटे तय न करके गुणवत्ता और प्राथमिकता से होता है
6— आॅन लाइन काम होने से कर्मचारी को भी अपनी निजी जिंदगी को बेहतर करने के लिए ज्यादा वक्त मिलता है, वह आफिस से बंधा नहीं होता
6— संस्थानों के कई तरह के स्थापना संबंधी खर्चों की सीधी बचत होती है
7— अनावश्यक छुट्टी, मेडिकल लीव जैसी झंझट कम होती है
8— अध्ययन बताते हैं कि इस तरह के कर्मचारी कम बीमार पड़ते हैं।
9— वर्क फ्रॉम होम में कागजी कामकाज कम होने से पर्यावरण को सीधा फायदा होता है
10— इस संस्कृति में कभी— कभार होने वाली लंबी मीटिंग भी उत्साहपूर्ण और परिणामजनक होती हैं

Pankaj Chaturvedi
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