भोजन के पैकिट के लिए भटकते फिरते हैं कामगार-मजदूर

राज्य सरकार और जिला प्रशासन यह दावे कर रहे हैं शहर में एक भी प्रवासी कामगार—मजदूर या गरीब भूखा नहीं रहे इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। सभी गरीब, असहायों को भोजन के पैकिट और खाने की सामग्री के सूखे किट बांटे गए हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि शहर में रह रहे प्रवासी मजदूरों की हालत खराब है। वे खाने के लिए इधर उधर भटकते फिरते हैं। ऐसे में लॉकडाउन नियमों की भी पालना नही हो रही है।

By: Prakash Kumawat

Updated: 23 Apr 2020, 11:49 PM IST

भोजन के पैकिट के लिए भटकते फिरते हैं कामगार-मजदूर
प्रवासी कामगारों के समक्ष गहराया रोटी का संकट
जयपुर
राज्य सरकार और जिला प्रशासन यह दावे कर रहे हैं शहर में एक भी प्रवासी कामगार—मजदूर या गरीब भूखा नहीं रहे इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। सभी गरीब, असहायों को भोजन के पैकिट और खाने की सामग्री के सूखे किट बांटे गए हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि शहर में रह रहे प्रवासी मजदूरों की हालत खराब है। वे खाने के लिए इधर उधर भटकते फिरते हैं। ऐसे में लॉकडाउन नियमों की भी पालना नही हो रही है।
हसनपुरा पुलिया के पास नाले पर करीब बिहार के 100 प्रवासी मजदूर—कामगार यहां रह रहे हैं। लॉकडाउन के बाद से उनके समक्ष रोजी रोटी का संकट हो गया है। यहां अभी तक सरकार की ओर से कोई नुमाइंदा नहीं पहुंचा है। उनका कहना है कि उनके पास न तो सूखा राशन देने कोई आया है न ही उनकी किसी ने सुध ली है। यहां केवल एक वक्त शाम को पुलिस की एक गाड़ी भोजन के पैकिट लेकर आती है। उसे देखते ही भोजन के पैकिट की लूट मच जाती है। देखते ही देखते पैकिट खत्म हो जाते हैं। जिनको भोजन का पैकिट नहीं मिलता वो एकत्र होकर इधर से उधर सड़कों पर घूमते रहते है। यदा कदा कुछ समाजसेवी उधर भोजन के पैकिट लेकर आ जाते है तो सुबह भी खाना मिल जाता है। अन्यथा रात के खाने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है। गुरूवार रात को भी हसनपुरा पुलिया पर ऐसा ही नजारा देखने को मिला। भोजन खत्म होने के बाद जिन्हें भोजन नहीं मिला वे इधर उधर इस आस में घूमते नजर आए कि कोई समाजसेवी ही भोजन लेकर आए तो उनकी सुधा शांत हो जाए।
कोरोना जैसी वैश्विक महामारी की जंग में लॉकडाउन के चलते सरकार इन प्रवासी मजदूर—कामगारों में मौजूद युवक दिनभर यही पता करते रहते हैं कि भोजन के पैकिट किधर बंट रहे हैं। आसपास में भोजन की सूचना पर वे दौड़ पड़ते हैं। ऐसे में भोजन का वितरण करने वाले समाजसेवियों के सामने भी संकट हो जाता है क्योंकि ये मजदूर बिना सोशल डिस्टेंसिंग के एकसाथ एक जगह आ जाते हैं। भोजन की इसी तरह की समस्या शास्त्रीनगर की कच्चीबस्तियों में भी देखने को मिल रही है। लोगों कहना है कि विधायक व राजनीतिक पार्टी के लोग राशन सामग्री लेकर आते हैं और अपने कार्यकर्ताओं को देकर चले जाते हैं। इस तरह से राशन सामग्री के वितरण में भी राजनीतिक भेदभाव के आरोप सरकार पर लग रहे हैं।

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