'कुदरत से उतना ही लेना चाहिए जितना हम वापस कर सकें'

आज देश में आतंकवाद और दुर्घटनाओं के साथ पर्यावरण दूषित होने से अधिक मौतें हो रही हैं। पर्यावरण संरक्षण का काम केवल सरकारों का नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति का दायित्व है। मनुष्य के लिए शुद्ध हवा, पानी के साथ-साथ शुद्ध खाद्य सामग्री भी जरूरी है।

आज देश में आतंकवाद और दुर्घटनाओं के साथ पर्यावरण दूषित होने से अधिक मौतें हो रही हैं। पर्यावरण संरक्षण का काम केवल सरकारों का नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति का दायित्व है। मनुष्य के लिए शुद्ध हवा, पानी के साथ-साथ शुद्ध खाद्य सामग्री भी जरूरी है। ओटीएस में 'ठोस कचरा प्रबंध एवं पर्यावरण के ज्वलंत मुद्दों' पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि पूर्व न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल ने ये बातें कही।

-जीवन शैली की विश्व में पहचान

उन्होंने कहा कि राजस्थान एक बड़ा प्रदेश है और इसकी संस्कृति और जीवन शैली की पूरे विश्व में पहचान है। मानव जीवन को सुरक्षित रखने के लिए हमारी संस्कृति के अनुरूप हवा ही गुरू है, पानी पिता के समान और धरती माता की तरह है। इस भावना को जन-जन में पुनः जीवित करना होगा। वहीं, राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष इन्द्रजीत मोहन्ती ने कहा कि कोई भी लोक कल्याणकारी काम केवल सरकार के भरोसे नहीं, बल्कि समाज के हर जागरूक नागरिक को आगे आकर अपनी भूमिका का निर्वहन करना होगा।


-पानी, हवा और धरती को संभालें

उन्होंने कहा कि यदि पानी, हवा और धरती को संभालकर नहीं रखेंगे तो निश्चित रूप से एक दिन बर्बादी होगी। ऐसे में हमें कुदरत से उतना ही लेना चाहिए जितना हम वापस कर सके। उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए कचरे का निस्तारण, नए सिवरेज प्लांट की समुचित व्यवस्था के साथ अधिक मात्रा में पेड़ लगाना जरूरी है। कार्यक्रम में जेडीसी टी.रविकान्त, बड़ी संख्या में प्रतिभागियों सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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