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वर्ल्ड डायबिटीज डे-बच्चों में बढ़ रहा डायबिटीज का खतरा

locationजयपुरPublished: Nov 14, 2022 01:56:27 pm

Submitted by:

HIMANSHU SHARMA

डायबिटीज की चपेट में आ रहे बच्चे, बढ़ रहे केस

World Diabetes Day- The risk of diabetes increasing in children
World Diabetes Day- The risk of diabetes increasing in children

जयपुर
विश्व में मधुमेह (डायबिटीज) के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व मधुमेह दिवस यानी वर्ल्‍ड डायबिटीज डे मनाने की पहल की गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में हर साल डायबिटीज से करीब 40 लाख मरीजों की मौत होती हैं। इसलिए आमजन को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 14 नवंबर को वर्ल्‍ड डायबिटीज डे मनाया जाता है।

अब बुजुर्गों में ही नहीं बल्कि बच्चों में डायबिटीज का खतरा बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के बच्चों के सबसे बड़े जेके लोन अस्पताल में 2 से 10 वर्ष आयु के बच्चे इस बीमारी से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं।

अस्पताल के जुड़े डॉक्टर्स के अनुसार 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चे डायबिटीज का शिकार हो रहे हैं। इसमें ज्यादातर बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज मिल रही है, जो आनुवांशिक कारणों से होना माना जा रहा है।

इसकी चपेट में ज्यादातर बच्चे 2 से 10 वर्ष आयु के हैं। कई बड़े बच्चों में टाइप 2 डायबिटीज भी मिल रही है। इसकी वजह खानपान और बिगड़ी जीवनशैली माना जा रहा है। हालांकि अस्पताल आने वाले ज्यादातर बच्चे डायबिटीज टाइप 1 से ग्रस्त है।

जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ.आरके गुप्ता के अनुसार बच्चों में डायबिटिक के केस बढ़ रहे हैं। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल लाया जा रहा है। इसकी वजह इलाज लेने में लापरवाही होना है। बच्चे की मौत भी हो सकती है। परिजन को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। समय पर और पूरा इलाज लेना चाहिए।

चिकित्सकों के अनुसार टाइप 1 डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे का शरीर इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाता है। बच्चे के जीवित रहने से लेकर शरीर के अंगों को ठीक से काम करते रहने के लिए इस हार्मोन की आवश्यकता होती है।

शरीर में इसका उत्पादन न हो पाने की स्थिति में ऐसे रोगियों को जीवनभर इंसुलिन का इंजेक्शन लगाते रहने की आवश्यकता होती है। इसका संपूर्ण इलाज नहीं है, इसे केवल प्रबंधित किया जा सकता है। ऐसे में पेरेंट्स को बच्चे के खानपान, जीवनशैली और स्वास्थ्य पर पूरी नजर रखनी चाहिए।

चिकित्सकों के अनुसार टाइप 1 डायबिटीज के कारण बच्चे को सामान्य से अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, वजन कम होना, थकान और कमजोरी, चिड़चिड़ापन या व्यवहार में परिवर्तन, थकान, धुंधला दिखाई देना, त्वचा पर काले धब्बे, बार-बार संक्रमण होना, घावों का जल्दी ठीक न होना आदि हो सकते हैं।

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