और गर्म होगी पृथ्वी, 2021 तक 3.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ेगा औसत पारा

यूएन की रिपोर्ट ने चेताया: ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन सबसे बड़ा कारण

 

By: anoop singh

Published: 27 Nov 2019, 11:55 PM IST

नई दिल्ली.
तमाम वैज्ञानिक चेतावनियों और राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के बावजूद वर्ष 2018 में वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन पर रोक नहीं लग पाई है। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने चेताया है कि 2021 तक पृथ्वी के औसत तापमान में 3.2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। जलवायु परिवर्तन के ये भयावह हालात पेरिस समझौते को लागू करने के बावजूद भी सामने आएंगे। स्पेन में 2 दिसंबर से होने वाली संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन कोप-25 से पूर्व जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशक से जीएचजी उत्सर्जन में 1.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कार्बनडाइऑक्साइड (सीओ2) समकक्ष गैसीय उत्सर्जन 55.3 गीगाटन के सर्वकालिक आंकड़े तक पहुंच गया है।
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तो सुधरेंगे हालात
संयुक्त राष्ट्र की एमिशन गैप रिपोर्ट के अनुसार सभी देशों को वर्तमान हालात से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। रिपोर्ट में सुझाया गया है कि 2020 से 2030 के दौरान यदि जीएचजी उत्सर्जन हर वर्ष 7.6 प्रतिशत गिर जाता है तो प्रतिवर्ष तापमान में केवल 1.5 डिग्री सेल्सियस के औसत तापमान वृद्धि की परिस्थिति को पाया जा सकता है।
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उत्सर्जन में कमी लाएं विकसित देश
सभी देशों को जीएचजी उत्सर्जन में पांच गुना तक की कमी लानी होगी। जिससे 1.5 डिग्री सेल्सियस के औसत तापमान वृद्धि के लक्ष्य को पाया जा सकेगा। उत्सर्जन में तीन गुना तक की कमी से 2 डिग्री सेल्सियस के औसत तापमान वृद्धि के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा। इस लक्ष्य में विकसित देश दुनिया के विकासशील देशों की तुलना में जल्द कार्रवाई करें।
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विकसित देश उत्सर्जन की जिम्मेदारी निभाएं। भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में कार्बन उत्सर्जन इकाईयों को न लगाएं। उत्सर्जन में हर वर्ष 7 फीसदी की कटौती करें।
इंगर एंडरसन, कार्यकारी निदेशक, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम
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195 देशों ने किया था 2015 में पेरिस समझौता
2 डि.से. तक वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि का लक्ष्य
78 फीसदी जीएचजी उत्सर्जन करते हैं जी 20 देश
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भारत को कम करना है उत्सर्जन
पेरिस समझौते के अनुसार भारत सहित चीन, मेक्सिको, रूस, तुर्की और ईयू को उत्सर्जन में कमी लानी है। जबकि ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और अमरीका को उत्सर्जन में कमी के और प्रयास करने होंगे।
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भारत में हालात
1901 से 2018: 0.6 डिग्री से. तापमान में औसम वृद्धि
लेकिन...
वल्र्ड बैंक के अनुसार इस सदी के अंत में औसम तापमान 25.1 डि.से. से 29.1 डि. से. पहुंच जाएगा।

anoop singh Desk
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