राजस्थान के जोधपुर के बाप में विश्?व का सबसे ब?ा सोलर पार्क

देश में अक्षय ऊर्जा ( renewable energy ) के 2030 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जून 23 के बाद भी स्थापित होने वाले अक्षय ऊर्जा संयत्रों को अन्तरराज्यीय विद्युत प्रसारण तंत्र आईएसटीएस ( Inter-State Power Transmission System ) द्वारा निशुल्क सुविधा उपलब्ध करानी होगी। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है तो विश्व का सबसे बड़ा 2245 मेगावॉट का सोलर पार्क ( world largest solar park ) जोधपुर के बाप तहसील के भादला में स्थापित किया गया है।

By: Narendra Kumar Solanki

Published: 10 Jun 2021, 08:38 PM IST

जयपुर। देश में अक्षय ऊर्जा के 2030 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जून 23 के बाद भी स्थापित होने वाले अक्षय ऊर्जा संयत्रों को अन्तरराज्यीय विद्युत प्रसारण तंत्र आईएसटीएस द्वारा निशुल्क सुविधा उपलब्ध करानी होगी। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है तो विश्व का सबसे बड़ा 2245 मेगावॉट का सोलर पार्क जोधपुर के बाप तहसील के भादला में स्थापित किया गया है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम और राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के सीएमडी डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा कि 2030 तक राजस्थान में 90 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य अर्जित किया जाना है, जबकि देश में 2030 तक 450 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। इस समय राजस्थान 10 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा के उत्पादन के साथ देश में 11 प्रतिशत भागीदारी निभा रहा है। देश में 2022 तक 175 गीगावॉट रिन्यूवल एनर्जी विकसित करने का लक्ष्य है, जिसके विरुद्ध मई 21 तक 94 गीगावाट रिन्यूवल एनर्जी क्षमता विकसित की जा चुकी है। 450 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिवर्ष कम से कम 25 गीगावॉट एनर्जी क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय करना होगा।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए राजस्थान में सोलर एनर्जी नीति जारी कर आकर्षक रियायतें और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रदेश में 2024-25 तक 37.5 गीगावॉट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा के लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के लिए केन्द्र सरकार को अन्तरराज्यीय विद्युत प्रसारण तंत्र द्वारा दी जा रही सुविधाओं को 2023 के बाद भी जारी रखना होगा, वहीं जैसलमेर और जोधपुर में गोडावण के लिए पर्यावरण समस्या के समाधान और केन्द्र सरकार की कुसुम योजना के क्रियान्वयन में वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिए बैंकों की सहभागिता तय करने की आवश्यकता है। इसके लिए बैंकों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि कुसुम योजना में किसानों को वित्तीय सपोर्ट उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में कुसुम योजना में राजस्थान में अच्छा काम हुआ है और जयपुर जिले के कोटपुतली के भालोजी गांव में देश का पहला एक मेगावॉट का सोलर प्लांट स्थापित किया जा चुका है। कुसुम योजना में ही गए सप्ताह ही राज्य में 2 मेगावॉट का सोलर प्लांट चालू किया गया है। राज्य में कुसुम योजना में 6 और परियोजनाएं जल्दी ही पूर्ण होने जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजस्थान सरकार सोलर और विंड एनर्जी क्षमता विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अपनी रीति और नीति को इस तरह से विकसित किया है, जिससे अक्षय उर्जा के क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आए और अधिक से अधिक अक्षय उर्जा का उत्पादन शुरु हो सके।

Narendra Kumar Solanki Desk
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