विश्व सिजोफ्रेनिया डे: सजोफ्रेनिया से शक की आदत

सिजोफ्रेनिया का रोगी सच और कल्पना के बीच का अंतर नहीं समझ पाता।

By: Priyanka Yadav

Published: 24 May 2018, 12:25 PM IST

जयपुर . यदि आप दूसरों को लेकर इस बात की चिंता कर रहें है कि वह आपके प्रति क्या सोच रहा है या वो आपको नजर अंदाज तो नहीं कर रहा है तो आप सिजोफ्रेनिया से ग्रसित हो सकते हैं। फिर वह चाहे पति-पत्नी के बीच आपसी विश्वास हो या अन्य संबंध और मित्रों के बीच का विश्वास।

मनोचिकित्सकों ने बताया कि माता-पिता में किसी एक को यह बीमारी होने पर उनके बच्चे को यह बीमारी होने की आशंका 15 से 20 प्रतिशत तक होती है, जबकि माता-पिता दोनों को यह बीमारी होने पर बच्चे को यह बीमारी होने की आशंका 60 प्रतिशत तक हो सकती है। जुड़वा बच्चों में से एक को यह बीमारी होने पर दूसरे बच्चे को भी यह बीमारी होने की आशंका शत-प्रतिशत होती है। सिजोफ्रेनिया की बीमारी आम तौर पर युवावस्था में खास तौर पर 15-16 साल की उम्र में ही शुरू हो जाती है। कुछ लोगों में यह बीमारी ज्यादा तेजी से बढ़ती है और धीरे-धीरे गम्भीर रूप धारण कर लेती है।

 

यह होता है असर

सिजोफ्रेनिया का रोगी सच और कल्पना के बीच का अंतर नहीं समझ पाता। जिसके कारण रोगी को भारी मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है। वह अपने ही विचारों में खोया रहता है। यहा तक कि वो हर व्यक्ति को शक की निगाह से देखता है। जैसे उसके आस-पास के लोग उसके खिलाफ षडयंत्र रच रहे हो। उसे अजीबो-गरीब डरावनी आवाजे सुनाई पड़ती हैं, डरावनी परछाइयां दिखाई पड़ती हैं। इन सबसे घबरा कर वह हिंसा और आत्महत्या जैसे कदम तक उठाने की कोशिश करता है। यह बीमारी खुदकुशी की प्रवृत्ति भी बढ़ाती है।

 

फैक्ट फाइल
1 लाख सिजोफ्रेनिया के शिकार
60 प्रतिशत पुरूषों में
30 प्रतिशत महिलाओं में
10 प्रतिशत बच्चों में
20 से 30 उम्र में बढ़ती बीमारी

 

सिजोफ्रेनिया ज्यादातर पुरूषों में बढ रही है। जब कभी रोगी के व्यवहार में परिवर्तन दिखे तो उसे तुरंत मनोचिकित्सक को दिखाए।

डॉ.आर.के.सोलंकी, अधीक्षक, मनोचिकित्सालय केंद्र

 

केस 1
रमेश कुमार (परिवर्तित नाम) की शादी को करीब 2 साल ही हुए थे। वो अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करने लगा और एक रात मौका मिलने पर उसने अपनी पत्नी का गला काटकर उसकी हत्या कर उनकी लाश के सामने बैठकर रातभर रोता रहा।

केस 2

राधिका शर्मा (परिवॢतत नाम) दो साल पहले दिल्ली जॉब के सिलसिले में दिल्ली गई थी। रात को घर जाने के लिए ऑटो का वेट कर रही थी। उस दौरान दो अज्ञात युवकों ने उसे काफी परेशान किया। उस हादसे के बाद वह डरी-डरी रहने लग गई ।

केस 3

राहुल (परिवर्तित नाम) के पिता को सिजोफ्रेनिया के शिकार थे।राहुल को भी यह बीमारी आनुवंशिकता के कारण हो गई। उसमें इस बीमारी के लक्षण 15 साल की उम्र में दिखाई देने लग वो किसी के साथ नहीं मिलता और अकेला रहता है।

Priyanka Yadav
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