पानी को लेकर राज्य और केन्द्र में तकरार, सरकार के पास दो लाख करोड़ रुपए हों तो मिले सभी को पानी

पेयजल और इससे जुड़ी योजनाओं को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच नहीं बैठ पा रहा सांमजस्य, राज्य सरकार पर बजट न होने की वजह से बड़ी योजनाओं को धरातल पर लाने में हो रही दिक्कत

By: pushpendra shekhawat

Published: 04 Mar 2020, 03:08 PM IST

अश्विनी भदौरिया / जयपुर। हर घर में पानी पहुंचाने के लिए राज्य सरकार के पास पर्याप्त बजट नहीं हैं। यही वजह है कि राज्य सरकार तमाम प्रोजक्ट पर केंद्र सरकार से सहयोग की उम्मीद लगाए बैठी है, लेकिन अब तक केंद्र सरकार से सीधे तौर पर कोई आश्वासन नहीं मिला है। हालांकि, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से कई बार यह कहा गया है कि जल जीवन मिशन का काम राजस्थान में धीमी गति से चल रहा है। पैसे की कमी नहीं आने दी जाएगी। जल जीवन मिशन और पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को शुरू करने के लिए राज्य सरकार को करीब दो हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। खुद जलदाय मंत्री बीडी कल्ला सदन में यह कह चुके हैं कि बिना केंद्र के सहयोग से इन योजनाओं को पूरा कर पाना संभव नहीं है।

केंद्रीय मंत्री ने किया ट्वीट
जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दो मार्च को ट्वीट कर बताया कि अटल भूजल योजना के तहत राजस्थान के 17 जिले, 22 ब्लॉक और 876 ग्राम पंचायतों में करीब 50 लाख से ज्यादा लोगों को मिलेगी अटल भूजल योजना से जल की सौगात। इस योजना के तहत उन इलाकों का चयन किया गया है, जहां भूजल स्तर बहुत नीचा है। इस योजना के तहत जलस्तर को ऊंचा उठाने की कवायद की जाएगी।


इसको लेकर बढ़ रहा विवाद
सदन में दो मार्च को ही जलदाय विभाग की अनुदान मांगों पर बोलते हुए जलदाय मंत्री बीडी कल्ला ने कहा था कि 2013 तक केन्द्र सरकार से राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत मरुस्थलीय क्षेत्रों के लिए 90 फीसदी अनुदान मिलता था। जो घटाकर 50 फीसदी कर दिया गया है। 2024 तक जलजीवन मिशन के तहत घर-घर नल से जल पहुंचाने के लिए करीब एक लाख 50 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। केंद्र के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार इसका 50 प्रतिशत 75 हजार करोड़ रुपए राज्य सरकार खर्च करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से 90 प्रतिशत अनुदान की मांग की।


खास-खास
-जलजीवन मिशन के अनुदान को 90 फीसदी करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दो बार केंदीय जल शक्ति मंत्री को पत्र लिख चुके हैं। वहीं जलदाय मंत्री भी राज्य के सभी सांसदों को पत्र लिख राज्य के हितों की पैरवी करने का आग्रह कर चुके हैं।


पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना भी अधर में
राज्य के 13 जिलों झालावाड, बांरा, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेंर, टोंक, जयपुर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर एवं धौलपुर में मनुष्य एवं जानवरों के लिए वर्ष 2051 तक पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना की डीपीआर तैयार की जा चुकी है। इसमें 37 हजार 247 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह रिपोर्ट केन्द्रीय जल आयोग को आवश्यक अनुमोदन के लिए भेजी गई है। बिना केंद्र के सहयोग के इस योजना को भी मूर्तरूप देना संभव नहीं है।


राज्य सरकार के प्रयास
प्रदेश में शहरों की तर्ज पर ग्रामीण परिवारों को घर में ही पेयजल उपलब्ध करवाना के पहले चरण में 16 जिलों का चयन किया गया है। इससे 4327 गांवों एवं 9159 ढाणियों के लगभग 9 लाख परिवारों को फायदा होगा। इस योजना में झुंझुनूं, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, झालावाड़, डूंगरपुर, पाली, भीलवाड़ा, टोंक, जयपुर, नागौर, बारां, अजमेर, कोटा, बूंदी और करौली को लाभ मिलेगा।

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