'जेएनयू के बारे में फैलाई जा रही हैं गलत खबर

जेएनयू-बीएचयू के पूर्व छात्रसंघ व अध्यापक संघ अध्यक्ष प्रो.आनंद कुमार किसी कार्यक्रम के सिलसिले में जयपुर आए। पत्रिका से बातचीत के दौरान उन्होंने जेएनयू, दिल्ली सहित कई अन्य मुद्दों पर बेबाकी से राय रखी।

जयपुर. जेएनयू, दिल्ली के छात्र अपनी जेब से मैस का पैसा भरते हैं, यहां तक कि मैनेजर का पैसा भी उनकी जेब से जाता है, सरकार उसमें कुछ नहीं देती। हां, वजीफे के तौर पर उन्हें 30 हजार रु. मिलते हैं, लेकिन हॉस्टल फीस को अचानक से 30-40 गुना बढ़ाना और सर्विस चार्ज विद्यार्थियों से वसूलना तर्कसंगत नहीं लगता। जेएनयू के बारे में खबर ये उड़ाई जाती है कि वहां के विद्यार्थी सरकार के पैसे की मौज उड़ा रहे हैं, जबकि हकीकत कुछ और है। यह कहना है जेएनयू, बीएचयू के पूर्व छात्रसंघ व अध्यापक संघ अध्यक्ष और समाजशास्त्री प्रो.आनंद कुमार का। प्रो.आनंद ने शुक्रवार को पत्रिका से बातचीत में कहा, जेएनयू में कई छात्र बेहद गरीब परिवारों से आते हैं। मैं मानता हूं कि समय के साथ फीस में सुधार होना चाहिए, लेकिन इस तरह नहीं। अच्छी बात यह है कि कार्यकारिणी समिति ने कुलपति के प्रस्तावों को खारिज किया है।
लिंगदोह कमेटी को बदल दो
प्रो. आनंद ने कहा, लिंगदोह कमेटी में राजनीति से जुड़़ा एक भी सदस्य नहीं था। अब दूसरी कमेटी बनाई जानी चाहिए। आजकल छात्र राजनीति को दल प्रभावित कर रहे हैं, वे उन्हें कानून विरोधी बना रहे हैं। यही वजह है कि दलों को भी अच्छे नेता नहीं मिल रहे।
जलियांवाला ने किया बेपर्दा
प्रो. आनंद के अनुसार जलियांवाला बाग जनसाधारण की कुर्बानी के लिए याद रखा जाएगा। यही वो आंदोलन था, जिसने अंग्रेजों की उदारता को बेपर्दा किया, साथ ही जो लोग उनके समर्थन में थे, उन्हें निरुत्तर किया।

Rajkumar Sharma
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