भगवान राम का जीवन हमारे लिए अनुकरणीय: मुनि विद्या सागर

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By: Harshit Jain

Published: 07 Mar 2020, 03:42 PM IST


— जयकारों के बीच इंद्र-इंद्राणियों ने चढ़ाए 512 अर्घ
जयपुर. अष्टान्हिका महापर्व के तहत शहरभर के दिगंबर जैन मंदिरों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। भट्टारक जी की नसिया में चल रहे सिद्धचक्र महामण्डल विधान में शनिवार को मुनि विद्या सागर ससंघ सानिध्य इंद्र-इंद्राणियों ने भक्ति नृत्य करते हुए 512 अर्घ मंडल पर चढ़ाए। इससे पूर्व भगवान की शांतिधारा हुई। मुनि ने कहा कि भगवान राम के जीवन को समझकर हमें उसका अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने धर्म की रक्षा करते हुए पिता के आदेश को भगवान का आदेश मानकर ग्रहण किया। पिता के आदेश में कही किन्तु, परन्तु नहीं किया। ऐसे ही हमें अपने माता-पिता के आदेश को भगवान का आदेश मानकर पालन करना चाहिए।
शाम को महाआरती की गई। इसके बाद प्रवचन हुए।
अजमेर रोड़ स्थित बड़ के बालाजी जैन मंदिर में आर्यिका विज्ञाश्री ससंघ सानिध्य में पूजन हुई। दस मार्च को महामस्तकाभिषेक होगा। इससे पूर्व भजन संध्या होगी।


21 मार्च को श्रीफल भेंट करने के लिए होंगे रवाना
संयोजक राजेन्द्र सेठी ने बताया कि संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर के राजस्थान में आगमन के लिए श्रीफल भेंट करने के लिए शहर से सैकड़ों श्रद्धालु 21 मार्च को रवाना होंगे। यहां विधान में बैठे सभी इंद्र-इंद्राणी आचार्य को श्रीफल भेंटकर पधारो म्हारे राजस्थान के लिए श्रीफल भेंट करेंगे।

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