मैं एक घंटे छोड़ देता हूं, जितना हल्ला करना हो, कर लो

विपक्ष के हंमामे पर सभापति पारीक हुए व्यथित

 

By: Pankaj Chaturvedi

Published: 07 Mar 2020, 08:00 AM IST

जयपुर. लगता है आपने तय कर लिया है कि आप जैसे आए थे, वैसे ही कच्ची मिट्टी की तरह चले जाएंगे.. कुछ सीखने की मंशा नहीं है आपकी। मैं आपको एक घंटे के लिए छोड़ देता हूं... जितना हल्ला करना चाहते हो, कर लीजिए। शब्दों के जरिए यह व्यथा किसी स्कूली कक्षा में शोर मचाते विद्यार्थियों के लिए अध्यापक की नहीं, बल्कि विधानसभा में शोरशराबा बंद नहीं कर रहे विधायकों के लिए सभापति राजेन्द्र पारीक ने बयां की। सभापति ने मजबूर होकर यहां तक कह दिया कि आप सदन नहीं चलाना चाहते हैं तो मैं चर्चा समाप्त करा देतो हूं।

पुलिस और कारागार की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान निदर्लीय संयम लोढ़ा ने भाजपा सरकार के वक्त दलित अत्याचार के मामले गिनाते हुए कोटा में भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर एक पुलिस अधिकारी पर हमले के पुराने मामले का जिक्र किया। इस पर भाजपा की चंद्रकांता मेघवाल ने कहा कि यह उनसे जुड़ा मामला है, लोढ़ा सदन में झूठी बात नहीं बताएं। इस पर अन्य विपक्षी सदस्यों ने भी विरोध शुरु कर दिया। हंगामा थमा नहीं कि लोढ़ा ने अलवर में चार छात्रों के रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या का प्रकरण गिना दिया। इस पर विपक्ष ने लोढ़ा को अधिक समय देने की बात कहते हुए फिर हंगामा मचा दिया। सभापति पारीक ने कहा कि हर आदमी किसी ने किसी घटना का जिक्र करेगा। क्या आप शाम तक ऐसे ही करोगे? मुझे ये अच्छा नहीं लगता, किसी को लगता हो तो वह यहां आकर संभाले।

पुलिस ने माफ किया वो ‘माफिया’

अनुदान मांगों पर बहस में कांग्रेस के भरत सिंह ने कहा कि पुलिस और अपराधियों की मिलीभगत नहीं हो तो माफिया पनप ही नहीं सकता। नई परिभाषा देते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस ने जिसको माफ किया, वो माफिया है। इस माफिया को माफ मत करो। उन्होंने कहा कि जेलों के हाल खराब है। अपराधी जेल कर्मचारियों से ही मारपीट करते हैं। ऐसे अपराधियों के लिए विशेष जेल हों, जहां उन्हें ‘प्राचीन’ तरीके से सुधारा जाए, क्योंकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते।

Pankaj Chaturvedi
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