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जैसलमेर

हड़बड़ी व गड़बड़ी के बीच ‘तारों’ में उलझे 450 परिवार, जाल बना जी का जंजाल

गत दिनों तेज अंधड़ के कारण सोनार किले में विद्युत तार टूटने व विद्युत पोलों को नुकसान पहुंचने की घटनाओं के बीच मंडराये खतरे से एक बार फिर यहां बिजली व टेलीफोन की तारों को भूमिगत करने की मांग जोर पकड़ रही है।

जैसलमेरJun 27, 2024 / 07:24 am

Deepak Vyas

jaisalmer
गत दिनों तेज अंधड़ के कारण सोनार किले में विद्युत तार टूटने व विद्युत पोलों को नुकसान पहुंचने की घटनाओं के बीच मंडराये खतरे से एक बार फिर यहां बिजली व टेलीफोन की तारों को भूमिगत करने की मांग जोर पकड़ रही है। हकीकत यह है कि धोरों की नगरी के बीच बसे खूबसूरत जैसलमेर शहर के ऐतिहासिक सोनार दुर्ग की सुनहरी आभा पर विद्युत तारों का जंजाल प्रभावित कर रहा है। हकीकत यह भी है कि विश्व धरोहर को बिजली व टेलीफोन के तारों के जंजाल से मुक्त करने की मांग व कवायद को लेकर दावे व आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन यह सपना अब तक सपना ही बना हुआ है।
पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि डिस्कॉम विद्युत तारों को भूमिगत करने के लिए ‘ना’ कर चुका है, वजह तकनीकी समस्या बताई जा रही है। उधर, बीएसएनएल की ओर से भी टेलीफोन लाइनों को भूमिगत करने की इच्छा शक्ति दिखाई नहीं दे रही। सूत्रों की मानें तो सीवरेज लाइन के साथ भूमिगत रूप से बिजली और टेलीफोन लाइनों को बिछाने के कार्य में तकनीकी समस्या भी आ रही है।
तारों के इस जंजाल के कारण सघन आबादी वाले दुर्ग में कभी भी विद्युत जनित हादसा होने की आशंका भी बनी रहती है। बारिश के मौसम में कई बार किले में खंभों में करंट प्रवाहित होने की घटनाएं भी घटित हो चुकी हैं। दुर्ग में निवास करने वाले लोगों में भूमिगत लाइनों की विफलता को लेकर रोष है। डिस्कॉम के जिम्मेदारों का तर्क है कि भूमिगत लाइनों में समस्या यह है कि ऐतिहासिक सोनार दुर्ग में रुडीप की तरफ से भूमिगत बिजली के तार बिछाने के लिए कम जगह छोड़ी गई है, वहीं तकनीकी कारण भी एक वजह है।

हकीकत यह भी

-विद्युत लाइन बिछाने के लिए प्लास्टिक के केवल 4 इंच के पाइप लगाए गए, वहीं विद्युत लाइन स्वयं इससे करीब दोगुने आकार के होंगे। – भूमिगत लाइन बिछाने के लिए सतह भी समतल होनी चाहिए, रूडीप ने होदियां बनाते समय इसका ध्यान नहीं रखा।
-तकनीकी जानकारों के अनुसार विद्युत लाइन ऊपर-नीचे होकर नहीं बिछाई जा सकती।

फैक्ट फाइल –

  • 860 वर्ष से अधिक पुराना है ऐतिहासिक सोनार दुर्ग
    -450 परिवार निवास करते हैं सोनार किले में
    -8 लाख से ज्यादा सैलानी आते हैं हर साल घूमने
    -2 वार्ड में बंटा हुआ है जैसलमेर शहर का सोनार किला
    खतरे की भी आशंका
    सोनार किले में विद्युत लाइनों के पास ही जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन भी बिछाई गई है। ऐसे में थोड़ी-सी गड़बड़ी होने के चलते पानी-बिजली के सम्पर्क में आने से पूरे क्षेत्र में करंट प्रवाहित होने के खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • सौन्दर्य पर भी दाग
    ऐतिहासिक सोनार दुर्ग के दशहरा चौक से लेकर दुर्ग के भीतरी भागों में बिजली और टेलीफोन की तारें झूलती नजर आती है। ऐसे में सैलानी दर्शनीय इमारतों को निहार नहीं पाते, साथ ही उन्हें फोटोग्राफी में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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