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जैसलमेर

बाबा के दर शासन-प्रशासन, गुरु के दरबार पर अव्यवस्थाओं का हाल

भगवान श्रीकृष्ण के कलयुगी अवतार माने जाने वाले लोकदेवता बाबा रामदेव का मेला आगामी भादवा माह में आयोजित होगा। इसमें केवल दो माह का समय शेष रहा है, लेकिन श्रद्धालुओं की आवक एक माह बाद श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में शुरू हो जाएगी।

जैसलमेरJul 06, 2024 / 07:57 pm

Deepak Vyas

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भगवान श्रीकृष्ण के कलयुगी अवतार माने जाने वाले लोकदेवता बाबा रामदेव का मेला आगामी भादवा माह में आयोजित होगा। इसमें केवल दो माह का समय शेष रहा है, लेकिन श्रद्धालुओं की आवक एक माह बाद श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में शुरू हो जाएगी। रामदेवरा जाने वाले अधिकांश श्रद्धालु पोकरण में बाबा रामदेव के इतिहास से जुड़े स्थलों का भी भ्रमण व दर्शन करते है, लेकिन यहां इन मेलार्थियों के लिए कोई विशेष व्यवस्थाएं नहीं होने के कारण उन्हें कई परेशानियों से रु-ब-रु होना पड़ता है। जानकारी के अनुसार रामदेवरा गांव में बाबा रामदेव की समाधि स्थित है। यहां भादवा माह में 10 दिनों तक मेला आयोजित होता है, जबकि श्रद्धालुओं की आवक श्रावण माह में शुरू हो जाती है। करीब डेढ़ माह की अवधि में 40 से 50 लाख श्रद्धालु बाबा की समाधि के दर्शनों के लिए रामदेवरा पहुंचते है। इनमें से 60 से 70 प्रतिशत श्रद्धालु पोकरण आकर बाबा रामदेव के इतिहास से जुड़े उनके गुरु बालीनाथ महाराज के आश्रम के दर्शन करते है। इसके साथ ही ऐतिहासिक फोर्ट, रामदेवसर व सालमसागर तालाब का भ्रमण करते है। मेले के दौरान रामदेवरा में प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं चाक चौबंद करने के लिए प्रयास किए जाते है। इसके अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों, संभागभर से पुलिसकर्मियों, आरएसी के जवानों आदि की ड्यूटी लगाई जाती है। जबकि पोकरण में कोई विशेष इंतजाम नहीं होते है। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी होती है।

गुरु के आश्रम का धार्मिक महत्व

बालीनाथ महाराज लोकदेवता बाबा रामदेव के गुरु थे, जिनका आश्रम पोकरण कस्बे में रामदेवसर व सालमसागर तालाब के पास स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी आश्रम में बाबा रामदेव की भैरव राक्षस से भेंट हुई थी और बाबा रामदेव ने कस्बे से पांच किलोमीटर दूर स्थित पहाड़ी पर एक गुफा में भैरव राक्षस को बंद कर गुफा को बड़ी शिला से बंद कर दिया। ऐसे में गुरु बालीनाथ महाराज का आश्रम बाबा के इतिहास से जुड़ा होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केन्द्र है। रामदेवरा आने वाले अधिकांश श्रद्धालु पोकरण आकर बालीनाथ आश्रम में स्थित उनके आश्रम के दर्शन करने के बाद ही अपनी यात्रा को पूर्ण समझते है।

परेशान हो रहे श्रद्धालु

  • श्रावण व भादवा माह के दौरान पोकरण में भी 15 से 20 लाख श्रद्धालु पहुंचते है।
  • मेलावधि के दौरान पोकरण में भी श्रद्धालुओं की चहल पहल रहती है। साथ ही मुख्य मार्गों पर भीड़ देखी जा सकती है।
  • रामदेवरा में पुलिस का अतिरिक्त इंतजाम रहता है और दो हजार से अधिक पुलिसकर्मी लगाए जाते है। आरएसी व अन्य सुरक्षा प्रबंध किए जाते है।
  • पोकरण में स्थानीय थाने के अलावा 40-50 पुलिसकर्मी व आरएसी की एक बटालियन लगाई जाती है, जो नाकाफी होती है।
  • सफाई व्यवस्था को लेकर रामदेवरा में अलग से निविदा की जाती है, लेकिन पोकरण में नगरपालिका के भरोसे ही सफाई का जिम्मा रहता है। जिससे हर बार व्यवस्थाएं बिगड़ती है।
  • बालीनाथ महाराज के आश्रम के आसपास कुछ शामियाने लगा दिए जाते है, जो श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए नाकाफी है।
  • इसके अलावा पानी, रोशनी, आश्रम के आसपास श्रद्धालुओं के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं की जाती है।
  • विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते यातायात व्यवस्था बिगड़ जाती है। स्थानीय यातायात पुलिसकर्मियों के लिए इतनी भीड़ में व्यवस्था को संभाल पाना चुनौती बन जाता है।
  • रामदेवरा में ग्राम पंचायत की ओर से पार्किंग की व्यवस्था की जाती है। उसी तर्ज पर पोकरण में नगरपालिका पार्किंग की व्यवस्था करे तो आय बढ़ेगी।
    चार दिन उमड़ता है मेलार्थियों का हुजूम
    भादवा माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को जोधपुर से पदयात्री संघों की आवक शुरू हो जाती है। अलग-अलग संघों के सैकड़ों पदयात्रियों का चार दिन तक यहां रेला लगता है। ये श्रद्धालु जोधपुर रोड, राउमावि मैदान, उपखंड अधिकारी कार्यालय के आगे, अंबेडकर सर्किल, रेलवे स्टेशन रोड, रामदेवरा रोड आदि जगहों पर डेरा डालते है। इस दौरान सफाई व्यवस्था के साथ ही सुरक्षा को लेकर भी बेहतर इंतजाम करने की जरुरत रहती है।
    फैक्ट फाइल:-
  • 10 दिनों तक चलता है मेला
  • 20 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचते है पोकरण
  • 3 दिन तक जोधपुर के पदयात्री संघ का रहता है पड़ाव

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