JAISALMER NEWS-भाजपा में शामिल होने की अटकलों के बीच विधायक हनुमान ने मीणा को लेकर दिया यह बड़ा बयान बन गया....

भाजपा व कांग्रेस के नेता संपर्क में, चुनाव से पहले आएंगे : बेनीवाल

By: jitendra changani

Published: 01 Apr 2018, 10:37 PM IST

डॉ. मीणा के जाने से तीसरे मोर्चे पर असर नही, काला कानून वापस लेना पत्रिका व प्रदेश की जीत
पोकरण (जैसलमेर) . खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल रविवार को एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने पोकरण पहुंचे। इस दौरान पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर मोर्चे पर विफल है। आमजन में सरकार के प्रति असंतोष है तथा आने वाले चुनाव में बुरी तरह परास्त होगी। सरकार ने बजट में किसानों के 50 हजार रुपए तक ऋण माफी की घोषणा की, यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। सरकार अब साढे चार वर्ष बाद घोषणाएं कर आमजन को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में तीसरे मोर्चे की प्रबल संभावनाएं हैं। भाजपा व कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेता उनसे संपर्क में है। चुनाव से पूर्व ये उनके साथ जुड़ेंगे।
जयपुर में होगी विशाल रैली
उन्होंने कहा कि पूर्व में बाड़मेर, बीकानेर सहित तीन किसान हुंकार रैलियां हुई है। शीघ्र ही सीकर में चौथी तथा पांचवी व अंतिम बड़ी रैली जयपुर में होगी। इसमें 15 लाख लोग विधानसभा का घेराव करेंगे। इसके माध्यम से टोलमुक्त राजस्थान, किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी, 4 लाख खाली पदों पर भर्ती, किसानों को पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना की तर्ज पर मुफ्त बिजली, स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करवाने, बेरोजगारों को 10 हजार रुपए भत्ता दिलाने, राजस्थान में मजबूत लोकायुक्त सहित सरकार से मांग की जाएगी।

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IMAGE CREDIT: patrika

डॉ.मीणा के जाने से असर नहीं
उन्होंने कहा कि साढ़े चार वर्षों तक डॉ. किरोड़ीलाल मीणा, घनश्याम तिवाड़ी व उन्होंने शोषितों के लिए आवाज उठाई, लेकिन डॉ. मीणा उन्हें छोडकऱ भाजपा में शामिल हो गए। यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है। इससे तीसरे मोर्चे को कोई असर नहीं पड़ेगा। कांग्रेस व भाजपा के कई नेता उनसे संपर्क में है। चुनाव से पूर्व तीसरे मोर्चे का गठन किया जाएगा।
काला कानून खत्म करना प्रदेश व पत्रिका की जीत
राज्य सरकार की ओर से गत वर्ष लाया गया काला कानून जनविरोध व राजस्थान पत्रिका की मुहिम के बाद खत्म किया गया। यह आम जन व पत्रिका की जीत है। जिस तरह से पत्रिका ने जनहित के मुद्दे को उठाया तथा विधानसभा में विरोधी दल के विधायकों ने जनता की आवाज बनकर विरोध किया, उसी की बदोलत सरकार को आखिर काला कानून खत्म करना पड़ा।
एक व्यक्ति नहीं मिले दोहरा लाभ
उन्होंने 10 विधायकों को संसदीय सचिव के पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि एक व्यक्ति को दोहरा लाभ नहीं मिल सकता। आखिर सरकार को उन्हें पदों से हटाना होगा।
दलितों के हितों की होनी चाहिए रक्षा
उन्होंने सोमवार को दलित संगठनों की ओर से भारत बंद के आह्वान का समर्थन करते हुए कहा कि शोषित वर्ग के लोगों के साथ अन्याय नहीं हो, इसलिए कानूनी ताकत दी गई थी। उस ताकत को कमजोर नहीं करने व बहाल करने के लिए केन्द्र सरकार को सुप्रीम कॉर्ट मे पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए। यदि न्यायालय उसके बाद भी न माने तो इसके लिए अध्यादेश लाकर दलितों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।

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jitendra changani Desk/Reporting
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