JAISALMER NEWS- रेगिस्तानी टीलों के सन्नाटे में मिले 17 दुर्लभ चिंकारा के कंकाल, फिर हुआ कुछ ऐसा..

jitendra changani

Publish: Jun, 14 2018 11:23:15 AM (IST)

Jaisalmer, Rajasthan, India
JAISALMER NEWS- रेगिस्तानी टीलों के सन्नाटे में मिले 17 दुर्लभ चिंकारा के कंकाल, फिर हुआ कुछ ऐसा..

सत्रह हरिणों के मिले कंकाल, फैली सनसनी, दो-तीन दिन पुराने हैं भादरिया क्षेत्र में मिले कंकाल

 

पोकरण/लाठी. क्षेत्र के भादरिया गांव में बुधवार को 17 हरिणों के कंकाल मिलने से ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में सनसनी फैल गई। वन विभाग की टीम ने पोस्टमार्टम के बाद शवों को दफनाया तथा मामले की जांच शुरू की। गौरतलब है कि लाठी, भादरिया, खेतोलाई, धोलिया आदि हरिण बाहुल्य क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में हरिण स्वच्छंद विचरण करते हैं। आए दिन श्वानों के हमले, वाहन की चपेट में आने, किसी खेत की तारबंदी पार करते समय उसमें उलझ जाने अथवा भीषण गर्मी के मौसम में पानी नहीं मिलने से उनकी मौत हो जाती है। बुधवार को भी भादरिया गांव के पास 17 हरिणों के कंकाल मिले।
पोस्टमार्टम के बाद दफनाया
भादरिया गांव में जगदम्बा सेवा समिति गोशाला की तारबंदी के पास बुधवार को सुबह बड़ी संख्या में हरिणों के कंकाल मिलने की जानकारी मिली। चिंकारा हरिणों के शव मिलने की अफवाह आसपास क्षेत्र में जंगल में आग की तरह फैल गई। जिससे यहां लोगों की भीड़ लग गई। सुबह 11 बजे बाद सूचना मिलने पर वन विभाग के सहायक उपवन संरक्षक ब्रजमोहन गुप्ता, क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रकाशसिंह जुगतावत, वनपाल कानसिंह, वन्यजीवप्रेमी राधेश्याम पेमाणी मौके पर पहुंचे। उन्होंने यहां हरिणों के शवों व कंकालों को एकत्रित किया। यहां 17 हरिणों के कंकाल मिले। जिनका पोस्टमार्टम करवाकर उन्हें दफनाया गया। वन विभाग की टीम ने मामले की जांच शुरू की है।

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की जा रही है जांच
भादरिया गांव के पास हरिणों के कंकाल होने की सूचना मिली थी। सर्च अभियान चलाने पर 17 हरिणों के कंकाल मिले है। जिनका पोस्टमार्टम करवाया गया। मामले की जांच की जा रही है।
- ब्रजमोहन गुप्ता, सहायक उपवन संरक्षक वन विभाग, पोकरण
दो से तीन दिन पुराने हैं कंकाल
हरिणों के कंकालों का पोस्टमार्टम किया गया है। कंकाल दो से तीन दिन पुराने है। हरिणों के मौत का कारण प्यास, श्वानों के शिकार व तारबंदी में उलझने का होना पाया गया है।
- डॉ.रामजीलाल, पशु चिकित्साधिकारी पशु चिकित्सालय, लाठी
सुरक्षा के किए जाए उपाय
क्षेत्र में आए दिन वन्यजीवों की मौत हो रही है। जबकि वन विभाग की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वन विभाग को वन्यजीवों व हरिणों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध करने चाहिए।
- राधेश्याम पेमाणी, तहसील संयोजक अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्रोई सभा, पोकरण।

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