Jaisalmer- ब्ल्यू व्हेल आत्मघाती चैलेंज से बचें, प्राण अनमोल हैं

विधिक साक्षरता शिविर आयोजित

By: jitendra changani

Published: 18 Sep 2017, 11:12 PM IST

जैसलमेर . जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष, जिला एवं सेशन न्यायाधीश मदनलाल भाटी की अध्यक्षता में सोमवार को अमर शहीद सागरमल गोपा विद्यालय के प्रार्थनासभा प्रांगण में ब्ल्यू व्हेल चैलेंज आत्मघाती गेम से समाज एवं किशोरों को बचाने की मुहिम के तहत विधिक साक्षरता शिविर आयोजित हुआ। शिविर की अध्यक्षता करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश मदन लाल भाटी ने कहा कि मनुष्य जीवन ईश्वरीय प्रदत अनमोल तोहफा है। हमें इसकी कद्र करनी चाहिए न कि किसी बेतुके ब्ल्यू व्हेल चैलेंंज्स जैसे लिंक/व्यसनों से ग्रसित होकर इसे बर्बाद नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्र का भविष्य हैं तथा उनके माता-पिता की अनेक भावनाओं तथा भावी जरूरतें उनसे जुड़ी हैं। इस जिम्मेदारी का अहसास रखते हुए उन्हें अपने जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए। शिविर में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश महेश कुमार शर्मा ने कहा कि छात्रों को मोबाइल जैसे साधनों को उपयोग करते हुए ज्यादा समझ से काम लेना होगा और यह जानना होगा कि ये कोई खिलौने नहीं है। मोबाइल अपने आप चलने वाली युक्ति नहीं है इसे हम जैसा चलाते हैं ये हमें उसी दिशा में ले जाता है। सही दिशा एवं सही उपयोग में लाने पर ये हमारा विकास करता है अन्यथा इसके द्वारा ब्ल्यू व्हेल चैलेंजस जैसे लिंकों से जीवन का विनाश भी हो रहा है। 

पूर्णकालिक सचिव डॉ. महेन्द्र कुमार गोयल ने विद्यार्थियों को रेयान पब्लिक स्कूल में हुए हादसे से सबक लेते हुए स्कूल से सीधे घर एवं घर से सीधे स्कूल पहुंचने की अपील की तथा हिदायत दी कि वे अनजान व्यक्तियों से बचें तथा स्कूल प्रशासन से ज्यादा जिम्मेदारी के साथ विद्यार्थियों की स्कूल में सुरक्षा पर ध्यान देने एवं उचित प्रबंध करने की बात कही। शिविर में ब्ल्यूव्हेल चेलेंज एवं इसके खतरों के बारे में जानकारी देते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण चौहान ने बताया कि हाल ही की खबरों में कलकत्ता एवं जोधपुर में ब्ल्यूव्हेल के कारण बच्चों के आत्महत्या के प्रयास करने की बातें सामने आई हैं। इस गेम के लिंक आपको किसी भी तरह से इंटरनेट के माध्यम से मिलता है तथा एक बार यदि गेम में आते हैं तो गेम ऑपरेटर की धमकियों से धीरे-धीरे मानसिकता ऐसी कर दी जाती है कि व्यक्ति आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाता है क्यों कि अंत में व्यक्ति को उसके परिवार को मार देने तक की धमकियां दी जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालयी छात्रों की जिम्मेदारी इस कारण से और ज्यादा बढ़ जाती है। विद्यालय के प्राचार्य नवल किशोर ने न्यायिक अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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jitendra changani Desk/Reporting
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