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जैसलमेर

रामदेवरा में गली हो या सड़क- जहां तक नजर, वहां तक वाहनों का जमघट

रामदेवरा क्षेत्र के रामदेवरा गांव में पार्किंग की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण शुक्ल पक्ष के महीने में आने वाले हजारों यात्रियों को वाहनों के जाम के बीच सडक़ों से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

जैसलमेरJul 07, 2024 / 08:26 pm

Deepak Vyas

ramdevra
रामदेवरा क्षेत्र के रामदेवरा गांव में पार्किंग की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण शुक्ल पक्ष के महीने में आने वाले हजारों यात्रियों को वाहनों के जाम के बीच सडक़ों से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। बात अगर भादवा मेले की जाए तो इस दौरान पार्किंग की व्यवस्था होने के बाद भी वाहनों के कस्बे में आने और सडक़ों पर जाम की अव्यवस्था पर लगाम नहीं लगता है। जिम्मेदार सब कुछ जानते हुए भी निष्क्रिय रहते है।
लोक देवता बाबा रामदेव के भादवा महीने के मेले में ग्राम पंचायत के माध्यम से वाहन पार्किंग का टेंडर दिया जाता है। वाहन पार्किंग के टेंडर देने के दौरान कई नियमों को बताया जाता है। हकीकत में वाहन पार्किंग का टेंडर होने के बाद नियमों की पालना करवाने वाले ही मौन हो जाते हैं। जिसके चलते यात्रियों को पूरे मेले में पग पग पर परेशानियो से रूबरू होना पड़ता है।

मेले में भी आम सडक़ें रहती हैं अवरुद्ध

मुख्य बाजार से भी ज्यादा वाहनों का जमावड़ा पिछले कुछ सालों में बालीनाथ प्रवेश द्वार से होते हुए माली धर्मशाला आने वाली सडक़ और उससे आगे पर रहता है। यहां शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा और दितीया को सडक़ के दोनों तरफ वाहनों का लंबा जाम लग जाता है। इस रूट पर वाहनों के प्रवेश पर कोई रोक टोक नही होने से छोटे बड़े सभी वाहन बेधडक़ गांव में आते जाते हैं।
हकीकत यह भी है कि इन वाहनों में अधिकांश वाहनों में काले शीशे होने के बावजूद उन्हें रामदेवरा में कोई रोकता नहीं है। इन वाहनों के आगे पीछे जहा भी शीशे लगे होते है ंउन पर काली फिल्म लगी होने के कारण वाहन में कितने आदमी बैठे है। कोई देख नही पाता है। इस तरह के अधिकांश वाहन पूरे सालभर भारी संख्या में रामदेवरा में बेधडक़ आते और जाते हैं। कार्यवाही के अभाव में ऐसे वाहन दूसरो प्रदेश से बेखौफ यहां आते और जाते हैं।

मेले में काली फिल्म चढ़े वाहन है खतरा :

बाबा रामदेव मेले में वाहनों के शीशो पर चढ़ी काली फिल्म के कारण वाहन के अंदर बैठे लोगो की क्या गतिविधियां है। कोई पता नही चलता है। ऐसे वाहनों में आए लोग कभी भी मेले में कोई बड़ी संदिग्ध घटना को अंजाम देकर आराम से जा सकते हैं। आम दिनो में भी वाहनों के शीशों से काली फिल्म हटाने के जिम्मेदारों के दावे ही रहते है। हकीकत सबसे जुदा रहने से ऐसे वाहन चालकों के हौसले काफी बुलंद हैं।

बाजार के भी हाल बेहाल

रामदेवरा गांव के मुख्य बाजार में शुक्ल पक्ष के महीने में देशभर से आने वाले हजारों श्रद्धालु अपने वाहन पार्किंग की कोई जगह निर्धारित नही होने से सडक़ो के किनारे अस्त व्यस्त खड़े कर देते हैं। जिसके कारण यहां यातायात व्यवस्था बिगड़ जाती है। गांव में सुबह के समय जहां भी खाली जगह मिलती है, श्रद्धालु अपने वाहन वहीं खड़ा कर देते है। जिसके कारण गांव की मुख्य सडक़ों और गलियों में वाहनों की भीड़ लगी रहती है। सडक़ों के दोनों तरफ वाहनों के खड़े हो जाने से राहगीरों व अन्य वाहन चालकों का यहां से गुजरना दुश्वार हो जाता है। मुख्य मार्गों व गलियों के साथ ही यही समस्या गांव के मुख्य बाजार की है। यहां दुकानों के आगे वाहन पार्क कर दिए जाते हैं। जिसके कारण आमजन को परेशानी होती है।
सरकारी पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण आए दिन यातायात व्यवस्था बिगड़ जाती है। जिसके चलते मुख्य मार्गों पर जाम लग जाता है और आमजन को परेशानी होती है। जबकि जिम्मेदारों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
रामदेवरा की पर्चा बावड़ी के पास, चाचा चौक,मेला चौक,
आदि जगहों पर वाहनों का भारी जमावड़ा रहता है। इसके साथ ही एसबीआई बैंक के पास सडक़ पर,आरसीपी रोड टीन शेड के नीचे,नाचना रोड वाहनों की कतार अन्य पैदल चलने वालो को परेशान कर देती है।

फैक्ट फाइल

5 किमी में फैला रहता है रामदेवरा मेला
40 से 50 यात्रियों का होता है मेले में आगमन

10 से 20 लाख विभिन्न वाहन आते हैं मेले में

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