Jaisalmer video- सावधान खुल रहा विनाश का मुंह - अब अभेद्य नहीं रहा सुरक्षा चक्र

jitendra changani

Publish: Sep, 16 2017 01:04:27 (IST) | Updated: Sep, 16 2017 03:52:27 (IST)

Jaisalmer, Rajasthan, India
Jaisalmer video- सावधान खुल रहा विनाश का मुंह - अब अभेद्य नहीं रहा सुरक्षा चक्र

- टूट रहा धरती का सुरक्षा चक्र, कैसे बचेगा

जैसलमेर. धरती का सुरक्षा चक्र अब अभैद्य नहीं रहा। सूर्य से आने वाली हानिकारक किरणों से हमारा बचाव करने वाली ओजोन परत कमजोर हो रही है। इससे पृथ्वी को सुरक्षित चक्र में संभालने वाली ओजोन परत में हुआ छेद पृथ्वी पर जीवन को तबाह कर सकता है। हम धरती के साथ अपनी नई पीढ़ी को जन्म से पहले ही हमेशा के लिए मौत की आगोश में ले जा रहे है। विशेषज्ञों की माने तो ओजोन परत में बना छेद पृथ्वी व इनके जीवन के लिए सबसे बड़ा अभिशाप बन रहा है, लेकिन फिर भी हम विनाश के इस मुंह रुप ओजान के छिद्र को बंद करने की बजाए बड़ा बना रहे है। उनके अनुसार वर्तमान में आधुनिक सुविधाएं जुटाने व अपने आपको शक्तिशाली राष्ट्र बनाने की होड़ में किए जा रहे परीक्षण, घरों में, शरीर पर महक बिखेरने के लिए किया जा रहा स्प्रे, बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुंआ व अपशिष्ट यहां के जीवन के लिए बड़ा खतरा बन गया है, लेकिन फिर भी हम बिना किसी परवाह के आधुनिकता की अंधी दौड़ में आने वाली पीढ़ी को दुनिया देखने से वंचित करने का खेल खेलने बाज नहीं आ रहे।
32 साल पहले छेद की हुई पहचान
जानकारों की माने तो 32 साल पहले ओजोन परत में छेद होने की पहचान जर्मनी के दो वैज्ञानिको ने किया था। इसके बाद 16 सितंबर 1987 को विश्वभर के विशेषज्ञों का सम्मेलन आयोजित कर ओजात परत में हुए छेद से पृथ्वी की सेहत पर हो रहे नुकसान को लेकर भी बड़े स्तर पर चर्चा कर ओजान की सुरक्षा के लिए प्रतिवर्ष ओजान सुरक्षा दिवस मनाने का निर्णय किया गया, लेकिन ओजान सुरक्षा दिवस के तीस साल बाद भी सुरक्षा के कोई ठोस उपाय नहीं हो पाए।
क्या है ओजोन परत?
ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत है जिसमे ओजोन गैस की सघनता अपेक्षाकृत अधिक होती है। विशेषज्ञ इसकी पहचान संकेतो के माध्यम से करते है। यह परत पृथ्वी के जीवन के लिए हानिकारक सूर्य के उच्च आवृत्ति के पराबैंगनी प्रकाश की 93-99 त्न मात्रा अवशोषित कर लेती है। इसके अलावा पृथ्वी के वायुमंडल का 91 त्न से अधिक ओजोन इसी परत के ईर्द-गिद्र्ध रहता है। ओजान परत पृथ्वी की सतह के ऊपर करीब 10 किमी से 50 किमी की दूरी तक रहती है, जो सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है।
1913 में हुई थी खोज
ओजोन की परत की खोज 1913 में फ्रांस के भौतिकविदों फैबरी चाल्र्स और हेनरी बुसोन ने की थी।
ऐसे हो रहा ओजोन को नुकसान
विशेषज्ञों की माने तो पृथ्वी पर जिस गति से ओजोन का क्षय हो रहा है, वह यहां के जीवन के लिए बड़ा खतरा बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में कईं देशों में ओजोन 10 से 20 प्रतिशत तक कम हुई है। जिससे यहां का जीवन चक्र प्रभावित हुआ है। जानकारों की माने तो आजोन परत के क्षय होने का सबसे बडा कारण मानवीय क्रियाएं है। अज्ञानता के चलते हमने कुछ ऐसी गैसों की मात्रा को बढ़ा दिया है, जो ओजोन परत को नष्ट कर रही है। वैज्ञानिको की माने तो क्लोरो, फ्लोरो, कार्बन जैसी गैसें ओजोन परत का विघटन कर रही है।

ऐसी, फ्रिज, स्प्रे, रंग व प्लास्टिक से शुद्धता को पहुंच रहे नुकसान
प्राकृतिक वस्तुओं के उपयोग की सलाह
जैसलमेर. हम अपनी सुख सुविधा के लिए जिन वस्तुओं का उपयोग कर रहे है, यही वस्तुए ना केवल हमारे आस-पास के वातावरण को दूषित कर रही है, बल्कि हमारे जीवन चक्र को भी प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान युग में घरों में रेफ्रिजरेटर, एयर कंडिशनर व प्लास्टिक का उपयोग बढ़ा है, जो पृथ्वी के आभा मंडल में नुकसानदेह रसायन, गैसों की मात्रा को बढ़ा रही है, जबकि ऑक्सीजन को कम कर रही है। जिससे मानवीय स्वास्थ्य चक्र के साथ अन्य जीव जन्तुओं को अधिक नुकसान पहुंच रहा है।
करें प्राकृतिक जीवन का वरण
विशेषज्ञ धरती से कम हो रही ओजोन गैस को बढ़ाने के लिए आमजन को प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करने, रसायनिक गैस को बढ़ावा देने वाली वस्तुओं एसी, फ्रिज का उपयोग बंद करने की सलाह दे रहे है। उनके अनुसार घरों में लगाए गए फ्रिज, ऐसी से निकलने वाले गैस आस-पास के शुद्ध वातावरण के लिए नुकसानदेह है। इनका अधिक उपयोग करने या इनके संपर्क में रही वस्तुओं का उपयोग करने से व्यक्ति खतरनाक बीमारियों की चपेट में आ सकता है। इसके अलावा प्लास्टिक की वस्तुओं व फोम से बनी वस्तुएं भी प्रकृति की सेहत को नुकसान पहुंचा रही है। उनके अनुसार इलेक्ट्रिक उद्योगों में एयरकंडिशनर में प्रयुक्त गैस फ्रियान11 व फ्रियान-12 भी ओजान के लिए नुकसानदायक है। विशेषज्ञों के अनुसार इन गैसों का एक अणु ओजान के लाखों अणुओ को नष्ट करने में सक्षम है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि हम जिन वस्तुओं को सुविधाजनक मान रहे है, वह हमारे जीवन के साथ इस धरती के जीवन के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
यह आ रहे दुष्प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार ओजान परत के क्षय होने के दुष्प्रभाव धरती और यहां के जीवन को विनाश की ओर ले जाने वाले है। उनके अनुसार ओजोन परत के बढ़ते क्षय से सूर्य की हानिकारक किरणें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकती है। यह किरणे बैहद गरम होने से इसके संपर्क से पेड़, पौधों के साथ जीव, जन्तुओं को नुकसान पहुंच रहा है। अभी के हालात यह है कि ओजोन परत में हुए छेद से कईं जीव-जन्तुओं की प्रजातियां लुप्त हो गई है, तो कईं लुप्त होने की कगार पर है।
जीवन के लिए यह दुष्प्रभाव
जानकारों के अनुसार हानिकारक पराबैंगनी किरणों के वायुमंडल में प्रवेश करने से मानव शरीर में इन किरणों के प्रभाव से त्वचा का केंसर, श्वशन रोग, अल्सर व मोतियाबिन्द जैसी घातक बीमारिया हो सकती है। इसके अलावा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी विपरित असर पड़ रहा है। विशेषज्ञ ओजोन के क्षय होने से आने वाले समय में त्वचा कैंसर की बीमारी बढऩे की आशंका जता रही है।

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