Jaisalmer Patrika campaign- सोनार दुर्ग बेशकीमती रतन है, हमें संभालकर रखना होगा

By: jitendra changani

Published: 18 Sep 2017, 09:38 PM IST

Jaisalmer, Rajasthan, India

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सर्वांगीण प्रयासों से संवरेगा जैसलमेर के सोनार दुर्ग का भविष्य

जैसलमेर पत्रिका . जैसलमेर का सोनार दुर्ग कोई सामान्य ऐतिहासिक स्मारक नहीं है बल्कि यह तो बेशकीमती रतन के समान है। जिसकी संभाल यहां के बाशिंदों को पूरे मनोयोग से करनी होगी। ‘राजस्थान पत्रिका’ की ओर से चलाए जा रहे अभियान ‘सोनार को बचाना है’ के चलते ‘आम’ से ‘खास’ लोगों के बीच इस साढ़े आठ सौ वर्ष से भी प्राचीन नायाब रहवासी दुर्ग की धरोहर को सहेजने को लेकर गंभीर विमर्श का दौर शुरू हो गया है। पत्रिका ने आजादी के सात दशकों के दौरान सोनार दुर्ग के संबंध में हुए परिवर्तनों के गवाह पूर्व विधायक गोवद्र्धन कल्ला और दुर्ग में राजमहलों से लेकर अन्य कई सम्पत्तियों का मालिकाना हक रखने वाले पूर्व राजघराने के सदस्यों रासेश्वरी राज्यलक्ष्मी और चैतन्यराजसिंह से विशेष बातचीत की। उन्होंने दुर्ग के उज्ज्वल भविष्य के लिए मौलिक चिंतन पेयर किया।

जर्रे-जर्रे में समाए इतिहास का हो जीवंत प्रदर्शन
पूर्व विधायक कल्ला के शब्दों में, सोनार किले का जर्रा-जर्रा गौरवशाली इतिहास को अपने भीतर समाए हुए हैं। आवश्यकता है, उसका जीवंत प्रदर्शन सैलानियों के सामने करने की। उन्होंने कहा कि, दुर्ग की अखे प्रोल के खुले चौक, प्रथम निर्मित गणेश प्रोल, दचौक, राजमहलों, जैन मंदिरों, लक्ष्मीनाथ व रत्नेष्वर महादेव मंदिर आदि का अपना इतिहास है। उन पर लाइट एंड साउंड सिस्टम से प्रकाश डाला जाना चाहिए। साथ ही यहां सर्वोच्च बलिदान देने वाले नर-नारियों की गौरव गाथा को उभारने की दिशा में सरकार व प्रषासन तथा दुर्ग हित में चिंतन करने वाले लोगों को साझा प्रयास करने की दरकार है। वयोवृद्धकल्ला का साफ तौर पर मानना है कि, सोनार दुर्ग में सदियों पहले पूरा शहर सांस लेता था। हमें उस दौर को आज की पीढ़ी के सामने प्रभावशाली तरीके से रखना चाहिए। इससे उन्हें इस दुर्ग की महत्ता का भली भांति भान हो सके।

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बुजुर्गों का अनुभव और युवाओं के जोश से बनेगा बेहतरीन दुर्ग
पूर्व राजपरिवार की सदस्या रासेश्वरी राज्यलक्ष्मी का मानना है कि, बुजुर्गों के मार्गदर्शन में जोश से लबरेज युवा सोनार दुर्ग को दुनिया का सबसे बेहतरीन किला बना सकते हैं। स्वयं महिला होने के नाते रासेश्वरी राज्यलक्ष्मी दुर्ग में निवास करने वाली महिलाओं की सक्रिय भागीदारी चाहती हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों के साथ दुर्ग के प्रबुद्धनिवासियों व पूर्व राजघराना के सदस्यों को साथ मिलाकर एक कमेटी बनानी चाहिए, जिसके पास दुर्ग क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों के संबंध में निर्णय लेने की शक्ति हो। व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करने वालों से अलग से टैक्स लिया जाकर दुर्ग कल्याण के लिए कोश बनाया जा सकता है। दुर्ग में बीते वर्षों के दौरान व्यावसायिक तकाजों के कारण मौलिक स्वरूप से हुई छेड़छाड़ पर दु:ख जताते हुए राज्यलक्ष्मी ने मर्यादित व्यवहार पर जोर दिया। उन्होंने दुर्ग में स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के साथ मूलभूत सुविधाओं को और सुचारू बनाने की आवश्यकता जताई।

जवाबदेहिता तय की जाए
सोनार दुर्ग के विकास के लिए सरकार अथवा किसी भी एजेंसी की ओर से खर्च किए जाने वाले पैसों का सदुपयोग सुनिश्चित होना चाहिए और काम करवाने वाली एजेंसी दुर्ग के बाशिंदों के प्रति जवाबदेह बने। यह राय पूर्व राजघराने के सदस्य चैतन्यराजसिंह ने प्रकट की। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में किले पर साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। यह पैसा इस तरह से खर्च हो कि, उसका लाभ दुर्ग तथा यहां के बाशिंदों को सही मायनों में मिले। युवा चैतन्यराजसिंह किले के लिए लिफ्ट लगाने के पक्ष में हैं ताकि वाहनों की आवाजाही की नौबत ही नहीं आए। साथ ही उन्होंने सोलर पैनल लगाने की वकालत की। इससे बिजली के तारों के जंजाल से भी मुक्ति मिल सकेगी। उनके अनुसार लोगों को जोडकऱ ही किले का वास्तविक विकास हो सकता है।

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