JAISALMER NEWS- वीरान रेत का समंदर बन गया सुकून का बंदरगाह, यहां अब गूंज रही चहचहाट

JAISALMER NEWS- वीरान रेत का समंदर बन गया सुकून का बंदरगाह, यहां अब गूंज रही चहचहाट

Jitendra Kumar Changani | Publish: May, 17 2018 07:19:14 PM (IST) Jaisalmer, Rajasthan, India

-पैदल वाहिनी के नौजवानों ने विपरित परिस्थितियों में रेगिस्तान को बना दिया हराभरा

जैसलमेर. सदियों तक विरानी का अभिशाप झेल रहा जैसलमेर के रेतिला समंदर नहरी पानी और पर्यावरण संरक्षण में जुटी 128वीं पैदल वाहिनी के जवानों ने रेत के समंदर को भरा-भरा बनाकर यहां पक्षियों की कलरव को गूंजायमान कर दिया। कुछ दशक पहले इस क्षेत्र में जहां दूर-दूर तक रेत के टीलों के अलावा कुछ भी नहीं था, लेकिन विगत कुछ सालों में पर्यावरण संरक्षण के लिए गठित 128वीं पैदल वाहिनी के जवानों ने तपते रेगिस्तान में 1.61 करोड़ पौधे लगाकर रेत के विरान रेगिस्तान में हरा-भरा बन्दरगाह बना दिया। जिससे अब सुकून और उल्लास का माहौल बन गया है। पेड़ों की झुरमुट में पक्षियों की कलरव ने यहां के विराने को तोड़ दिया है और अब यहां सौन्दर्यकरण से उल्लास का माहौल है।

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IMAGE CREDIT: patrika

रेगिस्तान में लगाए 1.61 करोड़ पौधे
- वर्ष 2018-19 में लगाएंगे 2.40 लाख पौधे
- पर्यावरण संरक्षण के लिए मिले राष्ट्रीय स्तर के अवार्ड
मोहनगढ़ . पर्यावरण संरक्षण को लेकर 128वीं पैदल वाहिनी (प्रा.से.) पर्यावरण राज रिफ ने मोहनगढ़ क्षेत्र के रेतीले धोरों पर हरियाली बिछा दी। जहां कभी पेड़ देखने को नहीं मिल रहा था, वहां करोड़ों पेड़-पौधे लगा दिए। बटालियन के जवानों ने हर परिस्थिति में इन पौधों की देखभाल की इसीके चलते वर्तमान में मोहनगढ़ के रेतीले धोरों पर हरियाली देखने को मिल रही है। बटालियन की ओर से अब तक 17809 हैक्टेयर भूमि पर 1 करोड़ 60 लाख 71 हजार पौधों का रोपण किया जा चुका है। इसके लिए 128वीं पैदल वाहिनी (प्रा.से.) पर्यावरण राज रिफ को जिला स्तरीय, राज्य स्तरीय तथा राष्ट्रीय स्तर के 14 पुरस्कार प्रदान मिल चुके हंै।
1997 से शुरू हुआ बटालियन का कार्य
बटालियन की ओर से 1997 में बीकानेर में 10870 हैक्टेयर भूमि पर 160.71 लाख पौधों का रोपण किया। इसके बाद जैसलमेर जिले का दायित्व इसी बटालियन को मिला। इस पर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र में 1997 से कार्य शुरू किया। मोहनगढ़, हमीरनाडा, पनोधर मंदिर क्षेत्र में अब तक 17809 हैक्टेयर में 160.71 लाख पौधों का रोपण किया गया। बटालियन के कार्यवाहक कमान अधिकारी लेफ्टिनेट विक्रमसिंह राठौड़ ने बताया कि जवानों ने हर मौसम में कच्चे खालों से पौधों तक पानी पहुंचाया। अब वर्ष 2018-19 में 300 हैक्टेयर भूमि पर 2.40 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

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पर्यावरण संरक्षण के लिए मिले पुरस्कार
पर्यावरण संरक्षण के लिए बटालियन को कई राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार मिल चुके हैं। जिसमें 1989 में इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार, 1999-2000 में निसर्ग मित्र पुरस्कार, 2000-2001 में महाराणा उदयसिंह मेवाड़ पुरस्कार, 2002-2003 में महारानी मरुधर कंवर पुरस्कार, 2003 में पर्यावरण संरक्षण एवं मरू विकास विशेष पुरस्कार, 2008, 2009, 2016 में जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में प्रसस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा पर्यावरण प्रदर्शनी ट्रॉफी 2010-11, माई अर्थ माई ड्यूटी जी टीवी अवार्ड 2011, इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार 2011, मेहराणगढ़ पहाड़ी पर्यावरण पुरस्कार 2016, बेस्ट झांकी अवार्ड प्रादेशिक सेना दिवस परेड 2016 तथा 2018 में अर्थ केयर अवार्ड प्रदान किया गया।

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