scriptDiwali, the festival that fills new enthusiasm in life | जीवन में नया उत्साह भरने वाला पर्व दीपावली | Patrika News

जीवन में नया उत्साह भरने वाला पर्व दीपावली

जीवन में नया उत्साह भरने वाला पर्व दीपावली

जैसलमेर

Published: November 04, 2021 07:25:16 am

जैसलमेर. कार्तिक मास की अमावस्या को समूचा भारत और दुनियाभर में फैले भारतवंशी उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ अंधेरे पर उजाले की विजय का महापर्व दीपावली मनाया जाता है। धनतेरस से शुरू होने वाले पांच दिवसीय प्रकाश पर्व के तीसरे दिन दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। पांच पर्वों की यह श्रृंखला धनतेरस, रूप चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज के रूप में मनाई जाती है। दीपावली का महात्मय इतना अधिक है कि वर्ष पर्यंत आम भारतीयों को इसका इंतजार रहता है। यह सुख-समृद्धि और जीवन में शुभ लाभ प्रदान करने वाला पर्व माना जाता है।
दीपों की अनेकानेक श्रृंखलाओं से चहुंओर प्रकाश का प्रसार कर दीपोत्सव मनाया जाता है। इस प्रकाश में खुशियां बरसती हैं। गोधूलि बेला से अद्र्धरात्रि के बाद तक विभिन्न शुभ मुहूूर्तों में देवी लक्ष्मी का पूजन प्रत्येक घर-प्रतिष्ठान में विधि विधान से किया जाता है। यह त्योहार केवल दीयों की लडिय़ां संजोने का ही प्रतीक नहीं है, अपितु हमारे जीवन के अंधकार को दूर कर प्रकाशमय जीवन की ओर जाने की दिशा देता है। श्रीराम के माता सीता और लक्ष्मण के साथ चौदह वर्ष वनवास पर जाने से अयोध्यावासी दुखी हो गए थे। उनके जीवन से खुशियां चली गईं। श्रीराम के वनगमन के बाद उनके पिता दशरथ परलोक सिधार गए तथा उनकी माताएं असहनीय पीड़ा से गुजरी। अनुज भरत, शत्रुघ्न सहित पूरा परिवार शोक में डूब गया। भगवान श्रीराम जब चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर पुन: अयोध्या लौटे तो अयोध्यावासियों और उनके भक्तों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई। दीपावली मनाने का सिलसिला तभी से प्रारंभ हुआ माना जाता है। कार्तिक मास की अमावस्या के दिन जब श्रीराम वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे तो सभी के जीवन में खुशीयां लौटी। माताओं का शोक दूर हुआ और अनुज भाइयों की खुशियों का पारावार नहीं रहा।
कहने का तात्पर्य दीपावली जीवन में खुशहाली लौटने का प्रतीक है। जिससे जीवन में उत्साह का नवसंचार होता है और परिवार और आमजन के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है। दीपावली आपसी मनमुटाव को दूर करने का भी दिन है। यदि परिवार या किसी अन्य रिश्ते में किसी कारण दूरियां आ गई हों तो इस दिन एक साथ आकर बैठना चाहिए। सामूहिकता भी हमें मानिसक बल देकर रोगों से दूर करती है और परिवार को सुरक्षारूपी धन देती है। यह गांव के किसान-पशुपालक से लेकर शहर में बसने वालों के लिए भौतिक सुख को दर्शाने का दिन भी है। हमारे मारवाड़ में एक कहावत भी है- दीयाळी रा दीया दीठा, काचर...बोर... मतीरा मीठा्र। जिसका तात्पर्य दीपावली को दीपक की रोशनी देखने को मिलती है तो देसी फल काचर, बोर, मतीरे भी मीठे रस से भर जाते हैं और खाने लायक होते है। जिनका प्रसाद भी मां लक्ष्मी को चढ़ाया जाता है। दीपावली एक ऐसा त्योहार है जिसके आने से पहले ही हर तरह की खुशियां आती हैं। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा कर नीरोगी शरीर के लिए प्रार्थना की जाती है तो दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा कर जीवन को सुख, समृद्ध और खुशहाल बनाने की प्रार्थना की जाती है। हमें भौतिक सुख प्राप्ति के साथ ही स्वस्थ शरीर और खुशहाल जीवन का प्रयास करते हुए दीपावली का त्योहार मनाने की परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए। दीपावली दीपोत्सव के साथ परिवार के हर सदस्य को एक साथ जोड़कर रखने का दिन है। मिल बांटकर खुशियां मनाने का उत्सव है।
- ऋषिदत्त पालीवाल, इतिहासवेत्ता, जैसलमेर
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