हिमालय के नीर की बूंद-बूंद का रहेगा हिसाब, होगी 30 फीसदी पानी की बचत

-स्काडा से पानी की आपूर्ति का वितरण व नियंत्रण
-24 घंटे पानी की निगरानी

By: Deepak Vyas

Published: 24 Jun 2020, 11:03 AM IST

भीखोड़ाई. पोकरण-फलसूण्ड-बालोतरा-सिवाणा पेयजल लिफ्ट परियोजना पूरी तरह से हाईटेक हो गई है। विश्व स्तरीय स्काडा तकनीक से परियोजना से हो रही जलापूर्ति के दौरान हिमालय के नीर के बूंद-बूंद का हिसाब रखा जा रहा है। परियोजना का उपयोग वर्तमान में राजस्थान में जयपुर की बीसलपुर बांध परियोजना में हो रहा है। बीसलपुर बांध परियोजना स्काडा से पूरी तरह से लैस है। गौरतलब है कि आस्ट्रेलिया जैसे गिने-चुने विकसित देशों में स्काडा तकनीक का उपयोग किया जाता है। तकनीक से 27 से 30 फीसदी तक पानी की बचत की जाती है तथा मिनट-टू-मिनट पानी की आपूर्ति की ऑटोमेटिक कंट्रोलिंग भी होती है। गत वर्ष पोकरण से बाड़मेर जिले के संतरा-भाखरी तक कार्यकारी एजेंसी डारा प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पोकरण, ऊजला, माड़वा, भणियाणा, भीखोड़ाई, स्वामीजी की ढाणी, फलसूण्ड व बाड़मेर जिले के हीरा की ढाणी, गिड़ा, सिणतरा, भाखरी पंप हाऊस को स्काडा तकनीक से जोड़ा गया है। सुपरवाइजरी कंट्रोल एण्ड डाटा एक्विजिशन स्काडा तकनीक के अंतर्गत पानी की आपूर्ति का सुपरविजन के साथ कंट्रोल व वितरण तीनों काम एक ही तकनीक से नियंत्रित होते है। इसमें तय डाटा फीड करने के बाद उसके अतिरिक्त पानी जाते ही पकड़ में आ जाता है। यह अलग-अलग फ्रिक्वेंसी डिवाइस पर नेटवर्क तैयार कर प्रेशर के साथ अंतिम छोर तक पानी पहुंचाता है।
वॉल्व व मोटरपंप कम्प्यूटर से होते है कंट्रोल
कंट्रोल रूम के क प्यूटर से सभी पंपहाऊस के मोटरपंप कनेक्टेड होते है। सभी पानी की टंकियों पर सैंसर लगे होते है। जीएलआर, सीडब्ल्यूआर व स्वच्छ जलाशय एसआर के खाली होते ही मोटरपम्प स्वत: ही चालू हो जाते है और उनके पानी से भरते ही मोटर बंद हो जाएगी। सिस्टम पर मोटर के पानी फैकने की क्षमता, पाइपलाइन में पानी का दबाव व टंकी में पानी की उपलब्धता कंट्रोल रूम में नजर आएगी। अब तक अनुमान लगाकर ही कार्य किया जाता था।
ऐसे करेगा काम
स्काडा ऑटोमैटिक ऑनलाइन सिस्टम का कंट्रोल रूम प्रोजेक्ट के पोकरण में स्थित पंप हाऊस पर बनाया गया है। इस सिस्टम से सभी 10 पंप हाऊस को जोड़ा गया है। पूरा काम जीपीआरएस सिस्टम पर ही होगा। कंट्रोल रूम सहित जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता व सहायक अभियंता कार्यालयों में एलईडी लगाई गई है। सिस्टम के माध्यम से पोकरण से बालोतरा तक पूरी पेयजल व्यवस्था पर 24 घंटे नजर रखी जा सकेगी।
बूंद-बूंद का रहेगा हिसाब
स्काडा तकनीक से पोकरण-फलसूण्ड-बालोतरा-सिवाणा पेयजल लिफ्ट परियोजना को जोड़ा गया है। पानी की आपूर्ति का सुपरविजन, कंट्रोल, वितरण सभी कार्य अधिकारी कार्यालय में बैठे देख सकेंगे। कहीं पर भी लाइन में लीकेज या छेड़छाड़ होती है, तो कंट्रोल रूम व पंप हाऊस पर लगे कम्प्यूटर में सूचना आ जाएगी। इस तकनीक से बूंद-बूंद पानी का हिसाब रहेगा।
-राजेन्द्र पुरोहित, अधिशासी अभियंता पोकरण-फलसूण्ड-बालोतरा-सिवाणा पेयजल लिफ्ट परियोजना, पोकरण।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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