नशे ने महंगा कर दिया चुनाव: पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही सक्रिय नशे के सौदागर

-बढ़ी मादक पदार्थों की खपत, पुलिस की जीरो टोलरेंस नीति

By: Deepak Vyas

Published: 17 Sep 2020, 11:40 AM IST

जैसलमेर/पोकरण. सीमांत जिले में पंचायतों के चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही चुनाव में भाग्य आजमाने के लिए तैयार लोगों ने नए सिरे से तैयारियां शुरू कर दी हैं। उनके समानांतर ही जिले के मूल निवासी तथा बाहरी जिलों व राज्यों के तस्करों ने भी ज्यादा से ज्यादा तादाद में नशे का सामान जिले में लाने की जुगत शुरू कर दी है। दरअसल, जिले में किसी भी स्तर के चुनाव में शराब व अन्य मादक पदार्थों की खपत एकदम से बढ़ जाती है।
सरहदी जिले में गत 9 सितंबर को मोहनगढ़ क्षेत्र में वाहन में भरा 1 क्विंटल डोडा पोस्ट बरामद करने और 12 सितंबर को नाचना क्षेत्र में ट्रेक्टर-ट्रॉली में भरा 11 क्विंटल डोडा पोस्ट बरामद होने की घटनाएं सामने आने के बाद यह साबित हो गया है कि लोकतंत्र की नसों में नशा उड़ेलकर वोट हासिल करने का फार्मूला विगत कई चुनावों की तरह इस बार भी होना वाला है। पुलिस के आला अधिकारी भी इस बात को स्वीकारते हैं कि पंचायत चुनाव को लेकर डोडा-पोस्त की आवक बढऩे की पूरी संभावना है और वे भी निगरानी बनाए हुए हैं। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि ग्राम पंचायतों के सरपंच चुनाव में भी लाखों रुपए की अवैध शराब व डोडा पोस्त तथा अफी की खरीद की जाती है।
यहां से आता है नशे का सामान
पत्रिका पड़ताल में यह सच सामने आया है कि जैसलमेर जिले में मादक पदार्थों की मुख्य तौर पर आवक चित्तौडग़ढ़, प्रतापगढ़, राजसमंद आदि सहित मध्यप्रदेश के राजस्थान सीमा से लगते इलाकों से होती है। ऐसे ही जिले में अवैध शराब का प्रवाह मुख्यत: हरियाणा और पंजाब से श्रीगंगानगर जिले से होकर होता है। जिले की सात पंचायत समितियों में 176 ग्राम पंचायतों में आगामी दिनों में सरपंच और वार्ड पंचों के चुनावों का कार्यक्रम घोषित हो चुका है। जैसे-जैसे चुनाव की बेला नजदीक आएगी नशे के कारोबार में तेजी आने की पूरी आशंका है। चुनावी समर में भाग लेने वाले कई प्रत्याशियों से कई बार नशे के बड़े सौदागरों के स्थानीय डीलर्स सम्पर्क में रहते हैं। वे उनकी जरूरत का सामान उन्हें किसी भी प्रकार मुहैया करवाते हैं। गत महीनों से कोविड.19 के कारण रुके हुए पंचायतीराज चुनाव कार्यक्रम के पुन: गति पकडऩे के बाद नशे की विषबैल जिले में एक बार फिर सिर उठा रही है।
नशे ने महंगा कर दिया चुनाव
किसी जमाने में सरपंच का पद गांव के मौजीज व्यक्ति को सौंपने का जिले में रिवाज रहा है। कई गांवों में तो ऐसे व्यक्तियों को भी वर्षों तक सरपंच चुना जाता रहा हैए जिनकी जाति के वोट संबंधित गांव में नगण्य संख्या में होते थे। अब ऐसा नहीं है। सरपंच बनने के लिए वर्तमान में खर्च की कई बार कोई सीमा नहीं रहती और लाखों रुपए में से 60-70 प्रतिशत तक नशे के सामान पर खर्च किए जाते हैं।
हकीकत यह भी
-ग्रामीण क्षेत्रों में कोई उम्मीदवार चुनाव प्रचार के लिए जाता है, तो प्रथा यही है कि सबसे पहले वह अफीम व डोडापोस्त की मनुहार करेगा।
-उम्मीदवार जितना अधिक खर्च करेगा, उसके यहां उतनी अधिक भीड़ जुटेगी।
-चुनाव प्रचार की शुरुआत इन मादक पदार्थों की मनुहार से ही होती है।
-चुनावी रसोड़ोंं में पहले मनुहार होती है तथा उसके बाद व्यक्ति को भोजन करवाया जाता है।
-सरपंचों व वार्डपंचों के चुनाव में भी खर्च की सीमा तय है।
-हर दिन अमूमन 30 से 40 हजार रुपए अफीम, डोडापोस्त व शराब व भोजन पर खर्च हो रहे है।
कच्चे रास्तों से हो रही हैै तस्करी
पंचायतीराज चुनाव में अफीम व डोडापोस्त की हो रही खपत को देखते हुए तस्करों ने अपने नेटवर्क तेज कर दिए है। उनकी ओर से भाव.ताव करने के बाद कच्चे रास्तों से रात के अंधेरे में माल गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। विशेष रूप से कच्चे रास्तों व नहरी क्षेत्र से अफीम व डोडापोस्त की खेप गांवों तक पहुंच रही है। तस्कर ऐसे रास्ते खोज रहे हैए जहां पुलिस की नजर व नाकाबंदी नहीं पहुंच सके।
एक माह में तीन कार्रवाई
बीते दिनों आंकड़ों पर नजर डालें, तो जिले में अवैध मादक पदार्थों की धरपकड़ को लेकर तीन कार्रवाई हो चुकी है। मोहनगढ़ पुलिस ने डोडापोस्त व अफीम की दो अलग-अलग खेप पकड़ी है। इसी प्रकार नाचना पुलिस ने भी 11 क्विंटल अवैध डोडापोस्त बरामद किया है।
पुलिस की जीरो टोलरेंस नीति
जिले में नशे के खिलाफ पुलिस की जीरो टोलरेंस नीति है। पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही जिले में नशीले पदार्थों की आवक की संभावना बढ़ गई है। पुलिस इस संबंध में पूरी तरह से सावचेत और सजग है। नशे के खिलाफ लगातार कार्रवाईयां की जा रही हैं।
-डॉ. अजयसिंह, जिला पुलिस अधीक्षक, जैसलमेर

Deepak Vyas Bureau Incharge
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