12 दिनों से मां के दूध का इंतजार कर रहा है पांच माह मासूम

- परिजन कर रहे है डिस्चार्ज प्रमाण पत्र की मांग
- बीसीएमओ ने प्रमाण पत्र देने से किया इनकार
- दिनभर चलता रहा हंगामा, एसडीएम ने भी की समझाइश

By: Deepak Vyas

Published: 16 May 2020, 05:38 PM IST

पोकरण. कस्बे के वार्ड संख्या एक निवासी पांच माह का छोटा मासूम गत 12 दिनों से मां के दूध का इंतजार कर बिलख रहा है। जबकि चिकित्सा विभाग के अधिकारी अपनी बात पर अड़ते हुए डिस्चार्ज प्रमाण पत्र नहीं दे रहे है। परिजनों व चिकित्सा विभाग के बीच चल रही खींचतान के कारण दूध मुंहे बच्चे व उसके मां की हालत खराब होने लगी है। गौरतलब है कि वार्ड संख्या एक निवासी राबिया पत्नी अब्दुल वहीदखां को पांच अप्रेल को संदेह के आधार पर क्वारेंटीन किया गया था। दूसरी बार की गई जांच में उसके कोरोना संक्रमण पाया गया और 19 अप्रेल को उसे जोधपुर एमडीएम में भर्ती करवाया गया। 29 अप्रेल को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव से नेगेटिव हो गई तथा तीन मई को उसे जोधपुर से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद उसे पोकरण लाकर यहां एक निजी होटल में क्वारेंटीन किया गया है।
परिजनों ने ये लगाए आरोप
इस संबंध में पीडि़ता के पिता अब्दुल गफार ने बताया कि मानवता के नाते राबिया के साथ उसके पांच माह के बच्चे को भेजने की गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन व चिकित्सा विभाग ने संक्रमण का खतरा बताते हुए बच्चे को साथ नहीं रखने दिया। उन्होंने बताया कि नियमानुसार जोधपुर से छुट्टी देने के बाद मरीज को घर भेजना था, लेकिन स्थानीय चिकित्सा विभाग ने घर भेजने की बजाय उसे क्वारेंटीन कर दिया। उन्होंने बताया कि मानवता के नाते भी पांच माह के छोटे बच्चे को न तो मां के पास जाने दिया गया, न ही मां को घर भेजा गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रशासन व चिकित्सा विभाग के उच्चाधिकारियों से भी गुहार लगाई गई, लेकिन वे नहीं माने। जबकि एक अन्य मरीज को जोधपुर से छुट्टी मिलने के बाद सीधे घर भेज दिया गया। उन्होंने चिकित्सा विभाग पर उनके परिवार के साथ भेदभाव का भी आरोप लगाया। उन्होंने चिकित्सा विभाग से 14 मई को डिस्चार्ज करने के बाद इतने दिनों तक क्वारेंटीन में रखने का प्रमाण पत्र देने की मांग की है। उन्होंने बताया कि जब तक प्रमाण पत्र नहीं दिया जाएगा, तब तक वे अपनी पुत्री को घर पर नहीं ले जाएंगे और डिस्चार्ज नहीं लेंगे।
चिकित्सा विभाग ने प्रमाण पत्र देने से किया इनकार
इस संबंध में जब जानकारी ली, तो पता चला कि चिकित्सा विभाग की ओर से डिस्चार्ज का प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है। इस संबंध में जब मीडियाकर्मियों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.बीके बारूपाल व ब्लॉक मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.लोंग मोहम्मद राजड़ से बात करने का प्रयास किया, तो उन्होंने कोई बात कहने से ही इनकार कर दिया।
एसडीएम व तहसीलदार ने की समझाइश
कस्बे की एक होटल में रखी गई राबिया को शुक्रवार को डिस्चार्ज करने की तैयारी की गई। चिकित्सा विभाग की ओर से पुलिस उपनिरीक्षक मोहम्मद हनीफ व जाब्ते की मौजूदगी में 108 एम्बुलेंस से राबिया को घर भिजवाने का प्रयास किया। जानकारी मिलने पर परिजन होटल पहुंच गए और डिस्चार्ज प्रमाण पत्र देने की मांग की। इस दौरान कुछ देर परिजनों ने हंगामा भी किया। विवाद को देखते हुए थानाधिकारी सुरेन्द्रकुमार प्रजापति भी मय जाब्ता होटल पहुंचे। सूचना मिलने पर उपखंड अधिकारी अजय अमरावत व तहसीलदार राजेश विश्रोई भी होटल पहुंचे। उन्होंने परिजनों से बातचीत की, तो परिजनों ने पांच माह के छोटे मासूम को इतने दिनों तक मां से दूर रखने का कारण पूछा। साथ ही उन्होंने नियमों की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए अब डिस्चार्ज करने पर कितने दिनों तक क्वारेंटीन में रखा गया, उसका प्रमाण पत्र देने की मांग की। जिस पर उपखंड अधिकारी व तहसीलदार ने बीसीएमओ से बात की, लेकिन उन्होंने प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया। यहां आए पुलिस दल ने डिस्चार्ज का एक पत्र दिखाया। उसमें अधिकारी के हस्ताक्षर थे, लेकिन सील नहीं लगी हुई थी। उपनिरीक्षक मोहम्मद हनीफ दो बार अस्पताल गए और अधिकारी से सील लगाने की बात कही, तो सील भी नहीं लगाई गई। जिसके कारण अभी तक राबिया क्वारेंटीन सैंटर में ही है और बच्चा घर पर। परिजनों ने बताया कि जब तक कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता, तब तक वे बच्ची को घर नहीं लेकर जाएंगे।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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