JAISALMER NEWS- विकास के कतरे पंख- ठप हो रहे पुराने उद्योग, नयों को नहीं मिल रहा आधार!

JAISALMER NEWS- विकास के कतरे पंख- ठप हो रहे पुराने उद्योग, नयों को नहीं मिल रहा आधार!

jitendra changani | Publish: Jan, 14 2018 06:10:13 PM (IST) Jaisalmer, Rajasthan, India

- सरकार की बेरुखी के चलते बेरोजगार हो रहे कई युवा

जैसलमेर . पोकरण क्षेत्र में कई परम्परागत उद्योग वर्तमान में ठप हो गए हैं। वहीं सरकारी नीतियों के चलते कई नए उद्योगों की प्रबल संभावनाओं के बावजूद बल नहीं मिल रहा। उपखण्ड स्तर पर उद्योग विभाग का कार्यालय भी नहीं है। ऐसे में नए उद्योगों को लेकर युवाओं को जानकारी भी नहीं मिल पा रही। युवाओं को बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है या बाहर के राज्यों का रुख करना पड़ता है। वहीं क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार उद्योग विकास के पूरे प्रयास कर रही है।
यहां पर्यटन उद्योग की पर्याप्त संभावनाएं हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता व जिम्मेदारों की नजरें इनायत नहीं होने के कारण पर्यटन उद्योग को बढ़ावा नहीं मिल रहा। ऐसे ही गत पांच वर्षों में सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा की कोई नई इकाइयां विकसित नहीं हो रही।
बंद होने के कगार पर नमक उद्योग
कस्बे से पांच किमी दूर सैंकड़ों बीघा जमीन में लवण क्षेत्र स्थित है। यहां वर्ष 1985 से पूर्व 50 से अधिक नमक उत्पादन इकाइयां कार्यरत थी। यहां नमक उत्पादन मुख्य उद्योग हुआ करता था। उत्पादित नमक रेलों के माध्यम से देश के विभिन्न भागों में जाता था। इससे प्रतिदिन सैंकड़ों लोगों को रोजगार मिल रहा था। लेकिन इसके बाद रेलवे ने खुदरा लदान बंद कर दिया। वर्तमान में नमक के पर्याप्त भाव नहीं मिलने के कारण यह उद्योग लगभग बंद ही हो गया। यहां अब मात्र पांच-सात इकाइयां ही कार्य कर रही है।
नहीं हो रहा है पर्यटन उद्योग का विकास
परमाणु परीक्षण के बाद विश्व मानचित्र पर पहचान बनाने वाले पोकरण का महत्व और बढ़ गया। यहां भी स्वर्णनगरी की तरह कलात्मक फोर्ट, हवेलियां, मंदिर , सांस्कृतिक विरासत व सामरिक ठिकाने होने के बावजूद सरकार, पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग की उदासीनता के चलते इस उद्योग को बढ़ावा नहीं मिल रहा। ऐसे में पर्यटन क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं को भी कामकाज की तलाश में अन्यत्र जाना पड़ रहा हैै।

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IMAGE CREDIT: patrika

जानकारी देने वाला कोई नहीं
कस्बे से दो किमी दूर जैसलमेर रोड पर औद्योगिक क्षेत्र के लिए भूमि आरक्षित कर सैंकड़ों भूखण्ड आवंटित किए, लेकिन यहां औद्योगिक योजनाओं, ऋण व अनुदान, लघु उद्योग लगाने के लिए मार्गदर्शन व जानकारी देने के लिए उद्योग विभाग का कार्यालय नहीं है। ऐसे में अपेक्षित औद्योगिक विकास नहीं हो पा रहा है। गत 20 वर्षों में यहां करीब 10 पत्थर, पांच ईंट व पांच अन्य इकाइयां ही विकसित हो सकी हैं। ऐसे मेें नए उद्योग नहीं लगने के कारण रोजगार भी नहीं मिल रहा है।
सौर व पवन ऊर्जा का नहीं अपेक्षित विकास
क्षेत्र में भीषण गर्मी व तेज हवाओं के कारण सौर व पवन ऊर्जा की प्रबल संभावनाएं हैं। सरकार व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते गत आठ वर्ष पूर्व क्षेत्र में करीब आधा दर्जन सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए। इनमें से भी दो-तीन संयंत्र बंद हो चुके हैं। पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। क्षेत्र के ओला, राजगढ़, नेड़ान आदि क्षेत्र में कुछ पवन चक्कियां जरूर लगी है, लेकिन पोकरण, भणियाणा, सीमावर्ती नहरी क्षेत्र में कहीं भी पवन ऊर्जा संयंत्र नहीं लग पाए।
सरकार प्रयास कर रही है
प्रदेश के उद्योग मंत्री को क्षेत्र में नमक उद्योग विकसित करने, लघु एवं बड़े उद्योगों के विकास तथा ऊर्जा मंत्री को क्षेत्र में सौर एवं पवन ऊर्जा संयंत्र लगाने, क्षेत्र में नए बिजलीघर स्थापित करने के लिए ज्ञापन सुपुर्द किए गए है। सरकार इस क्षेत्र में हरसंभव प्रयास कर रही है।
- शैतानसिंह राठौड़, विधायक, पोकरण

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