JAISALMER NEWS- यहां मंडरा रहा खतरा, राजनीति में उलझे ऐसे तार हो सकते है जानलेवा

सिर पर मंडरा रहा खतरा- मकानों से सटकर निकल रही हाईटेंशन विद्युत लाइनें

By: jitendra changani

Updated: 20 Mar 2018, 08:24 PM IST

11 व 33 केवी लाइनों के ढीले तार हो सकते है जानलेवा
पोकरण . गत कई वर्षों पूर्व कस्बे के बाहरी व गैर आबाद क्षेत्रों से निकाली गई हाईटेंशन विद्युत लाइनें अब यहां निवास कर रहे लोगों के लिए न केवल परेशानी का सबब बनी हुई है, बल्कि यहां निवास करना खतरे से खाली नहीं है। गौरतलब है कि कस्बे के चारों ओर एक से दो किमी दूरी पर आज से कई वर्ष पूर्व हाईटेंशन विद्युत लाइनें निकाली गई थी। उस समय यहां बस्तियां आबाद नहीं थी तथा खुला मैदान पड़ा था। इन्हीं क्षेत्रों में गत 20-25 वर्षों में धीरे धीरे बस्तियां आबाद हो गई, लेकिन हाईटेंशन लाइनें आज भी उसी क्षेत्र से निकल रही है। जिन्हें हटाकर अन्यंत्र नहीं लगाया जाने के कारण इन बस्तीवासियों पर हर वक्त जान का खतरा बना हुआ है। इन हाईटेंशन विद्युत लाइनों के ढीले तार कभी भी जानलेवा बन सकते हैं।
ऊपर निकल रही तारें, नीचे बन गए मकान
कस्बे के बाहरी क्षेत्र में कहीं जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े लोगों ने कॉलोनियां काट दी है, तो कई लोगों ने जमीनों के बढ़ते भाव के चलते यहां अतिक्रमण कर अपने मकान बना लिए है तथा ऊपर खतरा होने के बावजूद भी नीचे आशियाने बनाकर स्वयं खतरे से खेलने को उतारू हो रहे है। कस्बे में भवानीपुरा, तिरुपतिनगर, शिवपुरा, खींवजबास, हिंगलाज मंदिर के आसपास सहित कई जगहों पर मकानों के ऊपर से हाईटेंशन विद्युत लाइनें निकल रही है। कई मकानों के हालात ये है कि परिवार के लोग छत पर भी नहीं जा सकते है। ये हाईटेंशन तारें मकानों के छतों पर बनी दीवारों के नजदीक होकर निकल रही है, जो लोगों के लिए खतरे का सबब बनी हुई है। बावजूद इसके डिस्कॉम की ओर से इन तारों को अन्यंत्र शिफ्ट करने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

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IMAGE CREDIT: patrika

तारें निकलती रही, आशियाने बनते रहे
कस्बे में स्थित ग्रिड सब स्टेशन से 11 केवी हो या 33 केवी की लाइनें सभी कस्बे के बाहर से खींची गई है। बाहरी इलाकों से ही हाईटेंशन लाइनें जाती है। जब ये लाइनें लगाई गई थी, उस समय यहां सुनसान जंगल हुआ करता था, लेकिन बीते दो दशकों में कस्बे के बाहरी इलाकों में खाली पड़ी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर कई बस्तियां बस गई। यह सिलसिला बदस्तूर आज भी जारी है। एक ओर लोग विद्युत लाइनों के नीचे बसते गए और दूसरी ओर नगरपालिका हो या प्रशासनिक अधिकारी अथवा डिस्कॉम अभियंता सभी इन्हें देखते ही रहे। इसी लापरवाही व सरकारी उदासीनता के चलते कस्बे के चारों ओर से निकल रही विद्युत लाइनों के नीचे बड़ी संख्या में लोग मकान बनाकर बस गए। बीच-बीच में लोगों को विद्युत लाइनों के खतरे का आभास भी होता रहा, लेकिन आसमान छूते जमीनों के भाव में अपने आशियाने बरकरार रखे। इन्हें बेदखल करने की जहमत न तो नगरपालिका प्रशासन उठा पाया और न ही प्रशासन। कभी सुगबुगाहट हुई भी तो उतनी ही तेजी से बंद भी हो गई।
कुछ जगह राजनीतिक प्रभाव, तो कुछ जगह राशि जमा करवाने पर हटी विद्युत लाइनें
कस्बे के तिरुपतिनगर लोढ़ा कॉलोनी के नाम से जानी जाने वाली बस्ती के पास ही 132 केवी जीएसएस स्थित है। इसी जीएसएस से कस्बे के 33 केवी जीएसएस, आसपास क्षेत्र के गांवों में स्थित 11 व 33 केवी जीएसएस के लिए सर्वाधिक हाईटेंशन लाइनें निकलती है। इनमें से अधिकांश लाइनें लोढ़ा कॉलोनी से होकर निकलती है। गत एक दशक पूर्व यहां स्थित करीब ढाई सौ बीघा खेत में कुछ प्रोपर्टी डीलर्स की ओर से कॉलोनी काटी गई थी। यहां सैंकड़ों की संख्या में लोगों को भूखण्ड काटकर बेच दिए गए। इनमें से कई भूखण्डों पर तो बड़े बड़े राजनेताओं व प्रभावशाली लोगों के भूखण्ड व बंगले होने के कारण उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग लेते हुए विद्युत लाइनें हटवा दी, तो कई लोगों ने अपने ही भूखण्डों पर लगाए गए विद्युत पोल व हाईटेंशन लाइनें हटवाने के लिए डिस्कॉम में राशि जमा करवाकर लाइनें हटवा दी। बावजूद इसके आज भी दर्जनों भूखण्डों पर हाईटेंशन लाइन के पोल व उस पर विद्युत तारें लगी हुई है, जो हटवाने के लिए डिस्कॉम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। उनके लिए इन हाईटेंशन लाइनों के बीच मकान का निर्माण करवाना मुश्किल हो रहा है। कई लोगों ने अपने भूखण्ड का कुछ भाग खाली छोड़ते हुए जोखिम उठाते हुए मकान निर्माण करवा लिए है। इन मकान मालिकों को भी हाईटेंशन लाइनों के टेंशन के बीच जीना पड़ रहा है।

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jitendra changani Desk/Reporting
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