JAISALMER NEWS- भूल से भी बने बाल विवाह के साक्षी तो भुगतनी होगी इतनी बड़ी...

By: jitendra changani

Published: 08 Apr 2018, 11:53 AM IST

Jaisalmer, Rajasthan, India

Rajasthan patrika

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पोकरण के सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित विधिक चेतना शिविर में संबोधित करते न्यायाधिकारी व मंचासीन अतिथि।

विधिक चेतना शिविर का हुआ आयोजन
पोकरण (जैसलमेर). ताल्लुका विधिक सेवा समिति की ओर से शनिवार को स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में विधिक चेतना शिविर का आयोजन किया गया। समिति के अध्यक्ष व ग्राम न्यायालय सांकड़ा के न्यायाधिकारी जितेन्द्रकुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी रुढीवादी परंपराओं के चलते नाबालिगों के विवाह कर दिए जाते है, जो कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से अक्षय तृतीया के अबूझ सावे पर बाल विवाह होते है। उन्होंने कहा कि विवाह के लिए लडक़े की उम्र 21 वर्ष व लडक़ी की उम्र 18 वर्ष निर्धारित की गई है। उन्होंने बाल विवाह की रोकथाम के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत विवाह करवाने वाले परिजनों के साथ सहयोग करने वाले, पंडित, मौलवी, पादरी, नाई, बाराती, अतिथि, बैण्ड वाले, भोजन बनाने वाले, टैंट वाले, स्थान उपलब्ध करवाने भी दोषी है। उन्होंने क्षेत्र में बाल विवाह होने की सूचना तत्काल प्रशासन व पुलिस को देने की बात कही। इस अवसर पर रतनलाल पुरोहित ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता ओमप्रकाश रंगा, विद्यालय के प्रधानाचार्य कन्हैयालाल छंगाणी, भोमराज पणिया, श्रीगोपाल जोशी, मोहनलाल पुरोहित, अजय केवलिया, रवि बिस्सा, सुरेन्द्र केवलिया सहित विद्यार्थी उपस्थित थे। पार्षद नारायण रंगा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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