JAISALMER NEWS- इसकी खूबसूरती पर लगे दाग नहीं मिटे तो होगा जैसलमेर को बड़ा नुकसान

By: jitendra changani

Published: 12 Mar 2018, 10:57 AM IST

Jaisalmer, Rajasthan, India

Rajasthan patrika

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gadisar lake

- जिस विरासत को दखने आते हैं सैलानी, उसी की अनदेखी
- ऐतिहासिक गड़ीसर के कई स्थल जर्जर
- पत्थर निकले, सीढिय़ां टूटी, कई कंगूरे व बंगलियां क्षतिग्रस्त
- सैलानी हो सकते हैं हादसे का शिकार
जैसलमेर . स्वर्ण नगरी की जिस पुरातन धरोहर को देखने लाखों सैलानी खिंचे चले आते हैं, उस अमानत की सुरक्षा को लेकर किसी को चिंता ही नहीं है। हालांकि पर्यटन व्यवसाय से वर्षभर में करोड़ों का व्यापार होता है, कई लोगों की आजिविका चलती है, लेकिन इसका आधार लगातार कमजोर होता जा रहा है।
शहर में सैकड़ों वर्ष प्राचीन गड़ीसर सरोवर की पुरा सम्पदा ध्वस्त होने की कगार पर है। इसकी छतरियां, बंगलियां व कंगूरे जर्जर हो रहे हैं। कई पत्थर निकल गए तो उन्हें संभालने वाला कोई नहीं है। ऐसे में इन्हें निहारने पहुंचने वाले सैलानी कभी हादसे का भी शिकार हो सकते हैं।
अनमोल विरासत के बुरे हाल
सरोवर की सुंदरता में चार चांद लगाने वाली बीच बंगली से लेकर किनारे की छतरियां जर्जर हो चुकी हैं। उनकी सीढिय़ां निरंतर कमजोर हो रही हैं। इन पर चढकऱ प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में सैलानी सरोवर का दीदार करते हैं। ऐसे में कभी भी ये सीढिय़ां गिर कर हादसे का कारण बन सकती हैं। ऐसे ही पत्थर की पुरानी रैलिंग गिर चुकी है तो बीच बंगली तो लगभग जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गई है। सैकड़ों वर्ष पुरानी इस अनमोल विरासत की फोटोग्राफी में उनकी बर्बादी भी साफ परिलक्षित होती है। जैसलमेर के सरकारी तंत्र की यह लापरवाही सैलानियों के साथ देश तथा दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच रही है। यहां आने वाले सैलानियों से भी पूछें तो यही कहते हैं- बहुत बुरे हाल हैं...।
दो वर्ष से धराशायी मयूर
सरोवर की बंगली पर कंगूरे के तौर पर बहुत सुंदर नृत्य करते मोरों की आकृतियां उकेरी गई हैं। ऐसा एक मयूर पिछले दो साल से पानी में गिर गया। उस पत्थर को पुन: लगवाना तो दूर किसी सुरक्षित स्थान तक रखवाने के लिए भी कोई नहीं सोच रहा। गड़ीसर स्थित पठियालों की सीढिय़ां भी टूट रही हैं। ये वही जगहें हैं जहां सैलानी सुकून के दो पल गुजारने पहुंचते हैं।
नहीं हो रहा जरूरी काम
ऐसा नहीं है कि, नगरपरिषद की ओर से गड़ीसर पर पिछले अर्से के दौरान कोई काम नहीं करवाए गए हो, लेकिन परिषद का यहां पैवेलियन व शौचालय निर्माण जैसे कार्य करवा रही है। पिछले अर्से लाखों रुपए की लागत वाले इसी तरह के कार्य करवाए गए हैं। सैकड़ों वर्ष पुरानी धरोहरों की मरम्मत करवाने के प्रति पुरातत्व विभाग भी उदासीनता दर्शा रहा है। सरोवर के मध्य स्थित निर्माण पुराने हैं और पुरातात्विक महत्व वाले हैं, ऐसे में उनकी मरम्मत पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों की देखरेख में ही करवाया जा सकता है। वहीं विभाग सोनार दुर्ग के बाद जैसलमेर की इस सबसे पुरानी विरासत को सहेजने की परवाह नहीं कर रहा।

फैक्ट फाइल
-1367 में रावल गड़सी सिंह ने बनवाया गड़ीसर
-05 लाख सैलानी प्रतिवर्ष आते हैं गड़ीसर
-70 के दशक तक पूरे शहर की प्यास बुझाता था गड़ीसर

चाहिए पुरातत्व विभाग का मार्गदर्शन
गड़ीसर के आसपास पिछले अर्से नगरपरिषद ने नव निर्माण कार्य करवाए हैं। जहां तक सरोवर के मध्य में स्थित धरोहरों का सवाल है, उनकी मरम्मत आदि का कार्य पुरातत्व विभाग के दिशा-निर्देश में ही करवाया जा सकता है।
-झब्बरसिंह चौहान, आयुक्त, नगरपरिषद, जैसलमेर

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