विषम परिस्थितियोंं के बावजूद किसानों के हौसले बुलंद

परवान चढ़ रही है हसरतें
-जिला मुख्यालय से 225 किमी दूर नोख गांव में सकारात्मक स्थिति

By: Deepak Vyas

Published: 13 Dec 2020, 05:48 PM IST

नोख. जिला मुख्यालय से करीब २२५ किमी दूर नोख गांव के किसानों के हौंसले विषम परिस्थितियों के बावजूद बुलंद नजर आ रहे हैं । यहां पर बारिश पर निर्भर खेती की विषम परिस्थितियों के बाद भी वो इस परंपरागत पेशे से जुड़े हुए हैं । हालांकि यहां सिंचित क्षेत्र बहुत ही कम है, लेकिन जितना भी है उसमें भी किसान जी जान से जुटे हुए हैं । यहां भी अंतिम छोर पर होने की बदकिस्मती पीछा नहीं छोड़ रही है, लेकिन फिर भी किसान लचर व्यवस्था व विभागीय उदासीनता से लड़कर खुद के लिए रोडमेप बना रहे हैं ।
एक ही वितरिका से सिंचाई
नोख गांव के आसपास इंदिरा गांधी नहर परियोजना से बड़ी संख्या में वितरिकाओ का निर्माण हो रखा है, लेकिन नोख के खेतों में इस समय गुरु जंभेश्वर लिफ्ट नहर फलोदी से निकली नोख वितरिका से ही सिंचाई हो रही है। हालांकि नोख वितरिका के अंतिम छोर पर केवल कुछ किसानों को ही इसका लाभ मिल रहा है । इसमें भी अंतिम छोर पर होने से सिंचाई के पानी की आवक कमजोर रहती है, बावजूद इसके नोख के किसान गत 6 से 7 वर्षों से लचर व्यवस्थाओं के बावजूद सिंचाई के पानी की जद्दोजहद में जुटे रहते हैं और अपने हक के पानी के साथ साल में दो फसल का लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं ।
हकीकत यह भी
नोख गांव के बाशिंदों के रोजगार का मुख्य साधन खेती ही आज भी बना हुआ है हालांकि परिस्थितियां ऐसी है कि खेती करने वालों के लिए यह किसी सजा से कम नहीं है । कारण यह कि यहां पर समय पर बारिश नहीं होती, लेकिन बावजूद इसके नोख के किसान परंपरागत व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और परिस्थितियों से लड़ते हुए अपना दमखम लगा रहे हैं उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में अधिकतर अकाल की परिस्थितियां ही बनती है जिससे खेती करने वालों को लाभ की संभावना बहुत कम होती है।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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