scriptIn the name of registration minibus, Bal Vahini was running | पंजीयन मिनीबस के नाम पर, चला रहे थे बाल वाहिनी | Patrika News

पंजीयन मिनीबस के नाम पर, चला रहे थे बाल वाहिनी

- पनवानाडा के दो चिराग बुझने के बाद गांव में नहीं जला चूल्हा, छाई शोक की लहर
- परिजनों का हो रहा बुरा हाल

जैसलमेर

Updated: February 18, 2022 07:27:50 pm

पोकरण (जैसलमेर). क्षेत्र के फलसूण्ड थानांतर्गत जैतपुरा फांटा के पास गुरुवार को सुबह चालक की लापरवाही से एक निजी स्कूल की बस पलट जाने से दो बच्चों की मौत हो गई थी। इस मामले में जब पत्रिका टीम ने पड़ताल की तो जानकारी मिली कि 2004 मॉडल की मिनीबस का पंजीयन बाल वाहिनी के रूप में नहीं करवाया गया था। सिटी बस के रूप में संचालित हो रही बस को पीले रंग से कलर कर बाल वाहिनी के रूप में दौड़ाया जा रहा था। जबकि इस तरफ परिवहन विभाग व पुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया। तीन वर्षों से धड़ल्ले से यह बस भागती रही, लेकिन अधिकारियों को कार्रवाई को लेकर कभी फुर्सत नहीं मिली। गौरतलब है कि फलसूण्ड थानाक्षेत्र के जैतपुरा गांव में एपीजे अब्दुल कलाम पब्लिक स्कूल संचालित है। इस विद्यालय में अध्ययनरत छात्र छात्राओं को स्कूल लाने और पुन: घर छोडऩे के लिए एक स्कूूल बस लगाई गई है। यह स्कूूल बस पुरानी है और फिटनेस 2020 के बाद नहीं करवाया गया है। गुरुवार को रोजमर्रा की तरह स्कूल बस के चालक जैतपुरा निवासी सुभानखां पुत्र कोजेखां ने 22 सीटर की सिटी बस में 35-40 बच्चों को बिठाया और स्कूल की तरफ बढऩे लगा। विद्यालय पहुंचने में देरी के भय से चालक ने बस को तेज गति व लापरवाही से चलाया और जैतपुरा फांटा के पास दुर्घटना हो गई। इस हादसे में दो मासूम बच्चों फलसूण्ड के पनवानाडा निवासी कासमखां पुत्र जमालखां उर्फ जमेखां व हासमखां पुत्र समीरखां की मौत हो गई थी। जबकि दो दर्जन से अधिक बच्चे घायल हो गए। जिन्हें तत्काल फलसूण्ड के राजकीय अस्पताल लाया गया। यहां 20 घायलोंं को जोधपुर रैफर किया गया। जिनका जोधपुर के एम्स अस्पताल में उपचार चल रहा है। जिनकी सभी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। हादसे के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व केबिनेट मंत्री शाले मोहम्मद ने संवेदना जताते हुए घायलों के उपचार की माकूल व्यवस्था की और जोधपुर जिला कलक्टर से बात कर घायलों की मदद की।
2019 में की विद्यालय की स्थापना
इस विद्यालय की स्थापना 21 जून 2019 में की गई थी। विद्यालय का उद्घाटन समारोह दर्जनों जनप्रतिनिधियों के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजित किया गया था। विद्यालय के प्रबंधक गफूरखां है, जो सीमा सुरक्षा बल में कार्यरत है। साथ ही उनके एक-दो पोर्टनर और है, जो विद्यालय का संचालन करते है। यह विद्यालय उच्च प्राथमिक स्तर तक संचालित होता है।
लापरवाही ने लील लिए लाल
विद्यालय में लगाई गई मिनीबस में क्षमता 22 सवारियों की है। जबकि क्षमता से अधिक सवारियों को भरकर इस बस से बच्चों को लाया व ले जाया जाता है। 35-40 बच्चों को एक साथ बिठाकर चालक ने तेज गति व लापरवाही से बस को चलाया और दुर्घटना कारित की। चालक की इस लापरवाही ने दो घरों के चिराग को बुझा दिया।
कब होगी ऐसे वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई
पोकरण क्षेत्र में कई ऐसे निजी स्कूल है, जिनके बाल वाहिनियों का संचालन होता है। इन वाहनों के फिटनेस, परमिट आदि की जांच लंबे समय से नहीं हो रही है। 2019 में जैतपुरा में स्थापित हुई स्कूल की बस की परिवहन विभाग यह भी जांच नहीं कर पाई कि धड़ल्ले से ग्रामीण क्षेत्र में पीले रंग व बाल वाहिनी के नाम पर संचालित हो रही मिनीबस बाल वाहिनी के नाम से पंजीयन नहीं है। जबकि 2020 में इसका फिटनेस भी किया गया है। उस समय भी पंजीयन की पूरी जांच नहीं की गई और फिटनेस कर छोड़ दिया गया। क्षेत्र में ऐसी कई बाल वाहिनियां है, जिनके फिटनेस, परमिट व अन्य कागजात सही नहीं है। जिनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
नोटिस जारी करने के एक माह बाद भी नहीं दी रिपोर्ट
जिला परिवहन अधिकारी टीकूराम पूनड़ ने बताया कि 10 जनवरी को जिला कलक्टर की अध्यक्षता में यातायात सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में लिए निर्णय के बाद जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र जारी कर विद्यालयों में संचालित हो रही बाल वाहिनियों की रिपोर्ट मांगी गई थी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर संस्थाप्रधान की जिम्मेवारी तय की गई थी, लेकिन बैठक के एक माह बाद भी अभी तक किसी भी संस्थाप्रधान ने बाल वाहिनी की रिपोर्ट प्रेषित नहीं की है।
जांच के लिए दिए गए है निर्देश
उपखंड स्तर पर सड़क सुरक्षा समिति गठित है। जिसकी बैठक बुलवाना परिवहन विभाग का कर्तव्य है, लेकिन कई महिनों से यह बैठक नहीं हो पाई है। जिस पर परिवहन अधिकारी को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही क्षेत्र में बाल वाहिनी के नाम पर संचालित हो रहे वाहनों की जांच व कार्रवाई के लिए भी निर्देशित किया गया है।
- राजेशकुमार विश्रोई, उपखंड अधिकारी, पोकरण।
कार्यालय में नहीं मिले कागज
स्कूल में लगी बस का पंजीयन निजी बस के रूप में था। स्कूल के संचालकों ने बाल वाहिनी के रूप में पंजीयन के लिए आवेदन किसी एजेंट को दिए थे, जो अभी तक कार्यालय में जमा नहीं करवाए गए है। जिसकी जांच कर कार्रवाई की जा रही है।
- टीकूराम पूनड़, जिला परिवहन अधिकारी, पोकरण/जैसलमेर।
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