JAISALMER NEWS- राजस्थान के इस शहर में सैलानियों का होता है स्पेशल स्वागत, गर्मी और अंधेरे में टपकता पसीना !

By: jitendra changani

Published: 25 Apr 2018, 01:30 PM IST

Jaisalmer, Rajasthan, India

Rajasthan patrika

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इसलिए कटा कनेक्शन जानकारी के अनुसार सोनार दुर्ग के चारों तरफ लगी लाइटों का करीब पच्चीस लाख रुपए का बिल बकाया होने के चलते डिस्कॉम ने गत 12 मार्च को नगरपरिषद जैसलमेर कार्यालय के साथ पर्यटक स्वागत केंद्र का विद्युत संबंध विच्छेद कर दिया था। पर्यटन विभाग का तर्क है कि स्थानीय निकाय विभाग के शासन सचिव मंजीत सिंह ने जैसलमेर दौरे के समय दुर्ग की लाइटों का भुगतान नगरपरिषद से करवाने की बात कही थी, लिहाजा बकाया 25 लाख रुपए नगरपरिषद चुकाए।जबकि जैसलमेर नगरपरिषद ने कहा कि वह दुर्ग की लाइटों का पुराना बकाया नहीं चुकाएगी।इस कशमकश के चलते विद्युत निगम ने दोनों कार्यालयों के कनेक्शन काट दिए। जिसमें से नगरपरिषद ने तो जिला कलक्टर को मध्यस्थ बनाकर अपना कनेक्शन बहाल करवा लिया, लेकिन पर्यटक स्वागत केंद्र की सुनवाई न जैसलमेर स्तर पर हुई और न ही जयपुर।

सोनार दुर्ग की लाइटों के बकाया के चलते काटा गया कार्यालय का कनेक्शन

जैसलमेर. पर्यटननगरी जैसलमेर का पर्यटक स्वागत केंद्र पिछले करीब डेढ़ माह से अंधेरे में है। इसके बावजूद जयपुर से लेकर जैसलमेर तक के जिम्मेदारों को मानो कोई परवाह ही नहीं। कार्यालय का सारा कामकाज ठप पड़ा है। किसी मेल का जवाब देना हो तो कार्यालयी कार्मिकों को बाजार दौडऩा पड़ता है। भीषण गर्मी में कार्मिकों व आगंतुकों को बिना कुलर-पंखों के बैठना पड़ता है और खिड़कियां खोल कर सूरज की रोशनी में जैसे-तैसे काम चलाना पड़ता है। यहां यह हाल गत 12 मार्च से कायम है।जब सोनार दुर्ग के चारों तरफ लगी फ्लड लाइटों के बाबत 25 लाख रुपए का बकाया होने के चलते नगरपरिषद के साथ पर्यटक स्वागत केंद्र का बिजली कनेक्शन डिस्कॉम ने विच्छेद कर दिया। नगरपरिषद ने तो तुरंत हरकत में आकर कुछदिनों में कनेक्शन पुन:बहाल करवा दिया, लेकिन स्वागत केंद्र तब से अंधेरे में ही डूबा हुआ है।
सोनार दुर्ग अधेंरे में
सरकारी विभागों के बीच चल रही खींचतान के चलते विश्व प्रसिद्ध सोनार दुर्ग पिछले लम्बे अर्से से अंधेरे में डूबा हुआ है। दुर्ग के चारों तरफलगी लाइटों के कारण रात में सोने-सा चमकने वाला सोनार किला को अंधेरे में डूबा देखकर सैलानियों के साथ स्थानीय बाशिंदों को भी पीड़ा का अनुभव होता है।लेकिन सरकारी महकमे इस सबसे बेखबर बने हुए हैं।

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