JAISALMER NEWS- इस सडक़ पर आते ही आती है यह बड़ी मुसीबत, कांपने लगते है वाहन!

- चौधरियों की ढाणी से पाबनासर जाने वाली सडक़ उखड़ी

By: jitendra changani

Published: 05 Mar 2018, 10:05 PM IST

सडक़ बनने के बाद नहीं हुई मरम्मत, आवागमन हुआ मुश्किल
जैसलमेर . फतेहगढ़ उपखण्ड मुख्यालय से चार किलोमीटर दूर स्थित चौधरियों की ढाणी से पाबनासर सडक़ लम्बे समय से क्षतिग्रस्त है। इस पर बने गहरे गड्ढे हर समय राहगीरों व वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। गौरतलब है कि वर्षों पूर्व सार्वजनिक निर्माण विभाग ने यहां सडक़ का निर्माण करवाया था, लेकिन उसके बाद एक बार भी मरम्मत नहीं होने से सडक़ पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। चौधरियों की ढाणी, पाबनासर, कोडियासर व डांगरी क्षेत्रों में लगे सैकड़ों पवन ऊर्जा संयंत्र व नलकूप होने के कारण इस मार्ग पर दिन-रात वाहनों का आवागमन लगा रहता है। ऐसे में सडक़ क्षतिग्रस्त होने के कारण राहगीरों व वाहन चालकों का आवागमन मुश्किल हो रहा है। जगह-जगह बने गड्ढों के कारण हर समय हादसे की आशंका रहती है। चौधरियों की ढाणी से पाबनासर 20 से 25 किलोमीटर की दूर है, लेकिन क्षतिग्रस्त सडक़ से वाहन चालकों को एक से डेढ़ घंटे का समय लग रहा है। जिससे उन्हें परेशानी हो रही है।
इनका कहना
चौधरियों की ढाणी से पाबनासर सडक़ खस्ताहाल है। आवागमन के दौरान काफी दिक्कत हो रही है। सडक़ निर्माण के बाद एक बार भी मरम्मत नहीं हुई। ऐसे में यहां हादसे की आशंका बनी हुई है।
- सुमारखां, निवासी कोडियासर
सडक़ मरम्मत के लिए संबंधित विभाग व जनप्रतिनिधियों को अवगत करवाया, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। इस मार्ग पर प्रतिदिन सैंकड़ों वाहनों की आवाजाही रहती है।
- दीपदान रतनू, निवासी सांडा।

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12 साल से सडक़ क्षतिग्रस्त, नहीं हो रही मरम्मत
ग्राम पंचायत बडोड़ा गांव के आशायच को जोडऩे वाली सडक़ करीब साढ़े बारह साल से क्षतिग्रस्त है, लेकिन अब तक किसीने इसकी सुध तक नहीं ली। ऐसे में गांव से शहर की ओर आवागमन करने वालों को परेशानियां झेलनी पड़ रही है। जानकारी के मुताबिक इस सडक़ का निर्माण वर्ष 2005 में निर्माण हुआ था। इसके बाद मरम्मत नहीं होने से जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। ऐसे में हर समय हादसे की आशंका रहती है। कई जगह रेत जमा हो जाने से वाहन निकालना भी मुश्किल हो जाता है। इसको लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत करवाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी है। नजदीकी ढाणियां सुखसिंह की ढाणी, राजसिंह की ढाणी, सदात, उन्नड़ों की ढाणी, देवीसिंह की ढाणी, रामूराम भील की ढाणी सहित अन्य ग्रामीणों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। ऐसे में टूटी सडक़ से लोगों को आकल फांटे से आशायच की दूरी तय करने में करीब एक घंटा लग जाता है। हुकमसिंह, पाबूदानसिंह, चुतरसिंह, उदयसिंह, रेवन्तसिंह, चनणसिंह सिसौदिया सहित सभी ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त सडक़ मार्ग को शीघ्र दुरस्त करवाने की मांग की है।

कंकरीट पर चलना दुभर
टूटी सडक़ पर बिखरी कंकरीट के चलते चलना भी दुभर हो गया है। ऐसे में सडक़ को छोड़ वाहन चालक पटरे का सहारा लेने को मजबूर हैं।
- रिड़मलसिंह, आशायच

गांव से शहर जाने में काफी परेशानी होती है। जगह-जगह रेत से अटी सडक़ व ऊबड़ खाबड़ रास्ते पर कभी भी हादसा हो सकता है। समस्या का शीघ्र समाधान हो।
- दीपसिंह, आशायच
आशायच सडक़ का डामरीकरण व सुखसिंह की ढाणी के सडक़ मार्ग का कार्य एक महिने के अन्दर शुरू करवा दिया जाएगा।
- छोटूसिंह भाटी, विधायक जैसलमेर

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jitendra changani Desk/Reporting
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