Jaislamer video- पत्रिका अभियान - बोझ नहीं, कवच है हेलमेट पुलिस को पकडऩे की नौबत ही क्यों आए ?

-दुपहिया चालकों को जागरुक करने की जरूरत
-बिना जन समर्थन पहले भी विफल रही है मुहिम

By: jitendra changani

Published: 23 Aug 2017, 09:07 PM IST

जैसलमेर. पुलिस प्रशासन की ओर से जिला मुख्यालय पर दुपहिया वाहन चलाने वालों के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य किया गया है। इस संबंध में पुलिस जब तक सख्ती दिखाती है, केवल तभी तक सडक़ों पर वाहन चलाते समय चालक सिर पर हेलमेट धारण किए रखते हैं। जैसे ही पुलिस किसी और काम में व्यस्त हुई और उसकी तरफ से ढील छोड़ी गई, वैसे ही सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है। जैसा वर्तमान में जैसलमेर में देखने में आ रहा है। पुलिस के बड़े हिस्से के रामदेवरा मेला में व्यस्त होने की वजह से बाहर क्षेत्र की सडक़ों पर भी बमुष्किल 10 से 15 फीसदी दुपहिया चालक ही हेलमेट लगाए हुए नजर आते हैं। दरअसल, पहले भी अलग-अलग समय में पुलिस की तरफ से जैसलमेर षहर मोटरसाइकिल व स्कूटर आदि दुपहिया वाहनों को चलाते समय हेलमेट लगाना अनिवार्य बनाया गया है लेकिन पुलिस की इस मुहिम को अपेक्षित जन समर्थन नहीं मिला और वह विफल हो गई।
स्वप्रेरित हो आमजन
अभियान चलाने के दौरान पुलिस बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले के खिलाफ चालान करती है। जैसलमेर के गड़ीसर चौराहा से बाड़मेर या जोधपुर मार्ग, शिव रोड चौराहा, विजय स्तम्भ चौराहा, डेडानसर बाइपास, ट्रांसपोर्ट नगर चौराहा आदि पर आाजाही करने वाले लोगों को अक्सर यातायात कर्मियों से चालान की कार्रवाई के दौरान उलझते हुए देखा जा सकता है। चालान काटने का भय दिखाकर लोगों को कुछ समय के लिए हेलमेट पहनने के लिए बाध्य किया जा सकता है, हमेशा के लिए नहीं। इसके लिए जरूरी है कि पुलिस की ओर से हेलमेट के नुकसान व फायदे बताने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए। मुख्य मार्गों पर यातायात कर्मियों की ओर से पहले समझाईश पर जोर दिया जाए। इससे लोग स्वत: हेलमेट लगाने के लिए प्रेरित होंगे, अन्यथा अभी जिस मार्ग पर यातायात कर्मियों की मौजूदगी हो, वहीं दुपहिया चालक हेलमेट पहने दिखाई देते हैं।
पुलिसिया रौब नहीं, नवाचार ला सकते हैं रंग
हेलमेट नहीं पहनने पर चालान कटवाने वाले कई लोगों का आरोप है कि हेलमेट नहीं पहने होने पर उनसे यातायात कर्मियों की ओर से अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता। मार्ग में बाइक रुकवाकर उन्हें अपमानित किया जाता है। जबकि पुलिस अगर रौब-दाब की बजाय नवाचार करे तो ज्यादा असर पड़ेगा। मसलन, रक्षाबंधन पर पुलिसवालों ने बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों के बालिकाओं की तरफसे राखियां बंधवाकर उनसे हेलमेट पहनने का वचन दिलाया था।इसी प्रकार के और नवाचार भी समय-समय पर अपनाने की आवश्यकता है।
ऐसे आ सकती है जागरुकता
जैसलमेर के मुख्य मार्गों पर हेलमेट के फायदों व नुकसान को दर्शाने वाले बैनर लगाने की जरूरत है। मुख्य मार्गों पर यातायातकर्मियों की ओर से बाइक सवारों को हेलमेट नहीं पहनने के नुकसान बताकर सामंजस्य बनाकर सहयोग करने के लिए कहा जाए। युवा वर्ग को इस मुहिम से जोड़ा जा सकता है। स्कूल और कॉलेज स्तर पर कार्यशालाओं, सभाओं का आयोजन किया जा सकता है। इससे घर-घर में हेलमेट पहनने की जरूरत पर विचार प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी।

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jitendra changani Desk/Reporting
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